'पत्रकारों को निशाना बनाया गया, ये G7 में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के उलट' : एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) ने आज (सोमवार) कहा कि भारत में पत्रकारों और कार्टूनिस्टों को निशाना बनाया जा रहा है.

'पत्रकारों को निशाना बनाया गया, ये G7 में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के उलट' : एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

प्रतापगढ़ के पत्रकार की रहस्यमयी मौत हो गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खास बातें

  • एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का बयान
  • 'पत्रकारों को निशाना बनाया गया'
  • 'ये G7 में प्रधानमंत्री के भाषण के उलट'
नई दिल्ली:

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) ने आज (सोमवार) कहा कि भारत में पत्रकारों और कार्टूनिस्टों को निशाना बनाया जा रहा है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के विचारों और अभिव्यक्ति की आजादी और साइबर स्पेस में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के वैश्विक रुख के विपरीत है. पत्रकारों की संस्था ने आगे कहा कि जब उनके विचार प्रतिष्ठान के लिए आलोचनात्मक होते हैं तो सरकार स्वयं इन पेशेवरों पर दबाव डालती है.

एडिटर्स गिल्ड ने कहा, 'सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और कार्टूनिस्टों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि सरकार द्वारा इन प्लेटफार्मों पर ऐसे महत्वपूर्ण पत्रकारों को हटाने के लिए दबाव डाला जा रहा है कि वे देश के कानून का उल्लंघन कर रहे हैं.'

गिल्ड ने आज एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा, 'यह सब उन प्रतिबद्धताओं के विपरीत है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में लोकतंत्र, खुलेपन और सत्तावाद के खिलाफ की थी.'

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मीडिया विज्ञप्ति ने पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की कल हुई रहस्यमयी मौत के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के व्यवहार पर दुख व्यक्त किया. प्रतापगढ़ स्थित टेलीविजन रिपोर्टर की रविवार रात मौत हो गई. इस घटना को पुलिस ने मोटरसाइकिल से हुई दुर्घटना बताया. एक दिन सुलभ ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिख बताया था कि शराब माफिया पर उनकी हालिया रिपोर्ट के बाद उन्हें खतरा महसूस हो रहा है.

गिल्ड की टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के जी-7 शिखर सम्मेलन में संबोधन के एक दिन बाद आई है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया था कि साइबर स्पेस लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक अवसर बना रहे, इसे बिगाड़ने का नहीं.


हाल ही में भारत सरकार और कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बीच नए डिजिटल कानून को लेकर तनातनी देखने को मिली थी. देश में विरोध की आवाजों पर बंदिशें लगाने को लेकर भी केंद्र की आलोचना की जा रही है.

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