
फाइल फोटो
नई दिल्ली:
काले धन पर वार के तहत नोटबंदी का आज पूरा एक महीना बीत गया है.इस दौरान कैश की किल्लत के चढ़ते लोगों को कतारों में खड़े देखा गया. सरकारी दावे जरूर हुए कि लाइनें छोटी होती जा रही हैं लेकिन अभी भी कतारें लंबी ही दिखाई देती हैं. सिर्फ इतना ही नहीं इसका सबसे बुरा असर बाजार पर पड़ा है. इसके चलते कई बाजार में मांग ठंडी पड़ने से कई चीजों के दाम गिरे हैं तो वहीं कई चीजों के दाम बढ़े हैं. इसी सिलसिले में जानिए कि कौन सी चीजों के दाम महंगे हुए और किस चीजों के दामों में गिरावट दर्ज की गई :
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फिसला सोना
नोटबंदी और सोने के मसले पर स्थिति साफ करने के बाद सोने की स्थिति में गिरावट दर्ज की गई. यह पिछले महीने के सबसे निचले स्तर तक गिर गया. हाल के दिनों में यह 31 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आस-पास तक पहुंच गया था. अब यह 29 हजार से भी नीचे पहुंच गया है. यानी मोटे तौर पर प्रति दस ग्राम सोने में दो हजार रुपये तक गिरावट हुई है.

रिएल एस्टेट पर मार
विशेषज्ञों के मुताबिक इस सेक्टर पर सर्वाधिक बुरा असर पड़ा है और तकरीबन नए फ्लैटों के दामों में अगले छह महीनों से लेकर साल भर के भीतर तक कई बड़े शहरों में 30 प्रतिशत गिरावट के आसार हैं. रीसेल प्रॉपर्टी पर भी नोटबंदी की मार पड़ी है और बाजार में नए ग्राहक नहीं दिख रहे हैं. इस क्षेत्र से संबंधित एक रिसर्च फर्म के मुताबिक इस फैसले के असर से अगले एक साल में आठ लाख करोड़ की पूंजी साफ होने की आशंका है. वैसे माना जाता रहा है कि इस सेक्टर में भारी मात्रा में काला धन लगाया जाता रहा है.

शेयर बाजार
शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा है. आठ नवंबर को नोटबंदी के लागू होने वाले दिन सेंसेक्स 27,591 पर बंद हुआ था और एक महीने बाद सात दिसंबर को यह 26,237 पर बंद हुआ. इसका मतलब यह हुआ कि इस दौरान 1,354 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.
कार का कारोबार
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि कार कंपनियों पर नोटबंदी का बहुत असर नहीं दिखाई दिया. नवंबर में कारों की कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक मारुति, फोर्ड और रेनो इंडिया में क्रमश: 12 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. दोपहिया वाहनों की यदि बात की जाए तो यामाहा की बिक्री में 20 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया और होंडा की बिक्री कमोबेश स्थिर रही.
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फिसला सोना
नोटबंदी और सोने के मसले पर स्थिति साफ करने के बाद सोने की स्थिति में गिरावट दर्ज की गई. यह पिछले महीने के सबसे निचले स्तर तक गिर गया. हाल के दिनों में यह 31 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आस-पास तक पहुंच गया था. अब यह 29 हजार से भी नीचे पहुंच गया है. यानी मोटे तौर पर प्रति दस ग्राम सोने में दो हजार रुपये तक गिरावट हुई है.

रिएल एस्टेट पर मार
विशेषज्ञों के मुताबिक इस सेक्टर पर सर्वाधिक बुरा असर पड़ा है और तकरीबन नए फ्लैटों के दामों में अगले छह महीनों से लेकर साल भर के भीतर तक कई बड़े शहरों में 30 प्रतिशत गिरावट के आसार हैं. रीसेल प्रॉपर्टी पर भी नोटबंदी की मार पड़ी है और बाजार में नए ग्राहक नहीं दिख रहे हैं. इस क्षेत्र से संबंधित एक रिसर्च फर्म के मुताबिक इस फैसले के असर से अगले एक साल में आठ लाख करोड़ की पूंजी साफ होने की आशंका है. वैसे माना जाता रहा है कि इस सेक्टर में भारी मात्रा में काला धन लगाया जाता रहा है.

शेयर बाजार
शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा है. आठ नवंबर को नोटबंदी के लागू होने वाले दिन सेंसेक्स 27,591 पर बंद हुआ था और एक महीने बाद सात दिसंबर को यह 26,237 पर बंद हुआ. इसका मतलब यह हुआ कि इस दौरान 1,354 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

कार का कारोबार
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि कार कंपनियों पर नोटबंदी का बहुत असर नहीं दिखाई दिया. नवंबर में कारों की कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक मारुति, फोर्ड और रेनो इंडिया में क्रमश: 12 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. दोपहिया वाहनों की यदि बात की जाए तो यामाहा की बिक्री में 20 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया और होंडा की बिक्री कमोबेश स्थिर रही.
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