दिल्ली हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा पर रोक लगाने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा से लोगों की जान को खतरा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया है कि ई−रिक्शा से अब तक 29 दुर्घटनाएं हुई हैं। इन हादसों में 10 लोगों की मौत और 29 लोग घायल हुए थे। हलफनामे में ट्रैफिक पुलिस ने यह भी कहा है कि बैटरी से चलने वाली ई−रिक्शाओं की वजह से सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या बढ़ गई है। पुलिस के मुताबिक, जून तक विभाग ने ई−रिक्शा के ड्राइवरों के खिलाफ 137 मामले दर्ज किए हैं। इन सभी पर लापरवाही से रिक्शा चलाने का आरोप है।
दरअसल, दिल्ली की चौड़ी और संकरी सड़कों पर भारी तादाद में चलने वाले ई-रिक्शा खतरे की सवारी बन चुके हैं। खतरा एक नहीं अनेक हैं। न हॉर्न और न ही इंजन की आवाज, जिससे सड़क पर चलने वाले लोग सतर्क हो सकें। आगे का पहिया छोटा होने की वजह से पलटने के मौके। पिछला हिस्सा भारी होने की वजह से भी खतरा। पीछे के पहिए पतले होते हैं और ब्रेक आसानी से नहीं लगते। जिस्ट्रेशन नंबर न होने से हादसे के बाद इनको पकड़ना मुश्किल होता है।
उल्लेखनीय है कि पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में ई-रिक्शा की वजह से एक बच्चे की जान चली गई। बच्चे की मां उसे गोद में लेकर एक दुकान से खरीददारी कर रही थी तभी अचानक तेजी से आ रहे एक ई−रिक्शा ने उसे टक्कर मार दी और बच्चा मां की गोद से छिटककर चाशनी की कड़ाही में जा गिरा।
मां ने गर्म चाशनी में हाथ डालकर बच्चे को निकाला। गंभीर रूप से झुलसे बच्चे को तुरंत सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। ई-रिक्शा चलाने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर नाबालिग है।
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