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This Article is From Feb 23, 2015

एमसीडी कमिश्नरों को सिसोदिया का अल्टीमेटम, एक्शन प्लान लाएं, नहीं तो जाएं

मनीष सिसोदिया का फाइल फोटो

नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार ने दिल्ली के तीनों नगर निगम को तीन हफ्ते का अल्टीमेटम देकर कहा है कि घाटे से निकलने का कोई एक्शन प्लान वह दिल्ली सरकार के पास लेकर आए। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने तीनों नगर निगम के कमिश्नरों के साथ बैठक कर साफ़ कह दिया है कि या तो तीन हफ्ते में वे निगम को घाटे से निकालने का एक्शन प्लान लेकर आएं या फिर जाएं।

एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत में डिप्टी सीएम सिसोदिया ने कहा कि निगम घाटे में क्यों चल रहे हैं, इसकी जवाबदेही होनी चाहिए। तीनों नगर निगम के आयुक्तों को कहा गया है कि वह तीन हफ्ते में निगम को घाटे से उबारने का ऐसा प्लान बताएं कि निगम एक साल में कैसे घाटे से निकलेगा। अगर वह प्लान ला सकते हैं तो ठीक है, वर्ना किसी और को उनकी जगह लगाया जाएगा।

दिल्ली सरकार के मुताबिक, तीनों नगर निगम में सबसे खराब हाल पूर्वी दिल्ली नगर निगम का है। हमारे संवाददाता ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम की मेयर मीनाक्षी देवी से खास बातचीत की। मीनाक्षी का कहना है कि निगम अभी कुल सालाना 500 करोड़ रुपये के घाटे में है और उनका सुझाव है कि जैसे पहले एक ही निगम था, वैसे ही दोबारा एक ही नगर निगम बनाया जाए।

मीनाक्षी देवी के मुताबिक, इस नगर निगम में रेवेन्यू के स्रोत कम हैं और खर्चा ज्यादा इसलिए निगम की हालत इतनी खराब है कि कर्मचारियों को सैलरी देना भी मुश्किल हो रहा है और पेंशन तो दो साल से नहीं दी गई है।

मेयर के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मिलने का समय मांगा है, जिसमें वह निगम के हालात पर उनको जानकारी देंगी, लेकिन उनको अभी तक समय नहीं मिल पाया है। आपको बता दें कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में जहां सालाना घाटा करीब 500 करोड़ रुपये है वहीं उत्तरी दिल्ली नगर निगम मे घाटा सालाना करीब सात सौ करोड़ रुपये है जबकि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में अभी न घाटा है न फायदा।

दिल्ली नगर निगम की आर्थिक हालत हमेशा से ही खराब रही है, लेकिन करीब तीन साल पहले एक नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटते वक्त दलील दी गई थी कि इससे पार्दरशिता आएगी और कमाए कोई खाए कोई वाली परंपरा बंद होगी। उदाहरण के लिए दक्षिणी दिल्ली इलाके से रेवेन्यू ज्यादा मिलता है जबकि पूर्वी दिल्ली के इलाकों से कम तो ये दलील दी गई थी कि नगर निगम अब खुद अपना राजस्व और खर्चा देखेगा और अपने को मज़बूत करेगा।

हालांकि फैसला राजनीतिक भी था क्योंकि इससे जो दिल्ली के मेयर का पद और कद दिल्ली के सीएम के समतुल्य-सा था, वह तीन हिस्सों में बंटकर कमजोर हो गया और सीएम की ताकत और बढ़ गई। जैसे केंद्र की सरकार दिल्ली को अनुदान या सहायता के रूप में पैसा देती है ठीक वैसे ही दिल्ली सरकार नगर निगम को अपने बजट में अनुदान या सहायता देती है इसलिए दिल्ली की नई आप सरकार का कहना है कि वह नगर निगम को पटरी पर लाना चाहती है और उसका मानना है कि करप्शन के चलते नगर निगम घाटे में है और अब निगमों के ऊपर है कि वह क्या प्लान लेकर आते है। उसके बाद दिल्ली सरकार आगे की कार्यवाई पर विचार करेगी।

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