
नई दिल्ली:
सीसे और एमएसजी की अतिरिक्त मात्रा के आरोप में विवादों से घिरी मैगी को लेकर अब केंद्र सरकार ने भी जांच शुरू कर दी है। खाद्य आपूर्ति मंत्रालय के तहत आने वाला खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण देश भर से मैगी के नमूने मंगाए हैं और वह अपने लैब में उनकी जांच कर रहा है।
दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने साफ कर दिया कि केन्द्रीय संस्था खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, 'जहां तक मैगी का मामला है, यूपी के फूड डिपार्टमेन्ट ने जांच में MSG पाया है, सीसा भी पाया है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने इस मामले की जांच शुरू की है। वही कार्रवाई करेगा।'
दरअसल खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव जी गुरचरण ने सोमवार को दिल्ली में कहा, 'खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने हर राज्य से सैम्पल्स लिए हैं। टेस्ट चल रहे हैं।'
ख़ास बात ये है कि इस मामले में मैगी का विज्ञापन करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। उपभोक्ता मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव जी गुरचरण से जब ये पूछा गया कि क्या इस मामले में ब्रैंड एम्बैसडर के खिलाफ भी मामला बनता है तो उन्होंने कहा, 'अगर किसी ब्रैंड एम्बैसडर ने विज्ञापन में खाद्य पदार्थ के गुणों का ज़िक्र किया है जो जांच में गलत पाया जाता है तो उनपर भी कार्रवाई का मामला बन सकता है।'
केन्द्रीय संस्था खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण कानून में गलत प्रचार करने वालों के खिलाफ दो तरह की कार्रवाई संभव है: दोषियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है और विज्ञापन को सही तरीके से फिर तैयार करने का आदेश भी जारी हो सकता है। उधर यूपी में पहले ही मैगी पर कार्रवाई चल रही है, और अब उत्तराखंड और महाराष्ट्र में भी अलग से जांच शुरू हो चुकी है।
दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने साफ कर दिया कि केन्द्रीय संस्था खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, 'जहां तक मैगी का मामला है, यूपी के फूड डिपार्टमेन्ट ने जांच में MSG पाया है, सीसा भी पाया है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने इस मामले की जांच शुरू की है। वही कार्रवाई करेगा।'
दरअसल खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव जी गुरचरण ने सोमवार को दिल्ली में कहा, 'खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने हर राज्य से सैम्पल्स लिए हैं। टेस्ट चल रहे हैं।'
ख़ास बात ये है कि इस मामले में मैगी का विज्ञापन करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। उपभोक्ता मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव जी गुरचरण से जब ये पूछा गया कि क्या इस मामले में ब्रैंड एम्बैसडर के खिलाफ भी मामला बनता है तो उन्होंने कहा, 'अगर किसी ब्रैंड एम्बैसडर ने विज्ञापन में खाद्य पदार्थ के गुणों का ज़िक्र किया है जो जांच में गलत पाया जाता है तो उनपर भी कार्रवाई का मामला बन सकता है।'
केन्द्रीय संस्था खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण कानून में गलत प्रचार करने वालों के खिलाफ दो तरह की कार्रवाई संभव है: दोषियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है और विज्ञापन को सही तरीके से फिर तैयार करने का आदेश भी जारी हो सकता है। उधर यूपी में पहले ही मैगी पर कार्रवाई चल रही है, और अब उत्तराखंड और महाराष्ट्र में भी अलग से जांच शुरू हो चुकी है।
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