
बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी अब खुलकर अपनी पार्टी जेडीयू के खिलाफ सामने आ गए हैं। मांझी ने जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव द्वारा 7 फरवरी को पार्टी की बुलाई गई विधायक दल की बैठक को अवैध करार दिया है और उन्होंने खुद 20 फरवरी को विधायकों की बैठक बुलाई है।
मांझी ने कहा कि इस तरह की बैठक बुलाने का अधिकार सिर्फ मुख्यमंत्री को है। वहीं कई विधायकों ने भी मांझी की इस बात का समर्थन किया है।
पिछले कुछ समय से जीतन राम मांझी के इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन मांझी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार किया है। माना जा रहा है कि 7 फरवरी को बुलाई गई विधायकों की बैठक में मांझी को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
इससे पूर्व बिहार में संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने बताया था कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के कहने पर 7 फरवरी को पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। बैठक के एजेंडे के बारे में पूछे जाने पर बिहार विधानसभा में जेडीयू के सचेतक श्रवण ने कहा कि उसमें वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी।
जहानाबाद से पटना लौटने पर मांझी ने विधायक दल की उक्त बुलाई बैठक को लेकर अपने मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों, करीबी विधायकों और समर्थकों के साथ देर शाम बैठक की, जिसके बाद इस बैठक के अनधिकृत होने को लेकर बयान जारी किया। यह ताजा घटनाक्रम जेडीयू में बढ़ते टकराव को साफ जाहिर करता है।
विधायक दल की बैठक बुलाए जाने की खबर फैलने पर शिक्षा मंत्री वृषिण पटेल, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री महाचंद्र सिंह और नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी और विधायक अनिल कुमार, जेडीयू के बागी विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू और रविंद्र राय मांझी, जेडीयू के वरिष्ठ नेता शकुनी चौधरी मांझी के समर्थन में उनके आवास पहुंचे। सासाराम संसदीय सीट से पिछला लोकसभा चुनाव लड़ चुके पूर्व नौकरशाह केपी रमैया भी उस समय मांझी के आवास पर मौजूद थे।
मांझी पर मुख्यमंत्री पद छोड़ने और नीतीश के लिए राह हमवार करने की चर्चाओं के बीच गुरुवार को जेडीयू के शीर्ष नेताओं के बीच दिन भर बैठकों का दौर जारी रहा। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव दिन में नीतीश कुमार के साथ दो बार मिले और उसके बाद मांझी के साथ उनके आवास पर एक घंटे बिताए।
(इनपुट भाषा से भी)
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