
राजेश और नूपुर तलवार...
नई दिल्ली:
आरुषि-हेमराज दोहरे हत्याकांड पर आधारित एक फिल्म और एक पुस्तक आने के बाद लोगों में इस मामले को लेकर चर्चाएं फिर से शुरू होने के बीच, सीबीआई ने इस मामले से संबंधित गाजियाबाद की विशेष अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के सभी अदालती आदेशों को अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है।
राजेश और नूपुर तलवार को पाया गया था दोषी
दंत चिकित्सक दंपति राजेश और नूपुर तलवार को गाजियाबाद विशेष अदालत ने अपनी बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का दोषी पाया था। तत्कालीन विशेष न्यायाधीश श्यामलाल ने करीब एक साल तक बचाव पक्ष तथा अभियोजन पक्षी की दलीलों पर गौर करने के बाद 210 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में डॉक्टर दंपति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सीबीआई ने इस मामले में पुस्तक और फिल्म को लेकर आधिकारिक रूप से चुप्पी साध रखी है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न अदालतों के फैसले और आदेश मौजूद हैं, जिनसे जनता खुद फैसला कर सकती है।
दोषसिद्धि का आदेश भी शामिल
सीबीआई ने इस मामले से जुड़े सभी अदालती आदेशों को अपलोड किया है, जिसमें गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत के संज्ञान आदेश से लेकर सत्र अदालत का अंतिम दोषसिद्धि आदेश भी शामिल है। दोनों आरोपियों द्वारा इसके बाद दायर जमानत याचिका और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को भी जांच एजेंसी ने अपलोड कर दिया है।
ईमानदार और अनुभवी न्यायाधीश माने जाने वाले लाल ने अपने फैसले में कहा था कि 15-16 मई 2008 की रात को नोएडा के जलवायु विहार में तलवार दंपति के आवास में आरुषि और हेमराज की हत्या के दौरान बाहर से किसी के प्रवेश का कोई सबूत नहीं है।
अपने फैसले में न्यायाधीश लाल ने दंपति को दोषी ठहराने के लिए 26 कारण गिनाए और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
राजेश और नूपुर तलवार को पाया गया था दोषी
दंत चिकित्सक दंपति राजेश और नूपुर तलवार को गाजियाबाद विशेष अदालत ने अपनी बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का दोषी पाया था। तत्कालीन विशेष न्यायाधीश श्यामलाल ने करीब एक साल तक बचाव पक्ष तथा अभियोजन पक्षी की दलीलों पर गौर करने के बाद 210 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में डॉक्टर दंपति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सीबीआई ने इस मामले में पुस्तक और फिल्म को लेकर आधिकारिक रूप से चुप्पी साध रखी है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न अदालतों के फैसले और आदेश मौजूद हैं, जिनसे जनता खुद फैसला कर सकती है।
दोषसिद्धि का आदेश भी शामिल
सीबीआई ने इस मामले से जुड़े सभी अदालती आदेशों को अपलोड किया है, जिसमें गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत के संज्ञान आदेश से लेकर सत्र अदालत का अंतिम दोषसिद्धि आदेश भी शामिल है। दोनों आरोपियों द्वारा इसके बाद दायर जमानत याचिका और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को भी जांच एजेंसी ने अपलोड कर दिया है।
ईमानदार और अनुभवी न्यायाधीश माने जाने वाले लाल ने अपने फैसले में कहा था कि 15-16 मई 2008 की रात को नोएडा के जलवायु विहार में तलवार दंपति के आवास में आरुषि और हेमराज की हत्या के दौरान बाहर से किसी के प्रवेश का कोई सबूत नहीं है।
अपने फैसले में न्यायाधीश लाल ने दंपति को दोषी ठहराने के लिए 26 कारण गिनाए और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
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