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This Article is From Jul 15, 2018

अमर्त्य सेन के बयान पर नीति आयोग का पलटवार, मोदी सरकार की आलोचना से पहले कर लें यह काम

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के उस बयान पर नीति आयोग ने पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2014 के बाद भारत काफी पीछे चला गया है.

अमर्त्य सेन के बयान पर नीति आयोग का पलटवार, मोदी सरकार की आलोचना से पहले कर लें यह काम
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन (फाइल फोटो)
  • अमर्त्य सेन के बयान पर नीति आयोग का पलटवार
  • नीति आयोग ने कहा कि उन्हें भारत में कुछ बिताना चाहिए
  • अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार की आलोचना की थी
नई दिल्ली: नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के उस बयान पर नीति आयोग ने पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2014 के बाद भारत काफी पीछे चला गया है. आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को मोदी सरकार के संरचनात्मक सुधारों को देखने के लिये कुछ समय भारत में बिताना चाहिए. सेन के बयान के कुछ दिनों बाद कुमार ने यह बात कही. सेन ने हाल में कहा था कि वर्ष 2014 के बाद से भारत बहुत पीछे चला गया है. कुमार ने कहा, ‘‘ मेरी इच्छा है कि आमर्त्य सेन भारत में कुछ समय बितायें और देखे कि वास्तव में जमीनी स्तर पर स्थिति कैसी है. इस प्रकार का बयान देने से पहले मोदी सरकार द्वारा किये गये पिछले चार साल के कामकाज की कम से कम समीक्षा करे.’’ वह सेन की हाल के टिप्पणी पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे. 

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कुमार ने कहा, ‘‘ मैं वास्तव में उन्हें चुनौती देना चाहूंगा कि वह मुझे कोई ऐसा चार साल बतायें, जिसमें भारत को स्वच्छ, समावेशी और बेहतर अर्थव्यवस्था बनाने के लिये इतने सारे काम किये गये.’’ उन्होंने कहा कि जो संरचनात्मक सुधार हुए हैं, उसमें सुनिश्चित किया गया है कि वृद्धि का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘अगर ये चीजें उन्हें दिखाई नहीं देती हैं तब मुझे लगता है कि उन्हें यहां कुछ समय बिताना चाहिए.’’ 

VIDEO: अमर्त्य सेन की 'मोदी पर टिप्पणी' पर मचा बवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीति आयोग के चेयरमैन हैं. मोदी की अगुवाई वाली सरकार मई 2014 में सत्ता में आयी. उल्लेखनीय है कि अपनी किताब के हिंदी संस्करण ‘भारत और उसके विरोधाभास’ सेन ने कहा था कि देश के पीछे जाने से अब क्षेत्र में सबसे खराब स्थिति वाला दूसरा देश बन गया है.
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