प्रतीकात्मक चित्र
- तीन महीने के लिए मिली वकीलों को राहत
- वकीलों ने की थी छूट देने की मांग
- सिर्फ निचली अदालत के वकीलों पर ही लागू होगा नियम
नई दिल्ली:
मध्यप्रदेश की अदालतों में काम करने वाले करीब एक लाख वकीलों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, इस गर्मी में वह बैगर काला कोट पहने भी अदालत जा सकते हैं. राज्य अधिवक्ता परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार गर्मी के मौसम में काले कोट की वजह से वकीलों को खासी दिक्कत होती थी, लिहाजा इस बार वकीलों को कोट पहनने से राहत दी गई है. अधिकारी ने बताया कि नया नियम 15 अप्रैल के बाद से लागू होगा. काला कोट पहनने की छूट के दायरे में आने वाले पुरुष वकीलों को पैरवी करते समय सफेद शर्ट पहनना होगा. इसके साथ वह काला या सफेद या ग्रे रंग की धारीदार पैंट पहन सकते हैं. इसके साथ ही साथ उन्हें गले में सफेद रंग की खास पट्टी (एडवोकेट बैंड) भी लगानी होगी.
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हालांकि, शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों में पैरवी के वक्त वकीलों को काला कोट पहनने की छूट नहीं दी गई है, यह नियम निचली अदालत के वकीलों पर ही लागू होगा. गौरतलब है कि विभिन्न वकील संगठनों ने राज्य अधिवक्ता परिषद को भेजे ज्ञापनों में गुजारिश की थी कि गर्मी के मौसम में अधिवक्ताओं को काला कोट पहनने से छूट दी जाए.
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इन ज्ञापनों के मुताबिक राज्य के अधिकांश जिला और तहसील अधिवक्ता संघों के कार्यालयों में वकीलों की बड़ी तादाद के मुकाबले उनके बैठने की जगह की खासी कमी है. इस वजह से कई वकीलों को न्यायालय के बरामदों और इसके बाहर के खुली जगहों पर बैठकर अपना कार्य निपटाना पड़ता है. (इनपुट भाषा से)
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हालांकि, शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों में पैरवी के वक्त वकीलों को काला कोट पहनने की छूट नहीं दी गई है, यह नियम निचली अदालत के वकीलों पर ही लागू होगा. गौरतलब है कि विभिन्न वकील संगठनों ने राज्य अधिवक्ता परिषद को भेजे ज्ञापनों में गुजारिश की थी कि गर्मी के मौसम में अधिवक्ताओं को काला कोट पहनने से छूट दी जाए.
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इन ज्ञापनों के मुताबिक राज्य के अधिकांश जिला और तहसील अधिवक्ता संघों के कार्यालयों में वकीलों की बड़ी तादाद के मुकाबले उनके बैठने की जगह की खासी कमी है. इस वजह से कई वकीलों को न्यायालय के बरामदों और इसके बाहर के खुली जगहों पर बैठकर अपना कार्य निपटाना पड़ता है. (इनपुट भाषा से)
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