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This Article is From Jun 19, 2018

2019 लोकसभा चुनाव : पिछड़ी जातियों को लुभाने के लिए भाजपा ने बनाई ये रणनीति 

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले तमाम राजनीतिक पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं.

2019 लोकसभा चुनाव : पिछड़ी जातियों को लुभाने के लिए भाजपा ने बनाई ये रणनीति 
भाजपा की कोशिश है कि 2019 के चुनावों में खासकर एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय से आने वाले मतदाता उससे छिटकने न पाएं.
नई दिल्ली: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले तमाम राजनीतिक पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं. चुनाव से पहले विपक्षी एकता की सुगबुगाहट ने केंद्र में सत्तासीन भाजपा की चिंता बढ़ा दी है. खासकर पिछले दिनों हुए उप चुनावों में हार के बाद पार्टी की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. भाजपा की कोशिश है कि 2019 के चुनावों में खासकर एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय से आने वाले मतदाता उससे छिटकने न पाएं. इसके लिए पार्टी ने तैयारी शुरू कर दी और नई रणनीति के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी में है. भाजपा देशभर में पिछड़ी जातियों और ओबीसी मोर्चे के अपने नेताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन करेगी.

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इस दौरान पार्टी का जोर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार पर होगा, जहां से 2014 के चुनावों में पार्टी की झोली में अच्छी-खासी सीटें आई थीं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि भाजपा में शामिल हुए नेताओं को भी इन कार्यशालाओं में आमंत्रित किया जाएगा. इन कार्यशालाओं के दौरान पार्टी के आधार को बरकरार रखने और पिछड़ी जाति के अन्य मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. साथ ही उन्हें यह भी बताया जाएगा कि पिछड़ी जातियों में सरकार की तमाम योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें और उन्हें जागरूक करें. उन्होंने बताया कि हर राज्य में इस तरह की कम से कम एक बैठक होगी. जबकि उत्तर प्रदेश में छह और बिहार में तीन कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय कार्यशाला में पार्टी प्रमुख अमित शाह के भी शिरकत करने की संभावना है. (इनपुट-भाषा) 

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