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TB में राहत मिलते ही दवा बंद करना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने बताया बड़ा खतरा

टीबी के कई मरीज कुछ हफ्तों में बेहतर महसूस करने लगते हैं और यहीं से शुरू होती है नई परेशानी. डॉक्टर्स का कहना है कि अक्सर मरीज लक्षण कम होते ही दवा छोड़ देते हैं, ऐसा करना उनके लिए घातक हो सकता है. यहां जानते हैं इस बारे में-

TB में राहत मिलते ही दवा बंद करना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने बताया बड़ा खतरा
Drug Resistant Tuberculosis : टीबी की दवा बीच में छोड़ने के नुकसान क्या हैं?

भारत में टीबी के खिलाफ लड़ाई पिछले कुछ सालों में मजबूत हुई है. जांच के नए तरीकों की वजह से अब मरीजों में बीमारी का पता पहले से जल्दी चल रहा है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि टीबी से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती अब भी वही है, जो वर्षों पहले थी, मरीजों का इलाज बीच में छोड़ देना. सीके बिड़ला हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. कुलदीप कुमार ग्रोवर का कहना है कि टीबी के मरीज अक्सर इलाज शुरू होने के कुछ सप्ताह बाद राहत महसूस करने लगते हैं. खांसी कम हो जाती है, बुखार उतर जाता है और शरीर में ताकत भी लौटने लगती है. इसी सुधार को कई लोग पूरी तरह ठीक होने का संकेत समझ लेते हैं. लेकिन हकीकत ये है कि उस समय तक शरीर में टीबी फैलाने वाले बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं हुए होते. ऐसे में बीच में दवा छोड़ना शरीर के लिए घातक हो सकता है. यहां जानते हैं इस बारे में-

क्यों खतरनाक हो सकता है बीच में इलाज छोड़ना?

डॉक्टर इस बाते में बताते हैं कि टीबी का इलाज लंबा चलता है और मरीज को डॉक्टर द्वारा तय किए गए पूरे कोर्स का पालन करना पड़ता है. अगर दवाएं बीच में बंद कर दी जाएं तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया फिर से सक्रिय हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में बीमारी दोबारा लौट सकती है और मरीज के साथ-साथ उसके आसपास के लोगों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है. डॉ. ग्रोवर के मुताबिक, दिक्कत सिर्फ बीमारी के लौटने की नहीं है. कई मामलों में बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी भी बन सकते हैं, जिससे इलाज और ज्यादा कठिन हो जाता है.

ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी क्यों बढ़ा रही चिंता?

ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी वह स्थिति है, जब बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया सामान्य एंटी-टीबी दवाओं पर असर दिखाना बंद कर देते हैं. ऐसे मरीजों का इलाज लंबा चल सकता है और कई बार दवाओं के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं.

हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी का कारण अधूरा इलाज नहीं होता. कुछ लोग शुरुआत से ही ऐसे बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकते हैं जिन पर सामान्य दवाएं असर नहीं करतीं. इसलिए बीमारी की पहचान के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि कौन सी दवा मरीज के लिए सबसे प्रभावी होगी.

टीबी के लक्षण कब नजर आते हैं?

टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी हो सकती है. लगातार खांसी, बुखार, रात में अधिक पसीना आना, वजन घटना, भूख कम लगना और लगातार थकान इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए. जितनी जल्दी बीमारी पकड़ी जाएगी, इलाज उतना ही जल्दी शुरू हो सकेगा.

इलाज पूरा करने में क्यों आती हैं मुश्किलें?

कई मरीजों के लिए टीबी सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं होती. इलाज के दौरान कामकाज प्रभावित हो सकता है, बार-बार अस्पताल जाना पड़ सकता है और दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ सकता है. आर्थिक दबाव, पोषण की कमी और सामाजिक कलंक जैसी वजहें भी कई मरीजों को बीच रास्ते में इलाज छोड़ने के लिए मजबूर कर देती हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज को परिवार का सहयोग, सही जानकारी और नियमित मेडिकल फॉलो-अप मिलना जरूरी है ताकि वह पूरे इलाज के दौरान दवा लेना जारी रख सके.

टीबी छिपाने नहीं, इलाज कराने की बीमारी है

आज भी कई लोग टीबी को लेकर असहज महसूस करते हैं और बीमारी छिपाने की कोशिश करते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि यह सोच बदलने की जरूरत है. टीबी का इलाज संभव है और सही समय पर इलाज शुरू करके तथा पूरा कोर्स खत्म करके मरीज सामान्य जीवन में लौट सकता है.

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