टॉयलेट में कदम रखते ही अगर यूरिन से ऐसी तीखी या सड़ी बदबू आए कि नाक पर रुमाल रखना पड़ जाए, तो ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि आज धूप में ज्यादा घूम लिए या पानी कम पिया है. प्याज-लहसुन ज्यादा खा लेने या कम पानी पीने से पेशाब में अमोनिया की महक आना आम बात है. पर अगर आप दिनभर बोतल भरकर पानी गटक रहे हैं और फिर भी यह बदबू जाने का नाम नहीं ले रही, तो बात इतनी सीधी नहीं है. शरीर के अंदर कौन सा अंग सही चल रहा है और कौन सा जवाब दे रहा है, पेशाब का रंग और गंध इसका सीधा हिसाब दे देते हैं. लगातार आती बदबू को अनदेखा करना कई बार पुरानी और गंभीर बीमारियों को न्योता दे बैठता है.
किन बीमारियों में बिगड़ने लगती है पेशाब की गंध?
भीतरी अंगों में कोई खराबी आए या बैक्टीरिया घर बना लें, तो पेशाब की महक अपने आप बदलने लगती है.
यूरिन इन्फेक्शन यानी यूटीआई: पेशाब से गंदी सड़ांध आने का सबसे बड़ा मुजरिम यूटीआई ही होता है. जब मूत्राशय या नली में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, तो पेशाब से बहुत खराब गंध उठती है. इसके साथ ही पेशाब की धार छूटते ही तेज जलन होती है, पेडू में मीठा-मीठा दर्द रहता है और हर दस मिनट में भागना पड़ता है.
शुगर का अनकंट्रोल होना: अगर पेशाब से अजीब सी मीठी या सड़े हुए सेब जैसी गंध आ रही हो, तो तुरंत ब्लड शुगर जांच कराने की जरूरत है. जब खून में ग्लूकोज बहुत बढ़ जाता है, तो शरीर उसे पेशाब के रास्ते बाहर फेंकने लगता है. इसे नजरअंदाज करने पर शरीर कीटोन बॉडीज बनाने लगता है, जो बहुत खतरनाक मोड़ है.
गुर्दे या लिवर की खराबी: किडनी का काम खून से कचरा छानना है. जब गुर्दे सही से काम नहीं करते, तो टॉक्सिंस बाहर नहीं निकल पाते और पेशाब में अमोनिया की बहुत तेज तीखी बदबू भर जाती है. वहीं अगर लिवर में कोई गंभीर बीमारी या पीलिया गहरा जाए, तो पेशाब का रंग गहरा सरसों जैसा हो जाता है और बासी गंध आने लगती है.
गुर्दे में पथरी: जब किडनी स्टोन नली में आकर फंस जाता है, तो पेशाब रुक-रुक कर पास होता है. अंदर रुका हुआ यूरिन सड़ने लगता है और उसमें बैक्टीरिया पनप जाते हैं, जिससे पेशाब में भारी दुर्गंध आने लगती है.
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नाड़ी विशेषज्ञ की सलाह
दिल्ली सरकार के योग विभाग के रिटायर्ड प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. राम अवतार, जो पिछले 38 सालों से योग, नाड़ी विज्ञान और प्राकृतिक चिकित्सा से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, इस पर बहुत देसी और जमीनी बात बताते हैं.
डॉ. राम अवतार का कहना है, "नाड़ी विज्ञान में यूरिन की गंध और रंग देखकर सीधे पता चल जाता है कि शरीर में पित्त कितना बिगड़ा हुआ है. जब पेट और मूत्राशय में जरूरत से ज्यादा गर्मी और टॉक्सिंस भर जाते हैं, तभी पेशाब में से बदबू उठती है. लोग अक्सर मेडिकल स्टोर से कोई भी एंटीबायोटिक खरीदकर खा लेते हैं, जिससे एक बार तो लक्षण दब जाते हैं पर बीमारी जड़ से नहीं कटती. सबसे पहले पेट की गर्मी शांत कीजिए. रोज सुबह खाली पेट शीतल प्राणायाम और भ्रामरी का अभ्यास करें. इसके साथ ही साबुत धनिए के बीज को रातभर पानी में भिगोकर सुबह छानकर पिएं. यह नुस्खा मूत्र मार्ग की पुरानी से पुरानी जलन और बदबू को बाहर निकाल फेंकता है."
कब तुरंत अस्पताल का रुख करना चाहिए?
- अगर बदबू के साथ ये खतरे के संकेत दिख रहे हों, तो घर पर घरेलू नुस्खों के भरोसे बिल्कुल न बैठें.
- पेशाब करते वक्त सुई चुभने जैसा असहनीय दर्द या भयंकर जलन होना.
- पेशाब का रंग लाल, मटमैला या खून के थक्के जैसा दिखना.
- कमर के पिछले हिस्से में दोनों तरफ तेज दर्द की टीस उठना.
- ठंड लगकर कंपकंपी छूटना और साथ में तेज बुखार चढ़ जाना.
रोज के नियम जो इस आफत से बचाएंगे
दिनभर में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी जरूर पिएं ताकि पेशाब का रंग पानी की तरह साफ रहे. काम के चक्कर में पेशाब को घंटों रोककर रखने की आदत छोड़ दीजिए, क्योंकि ठहरा हुआ यूरिन बैक्टीरिया के पनपने की सबसे मुफीद जगह है. इसके अलावा बहुत ज्यादा लाल मिर्च, बासी खाना, पैकेटबंद मसालेदार स्नैक्स और शराब से दूरी बना लें, क्योंकि ये सीधे तौर पर मूत्राशय की दीवार पर सूजन पैदा करते हैं.
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