घर में किसी को डायबिटीज हो तो ग्लूकोमीटर अक्सर परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है. दोपहर में थोड़ा सा चावल क्या खा लिया या रात में मन मारकर एक गुलाब जामुन चख लिया, फौरन हाथ मीटर की डिब्बी पर चला जाता है. उंगली चुभोई, खून की बूंद स्ट्रिप पर लगाई और स्क्रीन पर नंबर चमकते ही धड़कनें तेज हो जाती हैं. ज्यादातर घरों में रोज का यही हाल है. आधी परेशानी तो बीमारी से नहीं, इस बात से होती है कि हमें पता ही नहीं होता कि असल में कौन सा नंबर सेफ है और किस पर सच में डॉक्टर के पास दौड़ना है.
खाना खाने के बाद शुगर कितनी होनी चाहिए?
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के 2026 मानकों के अनुसार, मधुमेह से पीड़ित ज्यादातर गैर-गर्भवती वयस्कों में खाना शुरू करने के 1 से 2 घंटे बाद रक्त शर्करा का उच्चतम स्तर 180 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम रखने का लक्ष्य होता है. हालांकि हर व्यक्ति के लिए यह लक्ष्य एक जैसा नहीं होता. उम्र, दूसरी बीमारियों और इलाज जैसी स्थितियों के आधार पर डॉक्टर अलग लक्ष्य तय कर सकते हैं.
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मीटर पर दिखने वाली शुगर की रीडिंग का मतलब समझिए
खाना खाने के बाद रक्त में शुगर का स्तर बढ़ना सामान्य प्रक्रिया है. भोजन से मिलने वाला ग्लूकोज रक्त में पहुंचता है और शरीर उसे ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करता है. लेकिन सवाल यह है कि खाने के बाद शुगर कितनी होनी चाहिए और बढ़ी हुई रीडिंग को कब गंभीरता से लेना चाहिए?
अगर डायबिटीज नहीं है तो कितनी होनी चाहिए शुगर?
अगर आपको डायबिटीज नहीं है और घर पर शुगर जांच रहे हैं, तो केवल एक रीडिंग देखकर खुद से यह तय न करें कि शुगर सामान्य है या आपको कोई बीमारी है. घर पर की गई जांच में बार-बार ज्यादा रीडिंग आ रही है तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है.
140 से ऊपर रीडिंग आए तो क्या प्रीडायबिटीज है?
खाना खाने के बाद घर के ग्लूकोमीटर पर एक बार 140 से ज्यादा रीडिंग आ जाने का मतलब यह नहीं है कि आपको प्रीडायबिटीज है. इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के हिसाब से एचबीए1सी, खाली पेट रक्त शर्करा की जांच या दूसरी मानक जांच कराने की सलाह दे सकते हैं. इसलिए किसी एक रीडिंग से घबराने या खुद बीमारी मान लेने के बजाय लगातार ज्यादा रीडिंग आने पर डॉक्टर से बात करें.
ध्यान दें : समय खाना खत्म करने के बाद नहीं, बल्कि खाना शुरू करने के समय से गिनना चाहिए. अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के 2026 मानक भोजन के बाद शुगर की जांच खाना शुरू करने के 1 से 2 घंटे बाद करने की बात कहते हैं.
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एक्सपर्ट से जानिए, कहां होती है सबसे बड़ी चूक
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, फरीदाबाद के सीनियर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. संदीप खर्ब से जब हमने बात की, तो उन्होंने मरीजों की एक बड़ी नासमझी पकड़ी.
डॉ. संदीप खर्ब बताते हैं,
खाने के बाद ब्लड शुगर मैनेज करने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
दवा के साथ खानपान और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना ब्लड शुगर मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है.
खाने का तरीका : अपनी प्लेट को देखें और समझें कि आप क्या खा रहे हैं. उसी हिसाब से जरूरी बदलाव करें. रोटी या चावल से ही पेट भर लेने की बजाए सलाद, दही, दूध को भी जगह दें. ककड़ी या हरी सब्जी चबा चबाकर खाएं. फाइबर को अपनी थाली में भरपूर जगह दें. यह शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है.
खाते ही सोना सही नहीं: खाने के बाद लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय, अगर आपकी सेहत और डॉक्टर की सलाह इसकी अनुमति देती है, तो हल्की शारीरिक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है.
पैकेट वाले नाश्ते से बचें : बिस्कुट, भुजिया को स्नेक्स के तौर पर लिया जाता है. लेकिन ये हल्के स्नेक्स ही सेहत के लिए भारी पड़ सकते हैं. ये आपके ब्लड शुगर को तेजी से उझाल सकते हैं. अगर आप स्नेकिंंग करना चाहते हैं तो कुछ हेल्दी ले सकते हैं आप भुने हुए चने खा सकते हैं या मुंगफली का स्वाद भी चख सकते हैं.
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