बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा को हाल ही में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने की खबर सामने आई. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयर एम्बुलेंस के जरिए मुंबई लाया गया. इस खबर के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे हैं कि आखिर स्पाइन फ्रैक्चर कितना गंभीर होता है? क्या हर स्पाइनल फ्रैक्चर में सर्जरी करनी पड़ती है? और क्या इससे पैरालिसिस का खतरा हो सकता है?
दिल्ली स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. प्रशांत कुमार चौधरी का कहना है कि रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होना हमेशा एक जैसी स्थिति नहीं होती. इसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि चोट कितनी गहरी है और उसका असर रीढ़ की नसों और स्पाइनल कॉर्ड पर पड़ा है या नहीं.
क्या हर स्पाइन फ्रैक्चर में सर्जरी जरूरी होती है?
डॉ. चौधरी बताते हैं कि रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने का मतलब यह नहीं है कि मरीज को सर्जरी करानी ही पड़ेगी. कई मामलों में अगर फ्रैक्चर स्थिर हो और नसों या स्पाइनल कॉर्ड पर कोई असर न पड़ा हो, तो दवाओं, आराम, ब्रेस और नियमित निगरानी से भी इलाज संभव है. हालांकि, अगर फ्रैक्चर के कारण रीढ़ की हड्डी अस्थिर हो जाए, हड्डी अपनी जगह से खिसक जाए या स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर दबाव बनने लगे, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है.
कब खतरनाक बन जाता है स्पाइन फैक्चर?
डॉक्टर कहते हैं कि स्पाइन फ्रैक्चर की गंभीरता सिर्फ हड्डी टूटने से तय नहीं होती. असली चिंता तब बढ़ती है जब चोट के कारण स्पाइनल कॉर्ड या नसें प्रभावित होने लगें. यदि मरीज को हाथ-पैरों में कमजोरी, सुन्नपन, चलने में दिक्कत, संवेदना कम होना या पेशाब और मल पर नियंत्रण में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है. डॉक्टर कहते हैं कि ऐसे मामलों में तुरंत किसी एक्सपर्ट की सलाह लेने की जरूरत होती है और समय पर इलाज शुरू करना होता है.
नुसरत भरूचा को एयर एम्बुलेंस से क्यों लाया गया?
रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने पर मरीज को सामान्य तरीके से यात्रा कराने से जोखिम बढ़ सकता है. अधिक हिलने-डुलने से अस्थिर फ्रैक्चर और बिगड़ सकता है.
यही वजह है कि कई बार डॉक्टर एयर एम्बुलेंस की सलाह देते हैं. इसमें मरीज की रीढ़ को पूरी तरह स्थिर रखा जा सकता है, लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग होती रहती है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज उपलब्ध रहता है.
रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद क्या चल-पाने का मतलब स्थिति गंभीर नहीं है?
डॉक्टर इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि लोगों ये एक बहुत बड़ी गलतफहमी है. अगर कोई व्यक्ति स्पाइन फ्रैक्चर के बावजूद चल रहा है, तो इसका मतलब ये नहीं कि चोट मामूली है. कई बार फ्रैक्चर रीढ़ की संरचना को कमजोर कर देता है. वहीं, शुरुआती दौर में कोई न्यूरोलॉजिकल लक्षण नहीं दिखते. इसीलिए किसी भी रीढ़ की चोट के बाद एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच कराना जरूरी होता है.
क्या स्पाइन फैक्चर होने पर पैरालिसिस का खतरा रहता है?
इस सवाल पर डॉक्टर कहते हैं कि हर स्पाइनल फ्रैक्चर पैरालिसिस का कारण नहीं बनता. इसका रिस्क इस बात पर निर्भर करता है कि स्पाइनल कॉर्ड या नसों को कितना नुकसान पहुंचा है. कई मरीज पूरी तरह ठीक होकर सामान्य जीवन में लौट आते हैं. फिर भी डॉक्टर कहते हैं कि स्पाइन इंजरी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में शुरुआती स्थिति बाद में खराब भी हो सकती है.
स्पाइन फ्रैक्चर के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है?
रिकवरी की ड्यूरेशन हर मरीज में अलग-अलग हो सकती है. ये चोट की गंभीरता, फ्रैक्चर की जगह, सर्जरी की जरूरत और नसों की स्थिति पर निर्भर करती है. सर्जरी के बाद मरीज को फिजियोथेरेपी, दर्द कंट्रोल और धीरे-धीरे शरीर को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज की जरूरत पड़ सकती है. मरीज को डॉक्टर की परमिशन मिलने तक भारी वजन उठाने, लंबी यात्रा करने या कठिन शारीरिक गतिविधियां करने से बचना चाहिए.
स्पाइन फ्रैक्चर को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां क्या हैं?
- हर स्पाइनल फ्रैक्चर में सर्जरी जरूरी नहीं होती.
- स्पाइन फ्रैक्चर का मतलब हमेशा पैरालिसिस नहीं होता.
- चल पाने का मतलब यह नहीं कि चोट गंभीर नहीं है.
- शुरुआती दर्द कम होने पर भी मेडिकल जांच जरूरी होती है.
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