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This Article is From Apr 04, 2025

'मॉलिक्यूलर स्टूल टेस्ट' से एचआईवी पीड़ित टीबी रोगियों का डायग्नोसिस संभव : अध्ययन

ट्रेडिशनल स्पुटम टेस्ट से आगे बढ़ते हुए, शुक्रवार को हुए एक नए अध्ययन से पता चला है कि मॉलिक्यूलर स्टूल टेस्ट यानि आणविक मल परीक्षण से एचआईवी से पीड़ित लोगों में तपेदिक (टीबी) का पता लगाने की संभावना बढ़ सकती है.

'मॉलिक्यूलर स्टूल टेस्ट' से एचआईवी पीड़ित टीबी रोगियों का डायग्नोसिस संभव : अध्ययन
मॉलिक्यूलर स्टूल टेस्ट से हो सकेगी टीबी रोगियों की डायग्नोसिस.

ट्रेडिशनल स्पुटम टेस्ट से आगे बढ़ते हुए, शुक्रवार को हुए एक नए अध्ययन से पता चला है कि मॉलिक्यूलर स्टूल टेस्ट यानि आणविक मल परीक्षण से एचआईवी से पीड़ित लोगों में तपेदिक (टीबी) का पता लगाने की संभावना बढ़ सकती है. द लैंसेट माइक्रोब नामक पत्रिका में प्रकाशित शोध से पता चला है कि वर्तमान में श्वसन नमूनों पर इस्तेमाल किए जाने वाले आणविक परीक्षण (जिसे एक्सपर्ट एमटीबी/आरआईएफ अल्ट्रा कहा जाता है) का उपयोग मल के नमूनों पर किया जा सकता है (जिसे अब तक केवल बच्चों के लिए अनुशंसित किया जाता था) एचआईवी से पीड़ित वयस्कों में टीबी के निदान के लिए एक अतिरिक्त परीक्षण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (आईएसग्लोबल), स्पेन के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने कहा कि नया अध्ययन आबादी में बीमारी के निदान में एक आदर्श बदलाव का प्रतिनिधित्व कर सकता है. आईएसग्लोबल और बार्सिलोना विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट के छात्र और अध्ययन के पहले लेखक जॉर्ज विलियम कासुले बताते हैं, "एचआईवी से पीड़ित लोगों में पल्मोनरी टीबी विकसित होने का जोखिम अधिक होता है, लेकिन पारंपरिक परीक्षणों की कम संवेदनशीलता के कारण इन मामलों में डायग्नोसिस विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है."

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माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होने वाली टीबी 2023 में 1.25 मिलियन मौतों के लिए जिम्मेदार थी. इनमें से 13 प्रतिशत एचआईवी से पीड़ित लोगों में थीं. वर्तमान में, टीबी के लिए मुख्य निदान रणनीति स्पुटम (थूक या लार) के नमूनों पर केंद्रित है - जो लगातार हो रही खांसी और फेफड़ों में बन रहे बलगम द्वारा प्राप्त किए जाते हैं. एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए, मूत्र एंटीजन डिटेक्शन (टीबी-एलएएम) के अलावा मॉलिक्यूलर स्टूल टेस्ट की सिफारिश की जाती है.

हालांकि, ये निदान एचआईवी से पीड़ित सभी लोगों के लिए प्रभावी नहीं हैं, क्योंकि उनमें स्पुटम कम बनता है , और बीमारी के उन्नत चरणों में आधे से अधिक लोग ऐसा करने में असमर्थ होते हैं. इसके अलावा, थूक में बैक्टीरिया का जमाव इतना कम होता है कि इसका पता नहीं चल पाता है. इससे निपटने के लिए, नए शोध ने मल के नमूनों पर ध्यान केंद्रित किया. टीम ने दिसंबर 2021 और अगस्त 2024 के बीच तीन अफ्रीकी देशों - इस्वातिनी, मोजाम्बिक और युगांडा के चिकित्सा केंद्रों में एचआईवी और संदिग्ध टीबी से पीड़ित 15 वर्ष से अधिक उम्र के 677 रोगियों को भर्ती किया.

प्रतिभागियों ने थूक, मूत्र, मल और रक्त के नमूने उपलब्ध कराए. परिणामों से पता चला कि मल परीक्षण में संदर्भ मानक की तुलना में 23.7 प्रतिशत संवेदनशीलता और 94.0 प्रतिशत विशिष्टता थी. आईएसग्लोबल के शोधकर्ता और हॉस्पिटल क्लिनिक डी बार्सिलोना में संक्रमण इकाई के लिए वैक्सीन और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के प्रमुख अल्बर्टो एल. गार्सिया-बस्टेरो ने कहा हमारे अध्ययन के परिणाम एचआईवी से पीड़ित लोगों में टीबी डायग्नोस करने में मददगार होगा. विशेष रूप से उनमें जो एड्स पीड़ित हैं.

स्टूल अल्ट्रा परीक्षण ने अतिरिक्त मामलों की पहचान की, जो टीबी-एलएएम, थूक में अल्ट्रा या बैक्टिरियल कल्चर द्वारा पता नहीं लगाए गए थे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कई मामलों में बीमारी की पुष्टि कर सकता है जहां श्वसन परीक्षण के नतीजे नकारात्मक रहे हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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