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FAQ: सुबह उठते ही पीला बलगम क्यों आता है? जानिए इसके कारण, टीबी से संबंध और बचाव

खांसी के साथ पीला बलगम आना हमेशा सामान्य नहीं होता. यह श्वसन तंत्र में संक्रमण, सूजन या दूसरी फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है. एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मानव मनचंदा से जानिए पीले कफ के कारण, टीबी से इसका संबंध और कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

Medically Reviewed By: Dr Manav Manchanda
FAQ: सुबह उठते ही पीला बलगम क्यों आता है? जानिए इसके कारण, टीबी से संबंध और बचाव
पीला बलगम क्यों आता है?
Yellow Phlegm Photo: @springer.com

Pila Balgam Kyu Aata Hai: पीला बलगम क्यों आता है? खांसी के साथ पीला कफ आना कई बार संक्रमण, साइनस, ब्रोंकाइटिस या निमोनिया का संकेत हो सकता है. कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या पीला बलगम टीबी का लक्षण है. एक्सपर्ट से जानिए इसके कारण, लक्षण और इलाज कब जरूरी है.

मौसम बदलने के साथ कई लोगों को खांसी और कफ की परेशानी बढ़ जाती है. अगर बलगम का रंग पीला या मटमैला नजर आ रहा है, तो इसके पीछे संक्रमण या श्वसन तंत्र से जुड़ी दूसरी वजहें हो सकती हैं. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि रात को पंखा तेज चल गया होगा या पुरानी ठंड बैठ गई होगी. सच तो यह है कि बलगम का यह गहरा रंग बताता है कि अंदर फेफड़े किसी इन्फेक्शन से जूझ रहे हैं.

पीला बलगम क्यों आता है?

जब भी धूल, धुआं या कोई कीटाणु सांस के जरिए फेफड़ों में उतरता है, तो शरीर अपनी प्र‍तिरक्षा प्रणाली से अपना बचाव करता है. 

एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, फरीदाबाद में रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन के डायरेक्टर और हेड डॉ. मानव मनचंदा का कहना है, फेफड़ों में जब कोई बाहरी कीटाणु घुसता है, तो खून की सफेद कोशिकाएं यानी न्यूट्रोफिल्स उनसे लड़ती हैं. इन सेल्स के पास एक खास किस्म का एंजाइम होता है. बैक्टीरिया को खत्म करते-करते जब ये कोशिकाएं खुद टूटकर बिखरती हैं, तो इनका वही एंजाइम कफ के साथ मिल जाता है. इसी वजह से बलगम का रंग सफेद से बदलकर पीला या मटमैला होने लगता है. इसका संकेत यही है कि सांस की नली में कोई इन्फेक्शन फैल रहा है.

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पीला बलगम किन बीमारियों का संकेत हो सकता है?

  1. वायरल इंफेक्शन
  2. बैक्टीरियल इंफेक्शन
  3. साइनसाइटिस
  4. ब्रोंकाइटिस
  5. निमोनिया
  6. टीबी

सुबह पीला बलगम आने का कारण क्या है?

छाती में भारीपन और पीले कफ के पीछे ये आम दिक्कतें हो सकती हैं.

सांस की नली में सूजन: तेज जुकाम के बाद जब ब्रोंकियल ट्यूब्स छिल जाती हैं, तो सूखा कफ जमकर गाढ़ा हो जाता है.
नाक और साइनस का गंदा पानी: साइनस में जमा मवाद रात भर सोते समय हलक के पीछे टपकता रहता है, जो सुबह उठने पर भारी पीले थूक के रूप में बाहर आता है.
निमोनिया की मार: जब फेफड़ों के बारीक कोष्ठकों में मवाद और पानी भर जाता है, तो पीला और बदबूदार कफ तेजी से बनता है.

डॉ. मानव मनचंदा का कहना है, कई लोग पीला कफ देखते ही मेडिकल स्टोर भागते हैं और बिना सोचे-समझे कोई भी एंटीबायोटिक खाने लगते हैं. यह बहुत गलत तरीका है. आम वायरल फ्लू के खात्मे पर भी कफ पीला होकर ही छंटता है. हर पीले कफ में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती, इसलिए जांच के बिना गोलियां न निगलें.

क्या पीला कफ टीबी का लक्षण है?

पीले बलगम का नाम आते ही हर किसी का ध्‍ध्यान टीबी की तरफ जाता है. तो क्‍या वाकई पीला कफ टीबी का लक्षण है. टीबी का कफ आम सर्दी-जुकाम से काफी अलग चाल चलता है.

शुरुआत में टीबी का मरीज जब खांसता है, तो गाढ़ा पीला या कभी-कभी हरापन लिए कफ आता है. बीमारी जब फेफड़ों के अंदरूनी हिस्सों को काटने लगती है, तो बलगम के बीच खून के पतले रेशे या जंग जैसा कत्थई रंग साफ दिखने लगता है.

पीला बलगम कितने दिन तक सामान्य है और पीला बलगम आने पर डॉक्टर को कब दिखाएं?

डॉ. मानव मनचंदा का कहना है, अगर पीला बलगम लगातार दो हफ्ते से नहीं थम रहा, शाम को बदन टूटने के साथ हल्का बुखार रहता है, रात में बिना गर्मी भी कपड़े पसीने से भीग जाते हैं और भूख कम लगने से वजन गिर रहा है, तो एक दिन भी घर पर न बैठें. यह टीबी की सीधी निशानी हो सकती है. ऐसे में तुरंत बलगम की जांच और चेस्ट का एक्स-रे करवाएं.

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 पीला बलगम आने पर क्या करना सही है?

अगर छाती में पीला कफ फंसा है और सांस खींचने में घरघराहट हो रही है, तो इन बातों पर ध्यान दें.

  • दिन भर गुनगुना पानी पिएं. सादा गर्म पानी, पतला सूप या अदरक-तुलसी का काढ़ा पीने से फेफड़ों में चिपका बलगम ढीला होकर आसानी से बाहर आ जाता है.
  • उबलते पानी की भाप लें. दिन में दो बार सादी भाप लेने से सांस की नली की ड्राइनेस कम होती है और सीना हल्का लगता है.
  • कफ को जबरदस्ती अंदर न निगलें. गले में जो भी गंदा कफ आए, उसे हमेशा थूककर बाहर निकालें ताकि फेफड़े साफ रहें.

डॉ. मानव मनचंदा का कहना है, अगर पीले बलगम के साथ सांस लेने में छाती में सुई जैसी चुभन हो, सांस उखड़ने लगे या थूक में ताजा लाल खून दिखाई दे, तो देसी नुस्खों के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें. यह फेफड़ों की गंभीर इमरजेंसी हो सकती है और तुरंत किसी पल्मोनोलॉजिस्ट से मिलकर इलाज शुरू करना चाहिए.

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