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बार-बार बातें भूलना नहीं है बुढ़ापे की निशानी, डिमेंशिया के हो सकते हैं ये शुरुआती संकेत

बढ़ती उम्र के साथ बातों को बार-बार भूलना नॉर्मल है, लेकिन हर बार इसे बूढ़ापे की निशानी न समझें. ये डिमेंशिया के भी हो सकते हैं. यहां जानते हैं डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

बार-बार बातें भूलना नहीं है बुढ़ापे की निशानी, डिमेंशिया के हो सकते हैं ये शुरुआती संकेत
Dementia Symptoms : डिमेंशिया के लक्षण क्या हैं?

बढ़ती उम्र के साथ छोटी-छोटी चीजें भूल जाना काफी कॉमन है, लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है और रोजमर्रा के कामकाज पर असर डाल रही है, तो ये डिमेंशिया का संकेत हो सकता है. कई हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि डिमेंशिया को सिर्फ उम्र का असर समझकर हमें इग्नोर करने से बचना चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं, तो ये खतरनाक हो सकता है. अगर आप समय रहते पहचान करके इलाज शुरू कराते हैं, तो इसकी गंभीरता से बचा जा सकता है. यहां जानते हैं डिमेंशिया के लक्षण क्या हैं और कैसे करें इसकी पहचान?

कौन-से लक्षण देते हैं डिमेंशिया का संकेत?

सिटाराम भार्टिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च के जेरियाट्रिक मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. हरजीत सिंह भट्टी का कहना है कि अगर कोई बुजुर्ग बार-बार एक ही सवाल पूछ रहा है, महत्वपूर्ण बातचीत भूल जाता है, परिचित रास्तों में भटकने लगता है या रोजमर्रा के घरेलू काम करने में कठिनाई महसूस करता है, तो ये चेतावनी हो सकती है. इसके अलावा दवाइयों का सही तरीके से मैनेजमेंट न कर पाना, पैसों के लेन-देन में बार-बार गलती करना, बोलने या समझने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, संदेह करना या उदासीनता भी डिमेंशिया के शुरुआती संकेत हो सकते हैं.

सामान्य भूलने की बीमारी और डिमेंशिया में क्या अंतर है?

डॉ. हरजीत का कहना है कि कभी-कभी चश्मा कहां रखा है ये भूल जाना या किसी का नाम याद आने में थोड़ा समय लगना सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा हो सकता है. लेकिन जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे और व्यक्ति की स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगे, तब स्थिति गंभीर मानी जाती है.

आरएमएल अस्पताल की डॉ. शेली दत्ता कहती हैं कि परिवार को किसी एक घटना के आधार पर नहीं, बल्कि लगातार हो रहे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति, जो वर्षों से घर के काम या आर्थिक जिम्मेदारियां संभालता रहा है, अचानक उनमें परेशानी महसूस करने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

कैसे होती है डिमेंशिया की जांच?

एम्स दिल्ली के जेरियाट्रिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट डॉ. अविनाश चक्रवर्ती का कहना है कि डिमेंशिया की पहचान सिर्फ एक मेमोरी टेस्ट से नहीं होती. इसके लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, दवाइयों की समीक्षा, न्यूरोलॉजिकल जांच और दैनिक गतिविधियों पर प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है.

जरूरत पड़ने पर विटामिन B12, थायरॉयड और अन्य स्वास्थ्य जांचों के साथ ब्रेन इमेजिंग भी की जा सकती है. कई बार डिप्रेशन, नींद की समस्या और कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव भी याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं.

समय पर पहचान क्यों जरूरी है?

विशेषज्ञों का कहना है कि डिमेंशिया का हर मामला रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसकी समय पर पहचान मरीज की सुरक्षा, बेहतर देखभाल और परिवार की तैयारी में मदद करती है. शुरुआती चरण में इलाज शुरू होने से जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है.

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