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Best Contraceptive: अनचाही प्रेगनेंसी से कैसे बचें? कॉपर-टी, गोली या कंडोम, कैसे चुनें अपने ल‍िए बेस्‍ट गर्भन‍िरोधक

बच्चा अभी नहीं चाहिए या दो बच्चों के बीच कुछ साल का अंतर रखना चाहते हैं? बाजार में विकल्प कई हैं, लेकिन किसी दोस्त या मेडिकल स्टोर की सलाह पर तरीका चुनना ठीक नहीं. जानिए आपके लिए सही विकल्प तय करते समय किन बातों पर गौर करना चाहिए.

Medically Reviewed By: Dr Richa Arora Miglani
Best Contraceptive: अनचाही प्रेगनेंसी से कैसे बचें? कॉपर-टी, गोली या कंडोम, कैसे चुनें अपने ल‍िए बेस्‍ट गर्भन‍िरोधक
बच्चा अभी नहीं चाहिए तो कौन सा तरीका चुनें? कॉपर-T से पिल्स तक एक्सपर्ट से समझें ऑप्शन
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शादी के बाद जब बात बच्चे की प्लानिंग या फिर दो बच्चों के बीच गैप रखने की आती है, तो मियां-बीवी के बीच सबसे ज्यादा माथापच्ची इसी बात पर होती है कि कौन सा तरीका अपनाया जाए. हमारे यहां आज भी इस मुद्दे पर खुलकर बात करने में औरतें झिझकती हैं. सासु मां या पड़ोस की किसी भाभी ने जो बता दिया, आंख मूंदकर उसी पर भरोसा कर लिया. कई बार तो नौजवान लड़के-लड़कियां मेडिकल स्टोर वाले भैया के भरोसे बैठ जाते हैं और वो जो भी गोली थमा दे, उसे खाकर बैठ जाती हैं.

बाद में पता चलता है कि महीने की तारीखें ही उलट-पुलट हो गईं, चेहरे पर मुंहासे निकल आए या अचानक दस किलो वजन बढ़ गया. सच पूछिए तो हर औरत का शरीर, उसके हार्मोन्स और उसकी दिनचर्या एक जैसी नहीं होती. जो नुस्खा आपकी सहेली पर बिल्कुल फिट बैठा, जरुरी नहीं कि वो आपके बदन को भी सूट करे.

गर्भनिरोधक चुनने से पहले इन 5 बातों को अच्छी तरह तौल लें

बाजार में साधनों की कोई कमी नहीं है, पर अपनी मर्जी से कोई भी तीर-तुक्का चलाने से पहले कुछ सीधी बातों का जवाब अपने आप से पूछ लीजिए.

  1. आपकी उम्र कितनी है और क्या अभी बिल्कुल बच्चा नहीं चाहिए या फिर दो साल बाद पालना झुलाने की तैयारी है.
  2. क्या आपकी फैमिली पूरी हो चुकी है और अब आगे कभी भी बच्चे की कोई गुंजाइश नहीं रखनी.
  3. आपका महावारी का चक्र कैसा रहता है, क्या बहुत ज्यादा खून बहता है और पेट में असहनीय दर्द होता है, या फिर डेट्स हमेशा आगे-पीछे भागती हैं.
  4. क्या आप रोज एक तय वक्त पर अलार्म लगाकर गोली खाना याद रख सकती हैं, या भूलने की पक्की आदत है.
  5. आपके शरीर में बीपी, थायराइड, माइग्रेन या नसों में खून का थक्का जमने की कोई पुरानी शिकायत तो नहीं रही.

सालों-साल की फुर्सत देने वाले पक्के साधन

अगर आप उन महिलाओं में से हैं जो रोज-रोज दवा याद रखने के चक्कर से तंग आ चुकी हैं, तो आपके लिए लंबे समय तक टिकने वाले साधन सबसे मुफीद बैठते हैं. इन्हें एक बार लगवा लो और फिर सालों तक प्रेगनेंसी का डर दिमाग से निकल जाता है.

सादी कॉपर-टी (नॉन-हार्मोनल): ये डॉक्टर के जरिए बच्चेदानी के अंदर बैठाई जाती है. इसमें रत्ती भर भी कोई हार्मोन नहीं होता, तांबे का असर स्पर्म को अंडे से मिलने ही नहीं देता. एक बार लगवा लिया तो 5 से लेकर 10 साल तक की पूरी छुट्टी. जब मन करे कि अब बच्चा चाहिए, डॉक्टर के पास जाकर 5 मिनट में इसे बाहर निकलवा लें.

हार्मोन वाली आईयूडी: इसमें से बहुत हल्की मात्रा में प्रोजेस्टिन नाम का हार्मोन धीरे-धीरे निकलता रहता है. ये उन औरतों के लिए दोहरी राहत है जिन्हें महीने के दिनों में बहुत ज्यादा दर्द और खून जाने की शिकायत रहती है. ये बच्चे को तो रोकती ही है, साथ ही हेवी ब्लीडिंग की आफत को भी काफी हल्का कर देती है.

चमड़ी वाला इंप्लांट: ये माचिस की तीली जैसी एक पतली सी लचीली डंडी होती है, जिसे डॉक्टर बाएं हाथ की चमड़ी के ठीक नीचे बैठा देते हैं. ये तीन साल तक आराम से काम करती है और ऊपर से दिखती भी नहीं.

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रोज खाई जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियां

गोलियों का चलन बहुत ज्यादा है, पर इन्हें खाते वक्त जो सबसे बड़ी गलती होती है, वो है लापरवाही. ये गोलियां शरीर में अंडे को फूटने से रोकती हैं, जिससे प्रेगनेंसी ठहरती ही नहीं. जिनका पीरियड टेढ़ा-मेढ़ा चलता है, उनके लिए ये गोलियां चक्र को सीधा करने में मदद करती हैं और चेहरे के कील-मुहासे भी कम करती हैं.

लेकिन इसकी सबसे बड़ी आफत यही है कि इसे घड़ी देखकर रोज एक ही समय पर गटकना पड़ता है. अगर आप लगातार दो दिन भी भूल गईं, तो समझो सारा सुरक्षा चक्र टूट गया.
जिन महिलाओं को हाई बीपी रहता है, वजन जरूरत से ज्यादा भारी है या परिवार में किसी को दिल का दौरा या खून जमने की बीमारी रही हो, उन्हें बिना डॉक्टर से पूछे इन गोलियों को हाथ भी नहीं लगाना चाहिए.

कंडोम

कंडोम एक ऐसी चीज है जो हर गली-नुक्कड़ पर मिल जाती है और सबसे अच्छी बात ये है कि इसका औरत के हार्मोन्स पर कोई उल्टा-सीधा असर नहीं पड़ता. ये सिर्फ अनचाहा गर्भ ही नहीं रोकता, बल्कि एचआईवी और यौन रोगों (एसटीआई) से भी पूरी हिफाजत करता है. जो कपल्स दवाइयों और डॉक्टरों के झंझट से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए ये सबसे सीधा रास्ता है. 

कई समझदार लोग रिस्क बिल्कुल जीरो करने के लिए कंडोम के साथ-साथ किसी दूसरे साधन को भी मिला लेते हैं ताकि मन में कोई खटका न रहे.

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एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

इस पूरे मसले पर नई दिल्ली स्थित मशहूर आरजी हॉस्पिटल्स (Rg hospitals, delhi) में लेप्रोस्कोपिक, रोबोटिक और कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी की प्रमुख डॉ. रिचा अरोड़ा मिगलानी से जब हमने बात की, तो उन्होंने बहुत पते की बात समझाई. उनका कहना है कि दुनिया में ऐसा कोई एक साधन नहीं बना जिसे आंख बंद करके हर औरत के लिए 'बेस्ट' कह दिया जाए. सही फैसला औरत की उम्र, उसकी पुरानी बीमारियों, आने वाले वक्त में बच्चों की प्लानिंग और उसकी माहवारी की सेहत को देखकर ही तय होता है. गर्भनिरोध का असली मकसद यही है कि बिना सेहत से खिलवाड़ किए कपल्स अपनी मर्जी से जिंदगी जी सकें.

डॉ. रिचा अरोड़ा मिगलानी का कहना है कि जो महिलाएं रोज-रोज का झंझट नहीं पालना चाहतीं, उनके लिए कॉपर-टी या इंप्लांट सबसे कामयाब रास्ते हैं क्योंकि इनमें रोज दवा याद रखने की टेंशन नहीं रहती. जिन महिलाओं को पीरियड्स में बहुत तेज ब्लीडिंग होती है, उनके लिए हार्मोनल आईयूडी बहुत राहत देती है. वहीं जो महिलाएं हार्मोन्स से बचना चाहती हैं, वो सादी कॉपर-टी चुन सकती हैं. पर इसे लगवाने से पहले किसी अच्छे डॉक्टर से अंदरूनी जांच करवाना बेहद जरुरी है.

डॉक्टर मिगलानी आगे बताती हैं कि गर्भनिरोधक गोलियां पीरियड के दर्द को कम तो करती हैं, पर अगर किसी को खून के थक्के या दिल की दिक्कत का खतरा रहा हो तो ये भारी पड़ सकती हैं. इसके अलावा कंडोम सबसे सुरक्षित है क्योंकि ये जानलेवा इंफेक्शन से भी बचाता है. वहीं जिन परिवारों में बच्चे पूरे हो चुके हैं और अब आगे औलाद की कोई चाह नहीं है, वो हमेशा के लिए नसबंदी का पक्का रास्ता चुन सकते हैं.

इमरजेंसी पिल को रोज की टॉफी समझने की भूल न करें

आजकल के लड़के-लड़कियां टीवी के विज्ञापनों से इतने गुमराह हैं कि जब भी कोई चूक हुई, मेडिकल स्टोर भागे और 72 घंटे वाली गोली खा ली.

  1. दिमाग में बिठा लीजिए कि इमरजेंसी पिल कोई रोजमर्रा का गर्भनिरोधक साधन नहीं है.
  2. ये सिर्फ किसी अनहोनी या हादसे के लिए बनी है, जैसे कंडोम फट गया या कोई बड़ा धोखा हो गया.
  3. इसमें हार्मोन्स का ऐसा तेज धमाका होता है कि औरत की बच्चेदानी का पूरा तालमेल बिगड़ जाता है.
  4. अगर महीने में दो-तीन बार ये गोली खाई, तो बीच-बीच में खून गिरना, उल्टी आना, पेट में मरोड़ और आगे चलकर मां बनने में भारी रुकावटें आ सकती हैं.

पक्का इलाज: जब परिवार हो चुका हो पूरा

अगर आपकी उम्र 35 के पार है, दो-तीन बच्चे हो चुके हैं और मियां-बीवी दोनों ने तय कर लिया है कि अब आगे कोई बच्चा नहीं चाहिए, तो नसबंदी सबसे सुकून भरा रास्ता है.

महिलाओं में इसे नलबंदी कहते हैं, जो आजकल दूरबीन (लेप्रोस्कोपी) से पेट पर एक छोटा सा कट लगाकर आधे घंटे में हो जाती है और उसी शाम मरीज घर आ जाता है.
पुरुषों की नसबंदी तो औरतों से भी दस गुना आसान है, जिसमें न कोई बड़ा चीरा लगता है और न कोई टांका आता है. लोगों में ये वहम फैला है कि इससे मर्दानी कमजोरी आती है, जबकि हकीकत में ताकत पर रत्ती भर भी कोई फर्क नहीं पड़ता.

सही फैसला कैसे लें?

किसी सहेली के मशवरे या सोशल मीडिया की रील देखकर अपने शरीर के साथ खिलवाड़ मत कीजिए. सबसे अक्लमंदी का तरीका यही है कि आप अपने शौहर या पार्टनर का हाथ पकड़कर किसी अच्छी महिला डॉक्टर (Gynaecologist) के पास बैठें. खुलकर अपनी तकलीफें बताएं, अपनी दिनचर्या बताएं और अपने आगे के प्लान शेयर करें. हर साधन के नफे-नुकसान को तौलें और वही रास्ता चुनें जो आपकी सेहत और आपकी जेब दोनों को रास आए. थोड़ी सी समझदारी आपको बेवजह के डिप्रेशन और अनचाही चिंताओं से हमेशा बचाकर रखेगी.

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