मोटापा आज सिर्फ एक जीवनशैली संबंधी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में सामने आया, जहां गंभीर मोटापे से जूझ रहे 13 वर्षीय बच्चे की सफल बेरियाट्रिक सर्जरी की गई. खास बात यह है कि इस परिवार के चार सदस्य मोटापे की समस्या के कारण सर्जरी करा चुके हैं.
अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक, लेजर एवं जनरल सर्जरी विभाग के अनुसार, बच्चे का वजन सर्जरी से पहले करीब 186 किलोग्राम तक पहुंच गया था. बढ़ते वजन की वजह से उसे सांस लेने में परेशानी, जोड़ों और कमर में दर्द, तेज खर्राटे, स्लीप एपनिया और नींद से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. इसके अलावा व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल रहे थे.
परिवार में भी रहा मोटापे का इतिहास
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के परिवार में मोटापे का मजबूत इतिहास रहा है. उसके माता-पिता भी गंभीर मोटापे से प्रभावित रहे हैं और दोनों की पहले बेरियाट्रिक सर्जरी हो चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आनुवंशिक, पारिवारिक और जीवनशैली से जुड़े कारक एक साथ भूमिका निभा सकते हैं.
जीवनशैली में बदलाव से नहीं मिला फायदा
बच्चे और उसके परिवार ने खानपान में सुधार और नियमित गतिविधियों के जरिए वजन कम करने की कोशिश की, लेकिन लंबे समय तक कोई संतोषजनक परिणाम नहीं मिला. इसके बाद विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया.
सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद 13 अगस्त 2026 को बच्चे की लेप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी की गई. इस प्रक्रिया का नेतृत्व सर गंगा राम अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक, लेजर एवं जनरल सर्जरी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. तरुण मित्तल ने किया.
सर्जरी के बाद दिखा सकारात्मक असर
अस्पताल के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद बच्चे के आहार को चिकित्सकीय निगरानी में धीरे-धीरे बढ़ाया गया. अब तक उसका वजन 20 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है. परिवार ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत, खर्राटे, नींद की गुणवत्ता, चलने-फिरने की क्षमता और जोड़ों के दर्द में भी सुधार देखने को मिला है.
बच्चों में सर्जरी से पहले जरूरी है पूरी जांच
अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि बच्चों और किशोरों में बेरियाट्रिक सर्जरी का फैसला बेहद सावधानी से लिया जाता है. इसके लिए विस्तृत मेडिकल जांच, पोषण संबंधी मूल्यांकन, अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी और लंबे समय तक फॉलो-अप आवश्यक होता है. सर्जरी के बाद भी संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पोषण संबंधी परामर्श और डॉक्टरों की निगरानी उपचार का अहम हिस्सा बने रहते हैं. एक्सपर्ट को उम्मीद है कि उचित जीवनशैली और नियमित फॉलो-अप के साथ अगले 12 से 18 महीनों में बच्चे का वजन और कम हो सकता है.
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