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This Article is From Nov 27, 2020

Guru Nanak Jayanti 2020: क्या है गुरु नानक जयंती महत्व, कैसे बनाया जाता है कड़ा प्रसाद

गुरु नानक जयंती को हर साल बेहद उत्सुकता के साथ मनाया जाता है. गुरु नानक जयंती को गुरू पुरब भी कहा जाता है.

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  • गुरु नानक जयंती को गुरूपुरब भी कहा जाता है.
  • इस साल गुरु नानक जयंती का पर्व 30 नवंबर को मनाया जाएगा है.
  • इस दिन दुनिया भर में गुरुद्वारों को रोशनी से सजाया जाता है.

गुरु नानक जयंती को हर साल बेहद उत्सुकता के साथ मनाया जाता है. गुरु नानक जयंती को गुरूपुरब भी कहा जाता है. गुरु नानक देव सिखों के दस गुरुओं में से पहले गुरु होने के अलावा सिख धर्म के संस्थापक भी हैं, उन्हीं के जन्मदिवस को गुरु नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस साल गुरु नानक जयंती का पर्व 30 नवंबर को मनाया जाएगा है. इस दिन दुनिया भर में गुरुद्वारों को रोशनी से सजाया जाता है, इतना ही नहीं एक साथ प्रार्थना करने और गुरु नानक देव के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाने के लिए लोग गुरुद्वारों इकट्ठा में होते हैं.

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गुरु नानक जयंती 2020: तिथि और समय

गुरु नानक जयंती सोमवार, 30 नवंबर को 2020 मनाई जाएगी. उत्सव की शुरुआत देर रात 29 नवंबर से हो जाएगी.

पूर्णिमा तिथि शुरू होती है - 29 नवंबर, 2020 को दोपहर 12:47 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त -  30 नवंबर, 2020 को 02:59 बजे

(स्रोत: द्रिकपंचागडॉटकॉम)

गुरु नानक जयंती 2020: उत्सव का महत्व और इतिहास

गुरु नानक देव का जन्म साल 1469 में ननकाना साहिब में हुआ था. वह सिख धर्म के संस्थापक थे, यही वजह है कि उनके जन्म को एक दैवीय चमत्कार से कम नहीं माना जाता था. उनकी जयंती हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पड़ती है.

गुरु नानक जयंती गुरु की शिक्षाओं को याद करने और उनकी पुनरावृत्ति करने का दिन है. प्राथमिक सिद्धांतों में से एक ईश्वर में विश्वास था, जिसे 'एक ओंकार' के रूप में भी जाना जाता है और ईश्वर की इच्छा, या 'वाहेगुरु' के लिए प्रस्तुत किया जाता है. सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब में विस्तृत शिक्षाएं मिलती हैं.

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गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है: गुरु पूरब समारोह 2020

परंपराओं के अनुसार, गुरुद्वारों में आयोजित गुरु ग्रंथ साहिब का 48 घंटे का लंबा पाठ होता है, जिसे अखंड पाठ के रूप में भी जाना जाता है, जो त्योहार से दो दिन पहले शुरू होता है. गुरु पूरब के दिन, सुबह के समय भक्तों द्वारा एक जुलूस निकाला जाता है, जिसे नगर कीर्तन के नाम से जाना जाता है. पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी में रखा जाता है और पांच प्रहरी जिन्हें पंज प्यारे कहा जाता है, कीर्तन की अगुवाई करते हैं. जुलूस में संगीत के साथ गुरु की प्रशंसा में प्रार्थनाएं गाई जाती हैं.

गुरु नानक जयंती: त्योहार पर खाने के लिए भोजन

गुरु नानक जयंती के दिन, गुरुद्वारों में परोसे जाने वाले सामुदायिक भोज या 'लंगर' को खाने का रिवाज है. जो भोजन पकाया जाता है, वह पूरी तरह से शाकाहारी होता है जिसे विशेष रूप से स्वयंसेवकों द्वारा सांप्रदायिक रसोई में तैयार किया जाता है. लंगर में परोसे जाने वाले भोजन में आमतौर पर रोटी, चावल, दाल, छाछ या लस्सी के साथ सब्जियां शामिल होती हैं. गेहूं के आटे, चीनी और घी के साथ बनाया जाने वाला मीठा कड़ा प्रसाद भी लंगर का एक अभिन्न हिस्सा होता है. यहां देखें की आप घर पर किस तरह कड़ा प्रसाद बना सकते हैं.

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