कर्नाटक चुनाव में बीजेपी बनी सबसे बड़ी पार्टी
बेंगलुरु:
- बीजेपी ने अपने काडर बीते 5 सालें में बहुत मजबूत बनाया है. बीजेपी कर्नाटक में पहले भी सरकार बना चुकी है. पार्टी वहां साल 1990 से ही काफी सक्रिय है.
- बीजेपी को इस बार बीएस येदियुरप्पा जैसे लिंगायत समुदाय के बड़े नेता के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है. पिछले चुनाव में बीएस येदियुरप्पा और बी. श्रीरामुलू जैसे कद्दावर नेता अलग होकर अपनी पार्टी बना ली थी जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा था.
- इस बार बीएस येदियुरप्पा को बीजेपी ने सीएम का प्रत्याशी बनाया और बी. श्रीरामुलू को भी सिद्धारमैया के खिलाफ बदामी सीट से चुनाव लड़े.
- सिद्धारमैया ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश करके बड़ा चुनावी दांव चला लेकिन बीजेपी ने इसे हिंदुओं को बांटने का मुद्दा बनाया और वह इसमें कामयाब हो गई.
- वहीं लिंगायतों के अलावा बाकी जातियां कांग्रेस से दूर होती चली गईं. बीजेपी ने वहां 'प्लान बी' के तहत लिंगायतों को अपने पाले में रखने की कोशिश के साथ ही दूसरी जातियों को लुभाने की कोशिश की. इसका नतीजा ये रहा कि बीजेपी को सभी जातियों से वोट मिला.
- बीजेपी ने सत्ता विरोधी लहर को खूब भुनाया और साथ ही में पीएम मोदी ने राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को भी मुद्दा बनाया. बीजेपी ने सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ उनकी महंगी घड़ी की खूब चर्चा की.
- शुरुआत में जब राहुल गांधी प्रचार मेें उतरे थे तो ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस यहां पर सत्ता बचाने में कामयाब हो जाएगी लेकिन पीएम मोदी की रैलियों से भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बदला.
- बीजेपी को इस बार तटीय इलाके, मुस्लिम बहुल और एसटी-एसटी बहुल सीटों पर भी खासा समर्थन मिला है.
- लिंगायतों बहुल इलाके में भी कांग्रेस का दांव नहीं चला और इस बार उसे 40 सीटें मिलीं.
- जेडीएस का मजबूत होना भी कांग्रेस के लिए नुकसान साबित हुआ है. ऐस लग रहा है कि कांग्रेस के पक्ष में पड़ने वाला वोट जेडीएस के खाते में चला गया.
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