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This Article is From Nov 15, 2018

Vrischika Sankranti 2018: इस दिन होती है सूर्य की उपासना, जानिए शुभ मुहूर्त और मान्यता

Vrischika Sankranti 2018: वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्यदेव तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं. इसीलिए इस संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति कहा जाता है. इस बार ये संक्रांति 16 नवंबर को है.

Vrischika Sankranti 2018: इस दिन होती है सूर्य की उपासना, जानिए शुभ मुहूर्त और मान्यता
वृश्चिक संक्रांति कब और क्यों मनाई जाती है?
नई दिल्ली: Vrischika Sankranti 2018: वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्यदेव तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं. इसीलिए इस संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति कहा जाता है. इस बार ये संक्रांति 16 नवंबर को है. इस दिन सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है. सुबह उठकर विष्णु पूजा और पवित्र नदी में स्नान किया जाता है. वृश्चिक संक्रांति के दिन दान देने की भी परंपरा है. यहां जानिए वृश्चिक संक्रांति के बारे में खास बातें.

क्या होती है संक्रांति ?
ज्योतिष शास्त्र में मौजूद 12 राशियों में सूर्य के प्रवेश को संक्रांति कहते हैं. हिन्दू पंचांग के अनुसार साल में कुल 12 संक्रांति आती हैं. क्योंकि सूर्य बारी-बारी से मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन राशियों में प्रवेश करते हैं. जैसे मकर राशि में सूर्य के प्रवेश के दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है. ठीक ऐसे ही वृश्चिक राशि में सूर्य के आगमन के दिन वृश्चिक संक्रांति मनाई जाती है.

वृश्चिक संक्रांति का शुभ मुहूर्त
वृश्चिक संक्रांति के दो शुभ मुहूर्त हैं पहला पुण्य मुहूर्त और दूसरा महापुण्य काल मुहूर्त

पुण्य मुहूर्त - दोपहर 12:11 से 05:38 तक
कुल समय - 5 घंटे 26 मिनट

महापुण्य काल मुहूर्त - दोपहर 03:49 से 05:38 तक
कुल समय - 1 घंटा 48 मिनट

वृश्चिक संक्रांति के दिन विष्णुसहस्रनाम (विष्णु के एक हजार नाम) और आदित्य हृदय स्तोत्र का भी पाठ करना शुभ माना जाता है.

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