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Mahashivratri 2026: नाथेश्वरनाथ महादेव, जहां शिव कृपा बरसते ही भक्तों के खुलते हैं बंद किस्मत के ताले

Tale Wale Mahadev: सनातन परंपरा में शिव की पूजा शीघ्र ही शुभ फल दिलाने वाली मानी गई है, यही कारण है कि आपको देश भर में देवों के देव महादेव से जुड़े तमाम शिवालय मिल जाएंगे. कुंभ नगरी प्रयागराज स्थित तमाम शिवालयों में से एक नाथेश्वरनाथ महादेव में लोग किस कारण से ताले चढ़ाते हैं? महादेव के इस मंदिर का धार्मिक महत्व जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

Mahashivratri 2026: नाथेश्वरनाथ महादेव, जहां शिव कृपा बरसते ही भक्तों के खुलते हैं बंद किस्मत के ताले
Natheshwarnath Mandir : प्रयागराज के ताले वाले महादेव
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Tale Wale Mahadev Ka Mandir Kahan Per Hai: हिंदू धर्म में भगवान शिव की साधना सबसे जल्दी फल प्रदान करने वाली मानी गई है. यही कारण है कि कोई उन्हें दूध तो कोई गंगाजल तो कोई सिर्फ बेलपत्र मात्र को चढ़ाकर उनकी कृपा पाने का प्रयास करता है. पूरे देश भर में औघड़दानी कहे जाने वाले भोले बाबा के कई ऐसे मंदिर हैं, जो अलग-अलग कामना या फिर अलग-अलग प्रकार की पूजा के लिए जाने जाते हैं. संगम नगरी प्रयागराज में मनकामेश्वर, हाटकेश्वर, तक्षकेश्वर आदि कई ऐसे शिवाले हैं, जहां पर हर रोज बडी संख्या में शिव भक्त भोले बाबा का दर्शन और पूजन करने के लिए पहुंचते हैं. आइए कुंभ नगरी प्रयागराज स्थित एक ऐसे ही चमत्कारी शिवालय के बारे में जानते हैं जहां भोले के भक्त महादेव को मनाने के लिए ताले चढ़ाते हैं. 

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नाथेश्वरनाथ महादेव यानि ताले वाले महादेव का यह सिद्ध मंदिर प्रयागराज के मुट्ठीगंज स्थित आर्यकन्या चौराहे पर स्थित है. महादेव के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां ताले चढ़ाने पर भगवान भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सारे संकट हर लेते हैं. 

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ताले वाले महादेव मंदिर के अनन्य भक्त शैलेंद्र द्विवेद्वी के अनुसार यह प्राचीन शिवालय नाथ संप्रदाय के द्वारा स्थापित है, इसलिए इसे नाथेश्वरनाथ महादेव मंदिर या फिर कहें ताले वाले महादेव के नाम से जाना जाता है. ताले वाले महादेव का यह मंदिर प्रात:काल 07 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक भक्तों के ​दर्शन और पूजन के लिए खुला रहता है. 

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नाथेश्वरनाथ मंदिर के बारे में मान्यता है जब कोई व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां पर आकर शिव पूजन के बाद ताला अर्पित करता है तो उसकी कामना शीघ्र ही पूरी होती है. इसके बाद वह व्यक्ति यहां आकर अपना ताला खोल देता है. 

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नाथेश्वरनाथ महादेव मंदिर में लोगों की बढ़ती आस्था का अंदाजा आप यहां पर लगे हुए हजारों तालों को देखकर लगा सकते हैं. मंदिर ताला लगाए जाने से पहले पुजारी लोगों से संकल्प कराते हैं और उस ताले का पूरा ब्योरा दर्ज करने के बाद चाभी उसी भक्त को वापस कर देते हैं, ताकि वह अपनी कामना के पूरे होने पर वापस आकर ताला खोल सके. 

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शैलेंद्र द्विवेद्वी जी के अनुसार महाशिवरात्रि के मौके पर बाबा का दिव्य श्रृंगार और पूजन होता है. ताले वाले मंदिर में एक अरबी भाषा में एक शिलालेख है, जिसे मुगलकाल का माना जाता है. बहरहाल, स्थानीय लोगों की मानें तो यह कई सौ साल पुराना सिद्ध शिव मंदिर है, जहां पर तीन हजार से ज्यादा ताले भक्तों के द्वारा लगाए जा चुके हैं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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