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Mahatma Vidur: यम के अवतार थे महात्मा विदुर, जानें किस श्राप के कारण पृथ्वी पर लेना पड़ा जन्म

Mahatma Vidur ki Kahani: महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों में नीति के जानकार महात्मा विदुर  (Mahatma Vidur) का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है. यम देवता के अवतार माने जाने वाले विदुर को आखिर पृथ्वी पर किस कारण जन्म लेना पड़ा, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

Mahatma Vidur: यम के अवतार थे महात्मा विदुर, जानें किस श्राप के कारण पृथ्वी पर लेना पड़ा जन्म
Mahatma Vidur ki Katha: महात्मा विदुर के पूर्वजन्म की कथा 
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Mahabharat ki Kahani: महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों में नीति के जानकार महात्मा विदुर का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है. अत्यंत ही न्यायप्रिय, बुद्धिमान और नीतिवान विदुर के द्वारा दिये गये उपदेश आज भी लोगों को सही-गलत में भेद बताते हुए सफलता की सही राह दिखाने का काम करते हैं. महाभारत (Mahabharata) की कथा में आदर्श जीवन और उत्तम चरित्र के धनी विदुर कोई साधारण पुरुष नहीं बल्कि स्वयं यम देवता (Yam Devta) के अवतार थे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यम को पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में जन्म लेने की क्या जरूरत पड़ी? आइए विदुर के जीवन से जुड़े इस बड़े रहस्य को इस पावन कथा के माध्यम से जानते हैं. 

महात्मा विदुर के पूर्व जन्म की कहानी 

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Photo Credit: AI Generated Image @ gemini

महाभारत काल में हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री विदुर पूर्व जन्म में यमराज (Yamraj) थे. जिन्होंने माण्डव्य नाम के मुनि को अनजाने में किए गये एक पाप के लिए शूली पर चढ़वा दिया. जिसके बाद यम देवता से नाराज होकर माण्डव्य मुनि ने उन्हें मनुष्य योनि में पैदा होने का श्राप दे दिया था. आइए यम देवता के मनुष्य अवतार से जुड़ी कथा को विस्तार से जानते हैं. 

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक समय आर्यावर्त में सुकर्ण नाम का एक राजा राज्य करता था. एक बार एक चोर ने राजा के महल में घुस कर शाही खजाने से धन चुरा लिया. जब चोर धन लेकर भाग रहा था तो राजा के सिपाहियों ने उसे देख लिया और उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे भागने लगे. चोर भागते-भागते जब थक गया और उसे लगा कि अब वह सैनिकों की पकड़ में आ सकता है तो उसने रास्ते में पड़ी माण्डव्य मुनि की कुटिया में राजा के धन को रखकर भाग गया. 

तब राजा ने मुनि को दिया मृत्यु दंड

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इसके बाद जब सैनिकों ने शाही खजाने से जुड़े धन को मुनि की कुटिया में पाया तो उन्होंने मुनि को चोर समझकर बंदी बना लिया. इसके बाद जब सैनिकों ने उन्हें राजा सुकर्ण के सामने पेश किया तो माण्डव्य मुनि ने अपना पक्ष रखते सभी को समझाने की खूब कोशिश की, लेकिन किसी ने भी उनकी बात पर जरा भी विश्वास नहीं किया. फिर राजा ने माण्डव्य मुनि को फांसी पर चढ़ाने का आदेश दे दिया. सैनिकों ने भी राजा की आज्ञा पाते ही उन्हें तुरंत फांसी पर चढ़ा दिया. 

माण्डव्य मुनि ने यम को दिया ये श्राप

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इसके बाद माण्डव्य मुनि सीधे यमराज के पास गए और उन्होंने उनसे पूछा कि उन्होंने न तो कभी किसी प्राणी को कष्ट पहुंचाया और न ही कभी किसी का अहित सोचा. हमेशा ईश्वर की भक्ति में लीन रहा, फिर उन्हें किस अपराध के कारण यह सजा मिली. तब यम देवता ने उनसे कहा कि आप बाल अवस्था में काफी शरारती थे. आपन जब आप बालक थे, तो आपने एक कांटे की नोंक से कई कीड़ों को छेदकर उन्हें कष्ट पहुंचाया था, इसीलिए आपको यह दंड मिला है.

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यमराज की बात को सुनते ही माण्डव्य मुनि बेहद नाराज होकर बोले - हे यमदेव! तुमने अनजाने में किये गये पाप की इतनी बड़ी मुझे सजा दी है, मैं तुम्हें इसके लिए मनुष्य-योनि में उत्पन्न होने का श्राप देता हूं. मान्यता है कि उसी श्राप के कारण यमराज को अगले जन्म में विदुर के रूप में जन्म लेना पड़ा. 

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