गणेश चतुर्थी पर भक्त बड़े उत्साह से बप्पा को घर लाते हैं और विधि-विधान से उनकी स्थापना करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणपति की स्थापना के बाद उन्हें घर में अकेला छोड़ना शुभ नहीं माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बप्पा को घर का मेहमान और परिवार के सदस्य की तरह माना जाता है. इसलिए उनकी सेवा और देखभाल करना जरूरी माना जाता है. आइए आचार्य मदन मोहन से जानते हैं कि इसके पीछे क्या मान्यता है.
बप्पा को अतिथि मानकर करें सेवा
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, सनातन परंपरा में 'अतिथि देवो भव:' की भावना को विशेष महत्व दिया गया है. जब गणपति को घर में स्थापित किया जाता है तो उन्हें विशेष अतिथि के रूप में माना जाता है. ऐसे में उन्हें अकेला छोड़ना उचित नहीं माना जाता है. जिस तरह घर आए मेहमान की देखभाल की जाती है, उसी तरह गणपति की भी श्रद्धा से सेवा करने की परंपरा है.
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स्थापना के बाद बढ़ जाती है जिम्मेदारी
गणपति स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद भक्तों की आस्था में प्रतिमा का महत्व और बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दौरान घर के किसी सदस्य को बप्पा के पास रहकर उनकी पूजा और सेवा करते रहना चाहिए. उन्हें समय-समय पर भोग लगााना और आरती करना भी इसी परंपरा का हिस्सा है.
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दीपक और पूजा की व्यवस्था भी जरूरी
गणपति के पास लगातार किसी के रहने की एक वजह पूजा की व्यवस्थाओं की देखभाल भी मानी जाती है. खासकर अगर पूजा स्थल पर दीपक जल रहा हो, तो उसकी निगरानी जरूरी होती है. मान्यता है कि बप्पा की नियमित पूजा से घर का मााहौल भक्तिमय और सकारात्मक बना रहताा है.
घर से बाहर जाना पड़े तो क्या करें
अगर किसी जरूरी काम से घर के सभी सदस्यों को बाहर जाना पड़े, तो पूजा और दीपक की व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए. गणपति को घर में स्थापित करने से पहले ही पूजा की जिम्मेदारी किसी विश्वसनीय व्यक्ति को देना बेहतर मानाा जाता है.
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