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This Article is From Apr 22, 2019

पीएम मोदी VS प्रियंका गांधी : सबसे बड़े मुकाबले की तैयारी? वाराणसी में किसका पलड़ा भारी, 10 बड़ी बातें

प्रियंका अगर वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो हो सकता है कि कांग्रेस को इसका फायदा वाराणसी की आसपास सीटों पर हो सकता है. लेकिन इस मुकाबले के लिए वाराणसी कितना है और स्थानीय समीकरण क्या कहते हैं इस पर भी नजर होगी.

पीएम मोदी VS प्रियंका गांधी : सबसे बड़े मुकाबले की तैयारी? वाराणसी में किसका पलड़ा भारी, 10 बड़ी बातें
प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर राहुल गांधी कहें तो वह वाराणसी से चुनाव लड़ सकती हैं
नई दिल्ली:
  1. 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले थे.  नरेंद्र मोदी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अरविन्द केजरीवाल से तकरीबन 3 लाख 77हज़ार वोटों से हराया था.  दूसरे स्थान पर रहने वाले आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले. 
  2. जबकि  कांग्रेस प्रत्याशी के अजय राय को 75,614 वोट, बीएसपी को तकरीबन 60 हज़ार 579 वोट, सपा को 45291 वोट मिले थे. यानि सपा-बसपा और कांग्रेस का वोट जोड़ दे तो 3लाख 90 हज़ार 722 वोट हो जाते हैं. 
  3. मतलब पीएम मोदी की जीत जो अंतर था वह सभी दलों के संयुक्त वोट बैंक से पीछे हो जाता है. सवाल इस बात है कि जिस तरह से सपा-बसपा ने रायबरेली और अमेठी में अपने प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है अगर प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो क्या उनके लिए भी रास्ता खाली कर दिया जाएगा.
  4. बात जातिगत समीकरण की करें तो वाराणसी में बनिया मतदाता करीब 3.25 लाख हैं जो कि बीजेपी के कोर वोटर हैं. अगर नोटबंदी और जीएसटी के बाद उपजे गुस्से को कांग्रेस भुनाने में कामयाब होती है तो यह वोट कांग्रेस की ओर खिसक सकता है. 
  5. वहीं ब्राह्मण मतदाता हैं जिनकी संख्या ढाई लाख के करीब है. माना जाता है कि विश्वनाथ कॉरीडोर बनाने में जिनके घर सबसे ज्यादा हैं उनमें ब्राह्मण ही हैं और एससी/एसटी संशोधन बिल को लेकर भी नाराजगी है. 
  6. यादवों की संख्या डेढ़ लाख है. इस सीट पर पिछले कई चुनाव से यादव समाज बीजेपी को ही वोट कर रहा है. लेकिन सपा के समर्थन के बाद इस पर भी सेंध लग सकती है. 
  7. वाराणसी में मुस्लिमों की संख्या तीन लाख के आसपास है. यह वर्ग उसी को वोट करता है जो बीजेपी को हरा पाने की कुवत रखता हो.
  8. इसके बाद भूमिहार 1 लाख 25 हज़ार, राजपूत 1 लाख, पटेल 2 लाख, चौरसिया 80 हज़ार, दलित 80 हज़ार और अन्य पिछड़ी जातियां 70 हज़ार हैं.  इनके वोट अगर थोड़ा बहुत भी इधर-उधर होते हैं तो सीट का गणित बदल सकता है. 
  9. आंकड़ों के इस खेल को देखने के बाद अगर साझेदारी पर बात बनी और जातीय समीकरण ने साथ दिया तो प्रियंका गांधी मोदी को टक्कर दे सकती हैं. 
  10. हालांकि मोदी ने जिस तरह से पिछले साढ़े चार सालों में वाराणसी में विकास के जो काम किया है क्या उसे नजरंदाज किया जा सकता है, यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है. 
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