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UGC के जातिगत भेदभाव वाले नियमों पर पुनर्विचार करेगी मोदी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में कहा- कमेटी बनाने को तैयार

UGC New Regulations Supreme Court: यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए थे, जिन्हें लेकर जमकर विवाद हुआ और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है.

UGC के जातिगत भेदभाव वाले नियमों पर पुनर्विचार करेगी मोदी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में कहा- कमेटी बनाने को तैयार
यूजीसी के नए नियमों को लेकर सुनवाई

यूजीसी के नए नियमों को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई. इस दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में बताया गया है कि इस पर पुनर्विचार के लिए कमेटी बनाने की तैयारी हो रही है. इसके साथ ही ये भी बताया गया कि नए नियमों के लागू होने पर किसी भी छात्र को इसे लेकर कोई आशंका नहीं होगी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले को लेकर और वक्त दे दिया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है रोक

शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के नए नियम लागू हुए थे, लेकिन इसके बाद से ही इन्हें लेकर विवाद शुरू हो गया था, देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए और आरोप लगाया कि इसमें पक्षपात किया जा रहा है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में इन विवादित नियमों पर रोक लगा दी थी. इसके बाद से ही मामले को लेकर सुनवाई चल रही है. इसी सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है, ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान हो सके और किसी भी वर्ग के मन में असंतोष या आशंका न रहे. 

पिछली सुनवाई के दौरान यूजीसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि UGC नए नियमों पर पुनर्विचार कर रहा है. इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियम पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया था. UGC के नियम के खिलाफ दाखिल याचिका में यूजीसी के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी बनाए गए नियम, 2026 के एक प्रावधान को चुनौती दी गई है, इस नियम को जिसे 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था.

याचिका में क्या कहा गया? 

याचिका में आरोप लगाया है कि इस नियम का 3(C) मनमाना और भेदभावपूर्ण है तथा इससे कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.याचिका में ये भी कहा गया है कि ये नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है. 

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