सेना में अग्निवीर के तौर पर भर्ती होने वाले हजारों युवाओं के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया, जिसमें बताया गया कि अब अग्निपथ योजना में कई अहम बदलाव किए गए हैं. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने इसकी पूरी जानकारी दी. इसमें सेना से बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का सर्विस एक्सटेंशन दिया गया है, यानी अब वो 6 साल तक सेना में नौकरी कर सकते हैं. इतना ही नहीं, उन्हें इसके बाद भी नौकरी पक्की करने का मौका दिया जाएगा. ऐसे में माना जा रहा है कि अब ज्यादातर अग्निवीरों को सेना में ही पक्की नौकरी देने की तैयारी है.
क्या है अग्निपथ योजना?
जून 2022 में भारत सरकार की तरफ से अग्निपथ योजना लाई गई थी. इस योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं को अग्निवीर का नाम दिया गया. योजना में प्रावधान था कि भर्ती होने के चार साल बाद सिर्फ 25 प्रतिशत युवाओं को ही सेना में शामिल किया जाएगा, बाकी बचे 75 प्रतिशत को नौकरी छोड़नी होगी. इसके साथ ही बताया गया कि बाहर होने वाले इन अग्निवीरों को पेंशन जैसी सुविधाएं भी नहीं दी जाएंगीं.
18 हजार अग्निवीरों को होना था बाहर
अग्निपथ योजना लागू होने के चार साल पूरे हो चुके हैं, ऐसे में अग्निवीरों के पहले बैच से 75 प्रतिशत युवाओं को नौकरी से बाहर होना था. कुछ ही हफ्ते में करीब 18 हजार जवानों को सेना की नौकरी छोड़नी थी, लेकिन इससे ठीक पहले केंद्रीय कैबिनेट ने अग्निवीरों को 2 साल का एक्सटेंशन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. यानी फिलहाल किसी भी अग्निवीर को नौकरी से हाथ नहीं धोना पड़ेगा.
दो साल बाद सभी को मिलेगा मौका
दो साल का एक्सटेंशन पूरा होने के बाद भी ज्यादातर अग्निवीर अपनी नौकरी सुरक्षित कर सकते हैं. सेना की तरफ से जानकारी दी गई है कि तमाम तरह की चीजों को देखने के बाद इन सभी 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में परमानेंट नौकरी का मौका दिया जाएगा. यानी 75 प्रतिशत में से ज्यादातर जवान अपनी नौकरी बचा सकते हैं. इसके लिए उन्हें खुद का ट्रैक रिकॉर्ड और बाकी चीजों पर ध्यान देना होगा.
किन्हें छोड़नी होगी नौकरी?
अब सवाल है कि 6 साल की नौकरी पूरी होने के बाद किन अग्निवीरों को घर वापस जाना होगा. सेना की तरफ से साफ किया गया है कि जिन अग्निवीरों का प्रोफाइल काफी ज्यादा खराब होगा, अनुशासनहीनता करने वाले या फिर मेडिकल रूप से अनफिट जवानों को ही सेना से बाहर किया जाएगा.
अग्निवीरों को क्या-क्या मिलता है?
अग्निपथ योजना के तहत बाहर होने वाले जवानों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत रखने के लिए करीब 11.71 लाख रुपये की सेवा निधि देने का प्रावधान था, जो अब 6 साल बाद 15 लाख से ज्यादा हो सकता है. इसके अलावा बाकी सरकारी नौकरियों में उन्हें आरक्षण देने का प्रावधान रखा गया है. CAPF और असम राइफल्स में उन्हें 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाएगा. साथ ही तमाम राज्यों ने भी अलग-अलग स्तर पर आरक्षण की तैयारी की है.
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