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'NTA की गलती की सजा हम क्यों भुगतें', UGC NET के छात्रों ने पूछा- ट्रैवल का खर्च कौन उठाएगा?

UGC NET Re-Exam: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA को लेकर एक बार फिर छात्र गुस्से में हैं, छात्रों का कहना है कि पहले तो 50 दिनों तक एजेंसी चुप रही है और अब अचानक री-एग्जाम की बात कर रही है.

'NTA की गलती की सजा हम क्यों भुगतें', UGC NET के छात्रों ने पूछा- ट्रैवल का खर्च कौन उठाएगा?
NTA से छात्रों ने पूछे सवाल

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तरफ से UGC NET आंसर की जारी करने के बाद तीन विषयों की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया है. इनमें इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं. इस फैसले के बाद अब एक बार फिर एनटीए छात्रों के रडार पर है, सोशल मीडिया पर कई अभ्यर्थी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और एजेंसी के सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस फैसले के बाद उन्हें फिर से दूसरे शहर में अपने खर्च पर जाना होगा और एनटीए की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ेगा. 

दोबारा होने वाली परीक्षा का खर्च कौन उठाएगा?

यूजीसी नेट के अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दोबारा होने वाली परीक्षा का खर्च कौन उठाएगा? एनटीए की तरफ से ये साफ किया गया है कि री-एग्जाम के लिए कोई फीस नहीं लगेगी, लेकिन एग्जाम सेंटर तक जाने में होने वाले खर्च को लेकर कुछ भी साफ नहीं किया गया है. कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वो परीक्षा देने के लिए करीब 400 किमी दूर एग्जाम सेंटर तक पहुंचे थे, इसके लिए उन्होंने ट्रेन टिकट बुक करवाई और ठहरने के लिए होटल और खाने की व्यवस्था भी की थी.  इसमें उनके हजारों रुपये खर्च हुए थे, लेकिन अब दोबारा उन्हें यही सब करना होगा. 

कुछ छात्रों का ये भी कहना है कि एनटीए इस बात को इतने दिनों तक दबाकर क्यों बैठा रहा? उनका कहना है कि करीब 50 दिन तक एनटीए ने इस पर कुछ भी नहीं कहा, जब आंसर की जारी हुई तो अचानक कहा गया कि एग्जाम कैंसिल हो गया और इसके लिए करीब 20 दिनों का ही वक्त दिया गया है. जबकि छात्रों को तैयारी के लिए एक महीने का समय दिया जा सकता था. 

अभ्यर्थियों का कहना है कि एनटीए ने जिन लोगों से पेपर बनवाए थे, उन्होंने स्पेलिंग मिस्टेक से लेकर सिलेबस के बाहर के सवाल और पिछले साल के पेपर्स से सवाल चुन लिए थे. ऐसे में ये गलती एजेंसी की है, इसमें छात्रों का कोई कसूर नहीं है. कुछ अभ्यर्थियों ने एनटीए से यात्रा का पूरा खर्च उठाने या फिर होम सिटी चुनने का विकल्प देने की मांग की है. 

NTA दे सकता है मौका 

छात्रों की इस परेशानी को देखते हुए एनटीए की तरफ से उन्हें राहत दी जा सकती है. फिलहाल एजेंसी ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है, लेकिन जल्द ही सिटी चुनने का विकल्प दिया जा सकता है. ऐसा CUET और नीट में भी किया जा चुका है. इससे छात्र अपने शहर का ही विकल्प चुन सकते हैं और उनके पैसे भी खर्च नहीं होंगे. 

छात्रों के अलावा विपक्ष भी हमलावर

नीट पेपर लीक के बाद देशभर में छात्रों ने आंदोलन किया था और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही सब शांत हुआ, इस दौरान विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर रहा. अब यूजीसी नेट के पेपर रद्द होने के बाद भी विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया है और कहा है कि ये छात्रों के साथ धोखा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि गलती एनटीए करता है और सजा अभ्यर्थी भुगतते हैं. 

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