देशभर में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों और कॉलेजों में केवल उन्हीं व्यक्तियों की नियुक्ति की जा सकती है, जो आरटीई एक्ट, एनसीटीई एक्ट और यूजीसी एक्ट के तहत निर्धारित शैक्षणिक एवं पेशेवर योग्यताओं को पूरा करते हों. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बिना निर्धारित योग्यता वाले शिक्षकों को न तो नियुक्त किया जा सकता है और न ही उन्हें सेवा में बनाए रखा जा सकता है. यह आदेश शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के प्रोविन्सियलाइजेशन से जुड़ी योजनाओं को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी मामले में अंतरिम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा कि फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर केवल वही व्यक्ति शिक्षक के रूप में नियुक्त किए जाएं, जो राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) एक्ट और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) एक्ट के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यताएं रखते हों.
-
परजीवी, बोझ, फेल प्रोडक्ट... NDTV World Summit में PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा -
PM Modi in NDTV World Summit : बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की क्या भूमिका? PM मोदी ने बताया -
PM Modi Speech: Rahul Gandhi पर PM मोदी क्या-क्या बोले? | NDTV World Summit 2026 -
फेल प्रोडक्ट लॉन्च कर रही कांग्रेस, इतनी तो लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती; NDTV वर्ल्ड समिट में PM मोदी -
NDTV World Summit के मंच से कौन से नए खेल का जिक्र कर गए मोदी...! -
'मत्स्य न्याय' के उदाहरण से पीएम मोदी ने UN पर क्या कुछ कह दिया? -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिका में शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के अन्य कर्मचारियों के प्रोविन्सियलाइजेशन से संबंधित वैधानिक योजनाओं को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि इन योजनाओं के माध्यम से कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित सरकारी सेवा में शामिल करने का रास्ता मिल जाता है, जबकि वे सामान्य भर्ती प्रक्रिया से नहीं गुजरते.
भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल
याचिका में कहा गया है कि ऐसी योजनाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत हैं. इसके जरिए कुछ लोगों को बिना नियमित चयन प्रक्रिया के सरकारी सेवा का लाभ मिल सकता है. याचिकाकर्ताओं ने इन योजनाओं की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाया है.
नोटिस जारी, नियुक्तियों पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही अदालत ने अंतरिम तौर पर साफ कर दिया है कि निर्धारित योग्यता के बिना किसी भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की जाएगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे शिक्षकों को सेवा में बनाए रखने की अनुमति भी फिलहाल नहीं होगी, यदि वे संबंधित कानूनों के तहत तय योग्यताओं को पूरा नहीं करते हैं.
यह भी पढ़ें : यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों के लिए गुड न्यूज, सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने की डेडलाइन 1 साल बढ़ाई
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं