जिंदगी में थोड़ी सी परेशानी आने से ही कुछ लोग हार मान लेते हैं, लेकिन चेन्नई के 17 साल के संतोष ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो लाखों लोगों और छात्रों के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं है. चेन्नई के 17 साल के संतोष ने 90% स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी और जन्मजात सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी को मात देते हुए IIT मद्रास के 'BS इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशन्स' प्रोग्राम में एडमिशन लिया है. ऑटो चालक के बेटे इस खास IITian के मन में वो सपने हैं, जिन्हें वो पूरा करना चाहता है और दुनिया को दिखाना चाहता है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है.
स्कूल ट्रिप छूटने से आंखों में आ गए थे आंसू
पिछले साल संतोष के साथ पढ़ने वाले कक्षा 12वीं के सभी छात्र स्कूल की तरफ से IIT मद्रास के कैंपस ट्रिप पर गए थे, तब अपनी शारीरिक स्थिति के चलते संतोष उस ट्रिप पर नहीं जा पाए थे. वो अपनी क्लास में अकेले ऐसे छात्र थे, जो घर पर ही रहे और इस वजह से उनकी आंखों में आंसू आ गए थे. अब ठीक एक साल बाद उसी आईआईटी कैंपस में संतोष ने एडमिशन ले लिया है और अब वो उस दिन को याद करके खुश होते हैं.
Dreams don't always follow an easy path — but determination can take you where you aspire to be.
— IIT Madras (@iitmadras) September 2, 2026
As reported in The Times of India, 17-year-old J Santhosh, who has 90% spinal muscular disability and cerebral palsy since birth, has secured admission to IIT Madras' four-year BS… pic.twitter.com/y89tCIqJRL
ऑटो चालक के बेटे की लगन और संघर्ष
एक ऑटो-रिक्शा चालक के बेटे संतोष ने दो हफ्ते पहले अपने दूसरे अटेंप्ट में IIT मद्रास की क्वालीफायर परीक्षा पास की है. वो सितंबर 2026 के तीसरे हफ्ते से डेटा साइंस और एप्लिकेशन्स का 4 साल का डिग्री कोर्स शुरू करने जा रहे हैं. अपनी इस इचीवमेंट पर संतोष ने कहा, "मैं एक ऐसा कोर्स करना चाहता था जिसे घर बैठकर पूरा कर सकूं. रेगुलर इंजीनियरिंग कोर्स में रोजाना कॉलेज जाना जरूरी होता है, जो मेरे लिए शारीरिक रूप से बहुत कठिन था. वहीं Correspondence वाले कोर्स काफी महंगे थे. पिछले साल जब एनजीओ TN Volunteers हमारे स्कूल आया, तब मुझे IIT मद्रास के इस ऑनलाइन प्रोग्राम के बारे में पता चला."
क्या है IIT मद्रास का ये प्रोग्राम?
IIT मद्रास का ये प्रोग्राम संस्थान की 'सेंटर फॉर आउटरीच एंड डिजिटल एजुकेशन' (CODE) पहल का हिस्सा है. इस कोर्स में छात्र घर बैठे ऑनलाइन लेक्चर्स और स्टडी मैटेरियल के जरिए पढ़ाई कर सकते हैं. हालांकि, क्विज और परीक्षाओं के लिए छात्रों को परीक्षा केंद्र पर मौजूद होना पड़ता है. संतोष की पहले साल की फीस एनजीओ की तरफ से दी जाएगी. इसके अलावा यही संस्था संतोष को शुरुआती दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्निकल ट्रेनिंग में मदद कर रही है.
IIT मद्रास के प्रोफेसर एंड्रयू थंगराज ने बताया कि ये डिजिटल प्रोग्राम उन छात्रों के लिए बनाया गया है जो किसी शारीरिक, वित्तीय या भौगोलिक बाधाओं के कारण रेगुलर कॉलेज नहीं जा सकते. इससे पहले भी कई दिव्यांग छात्र ये कोर्स पूरा करके नामी कंपनियों में नौकरी हासिल कर चुके हैं.
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