NEET UG Paper Leak 2206 : नीट यूजी पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि परीक्षा में अनुचित साधनों और पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लाया गया है. केंद्र ने कहा कि यह संशोधन मौजूदा 2024 के कानून को और सख्त बनाता है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करता है. केंद्र ने अपने अनुपालन हलफनामे में दो बड़े कदमों का उल्लेख किया है.
पेपर लीक और नकल पर कड़ा कानून
संशोधित कानून के तहत परीक्षा में धोखाधड़ी, पेपर लीक और संगठित गड़बड़ी करने वालों के लिए सजा और जुर्माने को बढ़ाने का प्रस्ताव है.
मुख्य प्रावधान हैं
व्यक्तिगत स्तर पर नकल या अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर अब 5 से 10 साल तक की जेल का प्रावधान होगा. ऐसे मामलों में 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा.
संगठित तरीके से पेपर लीक या बड़े स्तर पर परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए कम से कम 7 साल की सजा और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है. सार्वजनिक परीक्षाओं से प्रतिबंध की अवधि को 4 साल से बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव है.
परीक्षा सुधार टास्क फोर्स
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाई गई है. यह समिति NTA और NEET जैसी सार्वजनिक परीक्षाओं में तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश करेगी. समिति की रिपोर्ट तीन महीने में आने की उम्मीद है
NEET-UG परीक्षा सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
केंद्र ने बताया कि परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है:
- प्रश्नपत्रों के कई सेट अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर तैयार किए गए
- प्रश्नपत्रों की पैकिंग में छह स्तर की छेड़छाड़-रोधी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई
- QR कोड और आधार आधारित ट्रैकिंग से प्रश्नपत्र बॉक्स की निगरानी की गई
- 21 जून को दोबारा आयोजित NEET-UG परीक्षा के लिए केंद्र के अनुसार 51,311 जैमर लगाए गए
- 1.38 लाख CCTV कैमरों से निगरानी की गई
- 87,000 कर्मचारियों को फ्रिस्किंग और बायोमेट्रिक जांच के लिए लगाया गया
NEET-UG में CBT मोड पर विचार
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET-UG अभी भी NTA की प्रमुख परीक्षाओं में एकमात्र ऐसी परीक्षा है जो पेन-पेपर मोड में होती है. कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलाव पर विचार चल रहा है, लेकिन अंतिम फैसला नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा.
पेपर लीक मामलों में तेज जांच और सुनवाई
प्रस्तावित व्यवस्था में तेज कार्रवाई के लिए भी प्रावधान किए गए हैं:
- जांच एजेंसियों को मामला दर्ज होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करनी होंगी
- आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मामलों की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है
- केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर विशेष जांच टास्क फोर्स बना सकती है या जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप सकती है
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन कानूनी और तकनीकी सुधारों का उद्देश्य NEET-UG समेत सभी सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और पेपर लीक से मुक्त बनाना है.
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