झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से शुरू हुआ बवाल अब राज्य में हुई तमाम परीक्षाओं तक जा पहुंचा है, हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर हैं और पिछले कुछ सालों में हुई परीक्षाओं की जांच की मांग कर रहे हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का चेहरा जैसे सोनम वांगचुक बन गए थे, वैसे ही झारखंड के इस छात्र आंदोलन का चेहरा देवेंद्र महतो बने हैं, जिन्हें झारखंड का वांगचुक कहा जा रहा है. महतो पिछले कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और पानी भी नहीं पी रहे थे, हालांकि सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद उन्होंने पानी लेना शुरू कर दिया है. इस पूरे मामले को लेकर महतो ने एनडीटीवी से खास बातचीत की.
महतो ने बताया वांगचुक से क्या हुई बात
NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में महतो ने कहा कि "सोनम वांगचुक से हम प्रेरणा लेते हैं, उन्हीं को देखते हुए मैंने भूख हड़ताल शुरू की थी. उन्होंने मुझे वीडियो कॉल किया और कहा कि आप कम से कम पानी पी लीजिए. इसके बाद हमने उन्हें बताया कि दिल्ली वाला प्रोटेस्ट और झारखंड वाला प्रोटेस्ट अलग है. हालांकि वो नहीं माने और उन्होंने कहा कि वीडियो कॉल के दौरान ही मैं पानी पी लूं. मैंने उनसे कहा कि मैं तभी जल ग्रहण करूंगा, जब आप मुझसे ये वादा करेंगे कि झारखंड के इस छात्र प्रदर्शन को सफल बनाने में आप हमारी मदद करेंगे. हमने उन्हें रांची आने के लिए भी आग्रह किया है. इस पर उन्होंने कहा कि मेरी तबीयत ठीक हो रही है, जैसे ही तबीयत सही रहेगी, मैं वहां पहुंच जाऊंगा."
डॉक्टरों ने बताया जान का खतरा
महतो ने कहा कि, हमारी भूख हड़ताल जारी रहेगी. आज से हम जल लेंगे, लेकिन अन्न नहीं लेंगे. डॉक्टर ने मुझे एडमिट होने की सलाह दी है, उन्होंने कहा है कि आपको जान का भी खतरा है. दो अगस्त से मैंने कुछ भी खाया-पिया नहीं है. सरकार ने ब्लैक लिस्टेड एजेंसी से परीक्षा करवाई है. सरकार ने अब तक परीक्षा को रद्द नहीं किया है. इसलिए मुझे ये सब करना पड़ रहा है.
कौन हैं देवेंद्र महतो?
देवेंद्र नाथ महतो खुद को एक छात्र नेता और सोशल वर्कर बताते हैं. महतो श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी से संस्कृत में ग्रेजुएट हैं और इसके बाद उन्होंने बीएड भी किया. पढ़ाई में वो काफी तेज थे और स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर बार फर्स्ट डिवीजन से पास हुए. पिछले करीब 10 सालों से वो छात्रों की आवाज उठा रहे हैं और हर बार झारखंड में तमाम परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर सड़कों पर उतरे. इसके चलते उनके खिलाफ कई पुलिस केस भी चल रहे हैं. झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (JSSC)-CGL परीक्षा को भी उनके नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद रद्द किया गया था.
महतो ने 2024 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, इसके बाद इसी साल उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा. हालांकि दोनों बार वो तीसरे स्थान पर रहे.
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