दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी एडमिशन को लेकर हुए बवाल के बाद इंटरव्यू नोटिफिकेशन वापस लिया गया है. इसी बीच अब जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में भी पीएचडी एडमिशन पर विवाद शुरू हो गया है. स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने पीएचडी एडमिशन में आरक्षण के नियमों को लागू करने में गड़बड़ी की है. एसएफआई ने तुरंत इसमें सुधार करने की मांग की है. छात्र संगठन ने दावा किया है कि उनकी शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने संज्ञान लिया है.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसएफआई नेताओं बृंदा करात,देबलीना हेम्ब्रम और जेएनयूएसयू उपाध्यक्ष गोपिका बाबू समेत कई ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रॉस्पेक्टस में अनुसूचित जाति (SC),अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवारों के लिए तय कोटे के मुताबिक सीटें नहीं दी गई हैं.
JNU के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया
संगठन ने बताया कि एनसीएससी ने 29 सितंबर को शिकायत दर्ज की थी. जिसके बाद इस पर कार्रवाई करते हुए 8 अक्टूबर को जेएनयू के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया था. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 अक्टूबर की डेडलाइन तक यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला था. जिसके बाद आयोग ने 27 अक्टूबर को एक और अल्टीमेटम जारी कर 7 दिन के भीतर जवाब मांगा है. एसएफआई का यह भी कहना है कि एनसीएसटी (NCST)ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है.
सीटों अलॉटमेंट को लेकर गड़बड़ी का आरोप
एसएफआई का आरोप है कि जेएनयू ने तीन चैनलों (UGC-NET, UGC-NET-JRF और GATE) के जरिए कुल 711 रेगुलर सीटें निकाली हैं. संगठन के मुताबिक, एसटी (ST) उम्मीदवार:7.5% आरक्षण नियम के हिसाब से कम से कम 53 सीटें होनी चाहिए थीं, जबकि प्रॉस्पेक्टस में सिर्फ 38 सीटें ही दिखाई गईं यानी करीब 15 सीटों पर गड़बड़ी की गई है. वहीं एससी (SC) उम्मीदवार की बात करें तो 15% आरक्षण के तहत करीब 107 सीटें बनती हैं जबकि प्रॉस्पेक्टस में 103 सीटें ही अलॉट की हैं. दिव्यांग (PwBD) उम्मीदवार की करीब 36 सीटों के मुकाबले प्रॉस्पेक्टस में सिर्फ 17 सीटें ही आरक्षित की गईं.
एसएफआई ने इन गड़बड़ियों के पीछे की वजह माइक्रो-यूनिट सीट-अलॉटमेंट के तरीके को बताया है. इसके तहत आरक्षण का प्रतिशत यूनिवर्सिटी के अलग-अलग सेंटर्स और सब-डिसिप्लिन पर अलग से लागू किया जाता है. जहां सीटों की संख्या पहले से ही बहुत कम होती है. संगठन का दावा है कि NET, NET-JRF और GATE चैनलों में सीटें बंटने की वजह से कई सेंटर्स पर एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए एक भी सीट नहीं बची है. मौजूदा एडमिशन साइकल में ऐसे 29 सेंटर सामने आए हैं जहां एससी और एसटी दोनों कैटेगरी के लिए जीरो सीटें आरक्षित की गईं.
आरटीआई दायर करके मांगी जानकारी
छात्र संगठन एसएफआई ने पिछले सालों में आरक्षित खाली सीटों को डी-रिजर्व (खाली छोड़ने या सामान्य करने) करने पर भी चिंता जताई. एसएफआई ने 23 सितंबर को आरटीआई दाखिल की थी जिसमें उन्होंने 2025-26 सेशन के पीएचडी एडमिशन की जानकारी मांगी थी लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे बहुत लंबी और भारी-भरकम जानकारी बता दिया था.
संगठन की ये है मांग
छात्र संगठन ने मांग की है कि यूनिवर्सिटी में चल रहे 2026-27 एडमिशन प्रोसेस में आरक्षण की इस कमी को तुरंत ठीक करे. एसएफआई ने कहा कि अगर यूनिवर्सिटी वाइवा-वाइसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है तो उसे पिछली खाली सीटों को भरने के लिए तुरंत एक स्पेशल ड्राइव चलानी चाहिए. या फिर जब तक सही आरक्षित सीटों का विज्ञापन न आ जाए तब तक एडमिशन प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए.
यह भी पढ़ें | नोएडा के चार सबसे महंगे स्कूल, कई लोगों की सैलरी के बराबर है एक महीने की फीस
यह भी पढ़ें | कल शाम आया नोटिफिकेशन, आज सुबह इंटरव्यू; DU में PhD एडमिशन को लेकर बवाल
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं