दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव को लेकर इस बार काफी चर्चा रही. जेन जी आंदोलन और सत्य निकेतन हादसे के बाद माना जा रहा था कि सत्ता विरोधी माहौल का असर छात्र राजनीति पर भी पड़ सकता है. हालांकि चुनावी तस्वीर अब कुछ अलग दिखाई दे रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ABVP को सबसे ज्यादा फायदा विपक्षी खेमे में बढ़ी अंदरूनी खींचतान से मिल सकता है.
NSUI के बागी उम्मीदवारों ने बढ़ाई चुनौती
चार प्रमुख पदों में से तीन पर NSUI के बागी उम्मीदवार मैदान में उतर आए हैं. अध्यक्ष पद पर समर्थ बेनीवाल, उपाध्यक्ष पद पर हिमांशु शौकीन और सह सचिव पद पर विशेष यादव चुनाव लड़ रहे हैं. इन उम्मीदवारों की मौजूदगी से NSUI का पारंपरिक वोट बैंक बंटने की आशंका बढ़ गई है. यही वजह है कि ABVP के लिए मुकाबला पहले की तुलना में अधिक सहज दिखाई दे रहा है.
सामाजिक प्रयोग पर NSUI का दांव
NSUI ने इस बार अध्यक्ष पद के लिए आदिवासी समाज से आने वाले छात्र नेता विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया है. संगठन इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है. वहीं उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार वीर चतरथ भी चर्चा में हैं. उनके पिता मनीष चतरथ कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं.
सचिव पद पर रोचक मुकाबले की उम्मीद
सचिव पद पर मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है. ABVP और NSUI दोनों ने महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. छात्र राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि इस सीट पर दोनों संगठनों के बीच कड़ा और नजदीकी मुकाबला देखने को मिल सकता है. चुनाव प्रचार तेज होने के साथ अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NSUI की अंदरूनी बगावत ABVP को सीधा फायदा पहुंचाएगी या फिर संगठन अपने वोटों को एकजुट रखने में सफल रहेगा.
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