
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम से आम लोग तो छोड़िए, हाईकोर्ट के जज भी परेशान हैं। दिल्ली के जाम को देख कर जज ने आखिरकार ट्रैफिक पुलिस पर जमकर सवाल दागे और बताया कि जाम को देखकर वह भी चिंतित हैं।
ट्रैफिक जाम के कारण अरबों रुपये बर्बाद हो रहे हैं
जस्टिस बीडी अहमद ने कहा कि आप यह कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि हाईकोर्ट के एक जस्टिस को कैसा लगता होगा, जब वह देखता है कि उसके द्वारा पास किए आदेश को लागू नहीं किया जा रहा है। जस्टिस अहमद ने कहा कि वह ट्रैफिक के प्रबंध को लेकर आदेश दे चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रैफिक जाम के कारण शहर में अरबों रुपये का नुकसान हो रहा है और वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। जस्टिस बीडी अहमद और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने ट्रैफिक के स्पेशल पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह खुद देंखे और कोर्ट का आदेश लागू करवाएं।
सुबह 11 बजे से पहले क्यों चालान नहीं करती पुलिस?
हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी अहमद ने कहा कि वह खुद साढ़े दस बजे कोर्ट आ रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि राष्ट्रपति भवन के पास लोग ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। जब उन्होंने एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी से इस बारे में पूछा कि गलत तरीके से कार चलाने वालों के खिलाफ वह क्यों कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो उसने कहा कि वह सुबह 11 बजे से पहले चालान नहीं करते हैं। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अहमद ने ट्रैफिक पुलिस की चालान की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस के वकील से पूछा कि यह किस तरह का ट्रैफिक प्रबंधन है, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों का तब चालान किया जाता है, जब ट्रैफिक कम होता है, ना कि तब जब ट्रैफिक जाम होता है।
ट्रैफिक पुलिस में नियुक्त हों इंटेलीजेंट लोग
हाईकोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई पर पुलिस ने कहा था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों का चालान किया जाएगा और उनके खिलाफ केस दर्ज होंगे, लेकिन जमीन पर कुछ होता नहीं दिख रहा। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक विभाग में कुछ सोच होनी चाहिए, ताकि अच्छे से ट्रैफिक मैनेज हो सके। इसलिए विभाग में इंटेलीजेंट लोग नियुक्त किए जाने चाहिए।
ट्रैफिक की वजह से दुखी हो रहे हैं लोग
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक जाम भारत के शहरों के लिए नया नहीं है। मुंबई में हालांकि बेहतर तरीके से ट्रैफिक का प्रबंध किया गया है। दिल्ली की सड़कों पर कार में चलने वाले लोग जाम के कारण इतने कुंठित हो जाते हैं कि दफ्तर पहुंचते ही वह अपने सहकर्मियों से झगड़ा शुरू कर देते हैं।
आक्सीजन की जगह जहर उगलने लगे हैं कुछ पेड़
वहीं दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने कोर्ट को बताया कि कुछ पेड़ इतने पुराने हो गए है, जिनसे अब आक्सीजन की बजाय जहरीली गैस निकल रही है। इन पेड़ों को हटाकर नए पेड़ लगाने की जरूरत है। जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या उनके पास इस तरह की कोई योजना है। साथ ही पूछा है कि क्या यह बयान किसी वैज्ञानिक आधार पर दिया गया है। वहीं वन विभाग की तरफ से पेड़ लगाने के संबंध में दायर किए गए हलफनामे पर जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे ज्यादा ग्रीन मेरा लॉन होगा।
ट्रैफिक जाम के कारण अरबों रुपये बर्बाद हो रहे हैं
जस्टिस बीडी अहमद ने कहा कि आप यह कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि हाईकोर्ट के एक जस्टिस को कैसा लगता होगा, जब वह देखता है कि उसके द्वारा पास किए आदेश को लागू नहीं किया जा रहा है। जस्टिस अहमद ने कहा कि वह ट्रैफिक के प्रबंध को लेकर आदेश दे चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रैफिक जाम के कारण शहर में अरबों रुपये का नुकसान हो रहा है और वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। जस्टिस बीडी अहमद और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने ट्रैफिक के स्पेशल पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह खुद देंखे और कोर्ट का आदेश लागू करवाएं।
सुबह 11 बजे से पहले क्यों चालान नहीं करती पुलिस?
हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी अहमद ने कहा कि वह खुद साढ़े दस बजे कोर्ट आ रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि राष्ट्रपति भवन के पास लोग ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। जब उन्होंने एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी से इस बारे में पूछा कि गलत तरीके से कार चलाने वालों के खिलाफ वह क्यों कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो उसने कहा कि वह सुबह 11 बजे से पहले चालान नहीं करते हैं। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अहमद ने ट्रैफिक पुलिस की चालान की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस के वकील से पूछा कि यह किस तरह का ट्रैफिक प्रबंधन है, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों का तब चालान किया जाता है, जब ट्रैफिक कम होता है, ना कि तब जब ट्रैफिक जाम होता है।
ट्रैफिक पुलिस में नियुक्त हों इंटेलीजेंट लोग
हाईकोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई पर पुलिस ने कहा था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों का चालान किया जाएगा और उनके खिलाफ केस दर्ज होंगे, लेकिन जमीन पर कुछ होता नहीं दिख रहा। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक विभाग में कुछ सोच होनी चाहिए, ताकि अच्छे से ट्रैफिक मैनेज हो सके। इसलिए विभाग में इंटेलीजेंट लोग नियुक्त किए जाने चाहिए।
ट्रैफिक की वजह से दुखी हो रहे हैं लोग
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक जाम भारत के शहरों के लिए नया नहीं है। मुंबई में हालांकि बेहतर तरीके से ट्रैफिक का प्रबंध किया गया है। दिल्ली की सड़कों पर कार में चलने वाले लोग जाम के कारण इतने कुंठित हो जाते हैं कि दफ्तर पहुंचते ही वह अपने सहकर्मियों से झगड़ा शुरू कर देते हैं।
आक्सीजन की जगह जहर उगलने लगे हैं कुछ पेड़
वहीं दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने कोर्ट को बताया कि कुछ पेड़ इतने पुराने हो गए है, जिनसे अब आक्सीजन की बजाय जहरीली गैस निकल रही है। इन पेड़ों को हटाकर नए पेड़ लगाने की जरूरत है। जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या उनके पास इस तरह की कोई योजना है। साथ ही पूछा है कि क्या यह बयान किसी वैज्ञानिक आधार पर दिया गया है। वहीं वन विभाग की तरफ से पेड़ लगाने के संबंध में दायर किए गए हलफनामे पर जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे ज्यादा ग्रीन मेरा लॉन होगा।
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