
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
दिल्ली में 15 हजार गेस्ट टीचरों की नौकरी पक्की करने का मामला फंस गया है. उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वे गेस्ट टीचर को पक्का करने के लिए लाए जा रहे बिल पर पुनर्विचार करें, क्योंकि ये मामला उनके या दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आता. पिछले हफ्ते ही केजरीवाल कैबिनेट ने अचानक इस फैसले पर मुहर लगा दी कि दिल्ली में करीब 17 हजार गेस्ट टीचर में से 15 हजार की नौकरी पक्की की जाएगी. बुधवार को दिल्ली विधानसभा में इसके लिए बिल लाने के लिए विशेष सत्र भी बुलाया गया. राजनिवास यानी उपराज्यपाल निवास की और से भेजी गई प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 'एलजी अनिल बैजल ने सीएम अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर निवेदन किया है कि वो Regularization of Services of Guest Teachers and Teachers engaged under the ‘Sarv Shiksha Abhiyan’ Bill, 2017’ पर पुनर्विचार करें. इसमें कहा गया है कि ये 'सर्विसेज' का मामला है और ये विषय दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आता, इसलिए ये संवैधानिक नहीं है.
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ऐसे में एक बात साफ हो गई है कि जो आशंका पहले दिन से जताई जा रही थी कि ये मामला शायद ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाएगा, वो सही हो गई है. केजरीवाल सरकार ने इस मामले को अचानक कैबिनेट में लाकर पास कर दिया था, जबकि पारंपरिक तौर पर इस तरह का फैसला लेने से पहले शिक्षा विभाग, वित्त, सर्विसेज, कानून आदि विभाग की राय लेकर और एलजी से मंज़ूरी लेकर ही इस तरह का मामला कैबिनेट में लाकर उसे पास किया जाता है.
VIDEO : केजरीवाल-एलजी में फिर टकराव का दौर
सवाल अब ये उठ रहा है कि क्या दिल्ली सरकार ने इस मामले में जल्दबाज़ी की? या आप सरकार इस तरह बिल लाकर विपक्ष पर ठीकरा फोड़ना चाहती थी कि विपक्ष गेस्ट टीचरों की नौकरी पक्की नहीं होने देना चाहता? और सबसे बड़ा सवाल जब एलजी ने बिल को असंवैधानिक बोल दिया दिया है तो ऐसे में अब विधानसभा में बिल लाने से क्या होगा? क्या अब भी आप सरकार विधानसभा में बुधवार को बिल लाएगी?
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ऐसे में एक बात साफ हो गई है कि जो आशंका पहले दिन से जताई जा रही थी कि ये मामला शायद ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाएगा, वो सही हो गई है. केजरीवाल सरकार ने इस मामले को अचानक कैबिनेट में लाकर पास कर दिया था, जबकि पारंपरिक तौर पर इस तरह का फैसला लेने से पहले शिक्षा विभाग, वित्त, सर्विसेज, कानून आदि विभाग की राय लेकर और एलजी से मंज़ूरी लेकर ही इस तरह का मामला कैबिनेट में लाकर उसे पास किया जाता है.
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सवाल अब ये उठ रहा है कि क्या दिल्ली सरकार ने इस मामले में जल्दबाज़ी की? या आप सरकार इस तरह बिल लाकर विपक्ष पर ठीकरा फोड़ना चाहती थी कि विपक्ष गेस्ट टीचरों की नौकरी पक्की नहीं होने देना चाहता? और सबसे बड़ा सवाल जब एलजी ने बिल को असंवैधानिक बोल दिया दिया है तो ऐसे में अब विधानसभा में बिल लाने से क्या होगा? क्या अब भी आप सरकार विधानसभा में बुधवार को बिल लाएगी?
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