शकुंतला ग्रेजुएट हैं और सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रही हैं.
नई दिल्ली:
नोटबंदी के बाद रोज कुछ न कुछ खबर आ रही है. कहीं लोग रात से कतार में खड़े हैं तो कहीं कैश न होने की वजह अस्पताल में इलाज़ नहीं हो पा रहा है. कई लोगों के पास बैंक एकाउंट और पोस्ट ऑफिस में खाते न होने की वजह से भी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा रहा है. कई जगह ऐसी भी है जहाँ कई लाख लोगों के लिए सिर्फ एक बैंक है. आज एनडीटीवी की टीम दिल्ली के नज़दीक गाज़ियाबाद के खोड़ा गांव में पहुंची. इस गांव के कई लाख लोगों के लिए सिर्फ एक ही बैंक है वह भारतीय स्टेट बैंक. इस बैंक के सामने आज काफी भीड़ देखने को मिली.सबसे ज्यादा महिलाएं कतार में खड़ी हुई थीं. कई महिलाओं ने अपनी समस्या बताई. किसी को कैंसर है तो किसी के घर में खाने-पीने का सामान नहीं है. किसी को अपनी बेटी की शादी करने के लिए पैसा उठाना है तो कोई अपना काम छोड़कर पैसा लेने आई है. चलिए आज आपको कुछ ऐसे महिलाओं से मिला रहे हैं जो अपनी किसी न किसी समस्या को लेकर परेशान है.
शकुंतला का किस्सा
फिर शकुंतला से बात हुई, शुकंतला कतार से थोड़ा हटकर खड़ी हुई थीं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कतार में नहीं हैं तो शकुंतला का कहना था कि यहां सब महिलाएं एक-दूसरे की मदद कर रही हैं. कौन कहां पर खड़ा है सबको पता है. महिलाएं झगड़ा नहीं करती हैं. शकुंतला पढ़ी लिखी हैं, ग्रेजुएट हैं. सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी कर रही हैं. शकुंतला कह रही हैं प्रधानमंत्री सब कुछ खुद नहीं कर सकते हैं. नीचे स्तर के अफसर को भी काम करना चाहिए. पति काम पर चले जाते हैं इसीलिए शकुंतला को कतार में खड़े होना पड़ रहा है लेकिन पैसा नहीं ले पा रही हैं, इसीलिए परेशान भी हैं. शकुंतला तीन दिन तक कतार में खड़े होने के लिए आई थीं. लंबी कतार देखकर भाग गई थीं. कल कतार में खड़ी रहीं लेकिन नंबर नहीं आया, फिर आज से सुबह से खड़ी हुई हैं लेकिन करीब चार बजे तक नंबर नहीं आया.
कैंसर से पीड़ित अकीला कतार में लगने को मजबूर
अकीला देवी के आंखों में आंसू थे. करीब 60 साल की यह बुजुर्ग महिला सुबह से कतार में खड़ी है. कतार में करीब आठ घंटे खड़े होने के बावजूद तीन बजे तक नंबर नहीं आया. अकीला के आगे और भी कई लोग खड़े हुए थे. अकीला को दो साल से कैंसर है, मेडिसिन खा रही हैं. अब मेडिसिन ख़त्म हो गई है और पास में पैसा नहीं है.

कैसे दवा ख़रीदें समझ नहीं आ रहा है. अकीला का कहना है कि सुबह से कतार में खड़े होने की वजह से सिर में दर्द होने लगा है लेकिन मजबूर हैं, घर नहीं जा सकतीं नहीं तो फिर कल दोबारा कतार में खड़ा होना पड़ेगा.
बेसहारा मंजू और शबाना का कोई नहीं सहारा
यह है मंजू. मंजू का अपना घर भी नहीं है वह बाहर कहीं तंबू लगा के रह रही हैं. मंजू के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं. सबसे बड़ा बेटे की उम्र 12 साल है. कुछ साल पहले पति का देहांत हो गया है. मंजू सीमेंट ढोने का काम करती है और रोज 200 रुपये कमा लेती है. मंजू के पास एटीएम कार्ड नहीं है लेकिन पास-बुक है. मंजू पास-बुक के जरिए बैंक से पैसा लेने आई है. मंजू का कहना है कि वह सुबह से कतार में खड़ी है, लेकिन करीब चार बजे तक पैसा नहीं ले पाई है. मंजू इसीलिए भी परेशान है कि उसकी एक दिन की मजदूरी खराब हो गई, 200 रुपये का नुकसान हो गया.
मंजू के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं
कतार के अंत में एक मुस्लिम महिला खड़ी हुई मिली. उसे पता चला कि हम मीडिया से हैं तो हमारे पास भाग कर आई. वह अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर आई थी. शबाना का कहना है घर में खाने पीने का करीब सभी सामान खत्म हो गया है. पांच बच्चे हैं, तीन बेटे और दो बेटी. कुछ साल पहले पति का देहांत हो चुका है. पति के देहांत के बाद बच्चों को नहीं पढ़ा पाई. सिर्फ एक बेटा पढ़ रहा है. बड़ा बेटा मस्जिद में काम करता है, महीने में कुछ पैसा कमा लेता है.
नीलम के हाथ में परचा, लेकिन नंबर नहीं आ रहा
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली नीलम कई सालों से खोड़ा गांव में रह रही है. तीन दिन से हर रोज कतार में खड़ी होती हैं लेकिन बैंक से पैसा निकालने का मौका नहीं मिला पाया है. नीलम का कहना कि आज सुबह जब कतार में खड़े होने पहुंचे तो उनके हाथ में एक पर्ची पकड़ा दी गई. उनकी पर्ची नंबर 141 था, यानी जब वह सुबह पहुंची तब उनसे पहले 140 लोग कतार में खड़े हो गए थे. जैसे-जैसे वक्त़ गुजर रहा था नीलम के चेहरे पर तनाव साफ़ दिखाई दे रहा था. वह बार-बार यही कहकर परेशान हो रही थी कि चार बजने वाला हैं बैंक बंद हो जाएगा, फिर आज भी कैश नहीं मिलेगा. नीलम का कहना है कि घर में ज्यादा पैसा नहीं है. खाने पीने का सामान खरीदने में दिक्कतें हो रही हैं.
कैसे होगी पुष्पा की बेटी की शादी
पुष्पा नेगी उत्तराखंड की रहने वाली हैं और सुबह छह बजे से कतार में खड़ी हुई हैं. कल भी कतार में खड़ीं थीं लेकिन पैसा नहीं ले पाईं. पुष्पा अपने बेटी ज्योति को भी अपने साथ लेकर आई हैं.

पुष्पा इस बातों को लेकर ज्यादा परेशान हैं कि उसकी बेटी ज्योति की एक दिसम्बर को शादी है. घर में ज्यादा कैश नहीं है. शादी का सामान भी नहीं खरीदा गया है. पुष्पा का कहना है कि अगर पास में कैश नहीं होगा तो शादी कर पाना मुश्किल होगा.
शकुंतला का किस्सा
फिर शकुंतला से बात हुई, शुकंतला कतार से थोड़ा हटकर खड़ी हुई थीं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कतार में नहीं हैं तो शकुंतला का कहना था कि यहां सब महिलाएं एक-दूसरे की मदद कर रही हैं. कौन कहां पर खड़ा है सबको पता है. महिलाएं झगड़ा नहीं करती हैं. शकुंतला पढ़ी लिखी हैं, ग्रेजुएट हैं. सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी कर रही हैं. शकुंतला कह रही हैं प्रधानमंत्री सब कुछ खुद नहीं कर सकते हैं. नीचे स्तर के अफसर को भी काम करना चाहिए. पति काम पर चले जाते हैं इसीलिए शकुंतला को कतार में खड़े होना पड़ रहा है लेकिन पैसा नहीं ले पा रही हैं, इसीलिए परेशान भी हैं. शकुंतला तीन दिन तक कतार में खड़े होने के लिए आई थीं. लंबी कतार देखकर भाग गई थीं. कल कतार में खड़ी रहीं लेकिन नंबर नहीं आया, फिर आज से सुबह से खड़ी हुई हैं लेकिन करीब चार बजे तक नंबर नहीं आया.
कैंसर से पीड़ित अकीला कतार में लगने को मजबूर
अकीला देवी के आंखों में आंसू थे. करीब 60 साल की यह बुजुर्ग महिला सुबह से कतार में खड़ी है. कतार में करीब आठ घंटे खड़े होने के बावजूद तीन बजे तक नंबर नहीं आया. अकीला के आगे और भी कई लोग खड़े हुए थे. अकीला को दो साल से कैंसर है, मेडिसिन खा रही हैं. अब मेडिसिन ख़त्म हो गई है और पास में पैसा नहीं है.

कैसे दवा ख़रीदें समझ नहीं आ रहा है. अकीला का कहना है कि सुबह से कतार में खड़े होने की वजह से सिर में दर्द होने लगा है लेकिन मजबूर हैं, घर नहीं जा सकतीं नहीं तो फिर कल दोबारा कतार में खड़ा होना पड़ेगा.
बेसहारा मंजू और शबाना का कोई नहीं सहारा
यह है मंजू. मंजू का अपना घर भी नहीं है वह बाहर कहीं तंबू लगा के रह रही हैं. मंजू के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं. सबसे बड़ा बेटे की उम्र 12 साल है. कुछ साल पहले पति का देहांत हो गया है. मंजू सीमेंट ढोने का काम करती है और रोज 200 रुपये कमा लेती है. मंजू के पास एटीएम कार्ड नहीं है लेकिन पास-बुक है. मंजू पास-बुक के जरिए बैंक से पैसा लेने आई है. मंजू का कहना है कि वह सुबह से कतार में खड़ी है, लेकिन करीब चार बजे तक पैसा नहीं ले पाई है. मंजू इसीलिए भी परेशान है कि उसकी एक दिन की मजदूरी खराब हो गई, 200 रुपये का नुकसान हो गया.

कतार के अंत में एक मुस्लिम महिला खड़ी हुई मिली. उसे पता चला कि हम मीडिया से हैं तो हमारे पास भाग कर आई. वह अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर आई थी. शबाना का कहना है घर में खाने पीने का करीब सभी सामान खत्म हो गया है. पांच बच्चे हैं, तीन बेटे और दो बेटी. कुछ साल पहले पति का देहांत हो चुका है. पति के देहांत के बाद बच्चों को नहीं पढ़ा पाई. सिर्फ एक बेटा पढ़ रहा है. बड़ा बेटा मस्जिद में काम करता है, महीने में कुछ पैसा कमा लेता है.
नीलम के हाथ में परचा, लेकिन नंबर नहीं आ रहा
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली नीलम कई सालों से खोड़ा गांव में रह रही है. तीन दिन से हर रोज कतार में खड़ी होती हैं लेकिन बैंक से पैसा निकालने का मौका नहीं मिला पाया है. नीलम का कहना कि आज सुबह जब कतार में खड़े होने पहुंचे तो उनके हाथ में एक पर्ची पकड़ा दी गई. उनकी पर्ची नंबर 141 था, यानी जब वह सुबह पहुंची तब उनसे पहले 140 लोग कतार में खड़े हो गए थे. जैसे-जैसे वक्त़ गुजर रहा था नीलम के चेहरे पर तनाव साफ़ दिखाई दे रहा था. वह बार-बार यही कहकर परेशान हो रही थी कि चार बजने वाला हैं बैंक बंद हो जाएगा, फिर आज भी कैश नहीं मिलेगा. नीलम का कहना है कि घर में ज्यादा पैसा नहीं है. खाने पीने का सामान खरीदने में दिक्कतें हो रही हैं.
कैसे होगी पुष्पा की बेटी की शादी
पुष्पा नेगी उत्तराखंड की रहने वाली हैं और सुबह छह बजे से कतार में खड़ी हुई हैं. कल भी कतार में खड़ीं थीं लेकिन पैसा नहीं ले पाईं. पुष्पा अपने बेटी ज्योति को भी अपने साथ लेकर आई हैं.

पुष्पा इस बातों को लेकर ज्यादा परेशान हैं कि उसकी बेटी ज्योति की एक दिसम्बर को शादी है. घर में ज्यादा कैश नहीं है. शादी का सामान भी नहीं खरीदा गया है. पुष्पा का कहना है कि अगर पास में कैश नहीं होगा तो शादी कर पाना मुश्किल होगा.
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