हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है. हड़ताल का सबसे ज्यादा असर गुरुग्राम में देखने को मिल रहा है, जहां कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है. कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद बुधवार रात 10 बजे से ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिजली संबंधी समस्याएं सामने आने लगीं. बिजली लाइनों में आने वाले फॉल्ट समय पर ठीक नहीं होने से कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली गुल रही.
12 घंटे में 3000 से ज्यादा शिकायतें
बिजली निगम के अनुसार हड़ताल शुरू होने के बाद महज 12 घंटे में 3000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं. रात में करीब 945 शिकायतें मिलीं जबकि सुबह दो घंटे के भीतर 2245 नई शिकायतें पहुंच गईं. ऑनलाइन पोर्टल और कॉल सेंटर पर भी लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं.
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बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ा है. कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ इलाकों में लोगों को अंधेरे में समय बिताना पड़ा जबकि घरों में रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हुए.
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
बिजली निगम के कर्मचारियों की मानें तो अब तक वह सरकार के झूठे आश्वासनों में आकर अपने आंदाेलन को रोक देते थे, लेकिन इस बार वह आरपार की लड़ाई के मूड़ में हैं. अगर तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल के दौरान सरकार बिजली निगम कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों से बात नहीं करती है और निजीकरण के फैसले को रद्द करने के साथ ही कर्मचारियों की लंबित मांगों को नहीं मानती है तो वह इस हड़ताल को अनिश्चितकालीन में परिवर्तित कर देंगे.
कर्मचारियों का कहना है कि इस हड़ताल के दौरान उन्होंने न ताे कोई अपने स्तर पर बिजली आपूर्ति बाधित की है और न ही वह फाल्ट रिपेयर कर रहे हैं. अगर आपातकालीन सेवाओं की लाइनों में कोई फाल्ट आता है तो वह इस दौरान भी फाल्ट ठीक करने के लिए नहीं जाएंगे.
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती और लंबित मांगों पर बातचीत नहीं करती तो 24 अक्टूबर को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी. जरूरत पड़ने पर तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है.
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