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This Article is From Feb 24, 2015

क्यों खेल की दुनिया में चलता है ऑस्ट्रेलिया का सिक्का?

कैनबरा:

वर्ल्डकप की मेज़बानी कर रहे ऑस्ट्रेलिया ने चार बार क्रिकेट का विश्व ख़िताब जीता है। लेकिन, सिर्फ़ क्रिकेट ही नहीं ओलिंपिक खेलों में भी ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन टॉप 10 में बना रहता है। आख़िर ऑस्ट्रेलिया के पास ऐसा क्या है जो उसके एथलीट्स किसी से पीछे नहीं रहते। कैनबरा में बने 'ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स' में इसी सवाल का जवाब मिला।

युवाओं पर शुरू से ही फ़ोकस : 1981 में बना एआईएस दुनिया के टॉप स्पोर्ट्स इंस्टियूट्स में से एक है और इस बात का सबूत भी कि कंगारू देश खेल की दुनिया के सबसे पेशेवर चेहरों से भरपूर क्यों है। एआईएस ने 2012 में 'विनिंग एज' नाम की राष्ट्रीय स्ट्रैटेजी लॉन्च की जिसके लक्ष्य साफ़ हैं। अगले ओलिंपिक और पैरालिंपिक में कम से कम पांच चैम्पियन और सालाना 20 से ज़्यादा वर्ल्ड चैम्पियन्स।

बायोमेकैनिक्स पर ज़ोर : सिर्फ ट्रेनिंग के ज़रिए ही नहीं , एआईएस को जो बात ख़ास बनाती है वो है खेल के साथ विज्ञान का तालमेल। इंस्टिट्यूट में बड़ी तादात में स्पोर्ट्स-साइंट्सिट काम करते हैं जो खिलाड़ी और कोच के लिए तैयारी के मायने बदल देते हैं। बायोमेकैनिक्स का इसमें बड़ा योगदान है।

इस विज्ञान के ज़रिए खिलाड़ियों के शरीर में होने वाली हर एक्टिविटी और मांसपेशियों के संतुलन को समझा जाता है और उसी के बाद उस खिलाड़ी का करियर प्लान किया जाता है। सीनियर फ़िज़िओलोजिस्ट, डेविड मार्टिन ने बताया कि 'हर ऐथलीट हमेशा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता। साल में दो या तीन दिन ऐसे होते हैं, जब वो अपने चरम पर होता है। साइंस के ज़रिए हम ये कोशिश करते हैं कि पूरे साल वो अच्छा प्रदर्शन कर पाए।'

साइंस का साथ देने के लिए यहां टॉप लेवल की तकनीक भी मौजूद है। स्विमिंग पूल को ही लीजिए, तैराकों की स्पीड और तकनीक का आकलन करने के लिए पानी के नीचे हर जगह कैमरे तैनात दिखाई देते हैं, आख़िर दुनिया को ईयन थॉर्प जैसे तैराक ऑस्ट्रेलिया ने ही दिए हैं। एआईएस के एरीना में 5,200 की क्षमता वाला इंडोर स्टेडियम है, जबकि 25,000 सीटों वाला आउटडोर स्टेडियम भी।

इंजरी मैनेजमेंट के लिए पुख़्ता इंतज़ाम : ऑस्ट्रेलिया का फ़ोकस सिर्फ़ टैलेंट को सही ट्रेनिंग देकर बेहतर बनाने पर नहीं है बल्कि इंजरी मैनेजमेंट पर भी है। घायल खिलाड़ियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर का 'हीलिंग प्रोसेस' किया जाता है। और ये ऑस्ट्रेलिया की स्पोर्ट्स साइंस का बड़ा हिस्सा है।

भारत पर भी है नज़र : इन दिनों यहां खा़स ध्यान अपने रेसलिंग को बेहतर बनाने पर है। इसके लिए भारत के साथ कुश्ती के एक्सचेंज प्रोग्राम की तैयारी चल रही है, ताकि ओलिंपिक और कॉमनवेल्थ की कुश्ती में ऑस्ट्रेलिया भी अपनी पहचान बनाए। ऑस्ट्रेलिया को मालूम है कि भारत के पास बड़ी जनसंख्या के साथ-साथ टैलेंट का भी ख़ज़ाना है।

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