नई दिल्ली:
भारत−इंग्लैंड सीरीज के शुरू होने के करीब दो हफ्ते पहले सुनील गावस्कर के एक बयान ने टीम इंडिया और उसके फैन्स को हिलाकर रख दिया है। गावस्कर ने कहा कि मौजूदा टीम पिछले तीन दशकों की सबसे कमजोर भारतीय टीम है।
टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के करियर का यह अब तक का शायद सबसे बड़ा इम्तिहान है। धोनी कहते हैं कि कागज पर हम कमज़ोर हैं। राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास के बाद टीम अलग लगती है लेकिन हम बेहतर हो जाएंगे।
मुंबई में इंडिया−ए और इंग्लैंड-11 के बीच खेला गया मैच ड्रॉ रहा। उससे भी बुरी बात यह है कि टीम की गेंदबाजी को लेकर सवाल बरकरार रहे। इस मैच में भारत की ओर से सबसे ज़्यादा विकेट युवराज सिंह के नाम रहे। युवराज ने मैच में 94 रन देकर पांच विकेट झटके लेकिन, उनका मैच में खेलना तय नहीं नज़र आ रहा है।
कप्तान सुरेश रैना ने मैच में खुद सहित आठ गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया लेकिन, मेहमान टीम ने पहली पारी में 426 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। मैच में मेहमान कप्तान एलिस्टर कुक और समित पटेल ने शतकीय पारियां खेलीं, तो जोनाथन ट्रॉट और मैट प्रायर ने अर्द्धशतक जमाकर भारतीय गेंदबाज़ी को खोखला साबित किया।
एक बात तो तय है कि भारत−इंग्लैंड सीरीज़ में टीम इंडिया की कामयाबी या नाकामी काफ़ी हद तक उसके गेंदबाज़ों के हाथ में होगी। फ़िलहाल ये गेंदबाज़ इंग्लैंड−ए के खिलाफ़ नाकाम नज़र आए। अगर रणजी में भी इनकी रंगत नहीं बदली तो कई दिग्गजों का डर सच साबित हो जाएगा।
2012−13 का रणजी सीज़न शुक्रवार को शुरू होगा और भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए यह वरदान साबित हो सकता है। करीब दस साल बाद रणजी के पहले ही मैच में सचिन तेंदुलकर जौहर आज़माएंगे। रणजी सीज़न का पहला मैच टीम इंडिया के गेंदबाज़ों को परखने का शानदार मौका भी साबित होगा।
करीब सवा साल पहले क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स पर पहले टेस्ट मैच के पहले ही दिन जब कप्तान धोनी अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स राहुल द्रविड़ के हाथों में सौंप कर बॉलिंग क्रीज़ पर आए तो टीम की कमज़ोरी साफ दिखाई देने लगी थी। उसके बाद पहले इंग्लैंड ने और फिर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 0−4 से पीटा और टीम इंडिया का मनोबल तोड़ दिया।
बात सिर्फ विदेशी पिचों की नहीं, पिछले ही साल कमज़ोर मानी जाने वाली वेस्ट इंडीज़ टीम ने भारत के खिलाफ मुंबई में 590 रन की बड़ी पारी खेलकर टीम इंडिया की गेंदबाज़ी पर सवाल खड़े कर दिए।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर मानते हैं कि सालभर बाद भी टीम इंडिया उसी हालत में है जैसे सालभर पहले थी। टीम इंडिया के सामने कई सवाल हैं, जैसे -
1. कितने कारगर होंगे ज़हीर ख़ान?
2. कौन देगा ज़हीर का साथ?
3. क्या स्पिनरों को मिलेगा पिच का साथ?
धोनी, भज्जी और दूसरे कई खिलाड़ी आनेवाली सीरीज़ में टर्निंग ट्रैक की मांगकर रहे हैं लेकिन, बड़ी चुनौती यह है कि टीम के सामने उठ रहे सवालों का जवाब कौन गेंदबाज़ ढूंढ़ पाएगा। गेंदबाज़ रणजी का इम्तिहान कैसे पास करते हैं और उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ अपनी काबिलियत साबित कर पाते हैं या नहीं इन सवालों के जवाब खिलाड़ी और टीम इंडिया के आने वाले कल की तस्वीर तय करेंगे।
टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के करियर का यह अब तक का शायद सबसे बड़ा इम्तिहान है। धोनी कहते हैं कि कागज पर हम कमज़ोर हैं। राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास के बाद टीम अलग लगती है लेकिन हम बेहतर हो जाएंगे।
मुंबई में इंडिया−ए और इंग्लैंड-11 के बीच खेला गया मैच ड्रॉ रहा। उससे भी बुरी बात यह है कि टीम की गेंदबाजी को लेकर सवाल बरकरार रहे। इस मैच में भारत की ओर से सबसे ज़्यादा विकेट युवराज सिंह के नाम रहे। युवराज ने मैच में 94 रन देकर पांच विकेट झटके लेकिन, उनका मैच में खेलना तय नहीं नज़र आ रहा है।
कप्तान सुरेश रैना ने मैच में खुद सहित आठ गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया लेकिन, मेहमान टीम ने पहली पारी में 426 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। मैच में मेहमान कप्तान एलिस्टर कुक और समित पटेल ने शतकीय पारियां खेलीं, तो जोनाथन ट्रॉट और मैट प्रायर ने अर्द्धशतक जमाकर भारतीय गेंदबाज़ी को खोखला साबित किया।
एक बात तो तय है कि भारत−इंग्लैंड सीरीज़ में टीम इंडिया की कामयाबी या नाकामी काफ़ी हद तक उसके गेंदबाज़ों के हाथ में होगी। फ़िलहाल ये गेंदबाज़ इंग्लैंड−ए के खिलाफ़ नाकाम नज़र आए। अगर रणजी में भी इनकी रंगत नहीं बदली तो कई दिग्गजों का डर सच साबित हो जाएगा।
2012−13 का रणजी सीज़न शुक्रवार को शुरू होगा और भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए यह वरदान साबित हो सकता है। करीब दस साल बाद रणजी के पहले ही मैच में सचिन तेंदुलकर जौहर आज़माएंगे। रणजी सीज़न का पहला मैच टीम इंडिया के गेंदबाज़ों को परखने का शानदार मौका भी साबित होगा।
करीब सवा साल पहले क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स पर पहले टेस्ट मैच के पहले ही दिन जब कप्तान धोनी अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स राहुल द्रविड़ के हाथों में सौंप कर बॉलिंग क्रीज़ पर आए तो टीम की कमज़ोरी साफ दिखाई देने लगी थी। उसके बाद पहले इंग्लैंड ने और फिर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 0−4 से पीटा और टीम इंडिया का मनोबल तोड़ दिया।
बात सिर्फ विदेशी पिचों की नहीं, पिछले ही साल कमज़ोर मानी जाने वाली वेस्ट इंडीज़ टीम ने भारत के खिलाफ मुंबई में 590 रन की बड़ी पारी खेलकर टीम इंडिया की गेंदबाज़ी पर सवाल खड़े कर दिए।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर मानते हैं कि सालभर बाद भी टीम इंडिया उसी हालत में है जैसे सालभर पहले थी। टीम इंडिया के सामने कई सवाल हैं, जैसे -
1. कितने कारगर होंगे ज़हीर ख़ान?
2. कौन देगा ज़हीर का साथ?
3. क्या स्पिनरों को मिलेगा पिच का साथ?
धोनी, भज्जी और दूसरे कई खिलाड़ी आनेवाली सीरीज़ में टर्निंग ट्रैक की मांगकर रहे हैं लेकिन, बड़ी चुनौती यह है कि टीम के सामने उठ रहे सवालों का जवाब कौन गेंदबाज़ ढूंढ़ पाएगा। गेंदबाज़ रणजी का इम्तिहान कैसे पास करते हैं और उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ अपनी काबिलियत साबित कर पाते हैं या नहीं इन सवालों के जवाब खिलाड़ी और टीम इंडिया के आने वाले कल की तस्वीर तय करेंगे।
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