
रविचंद्रन अश्विन (फाइल फोटो)
श्रीलंका के ख़िलाफ़ गॉल टेस्ट के पहले दिन आर अश्विन को खेलना वाकई मुश्किल था। उनकी हर गेंद श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों का इम्तिहान ले रही थी। श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों को अश्विन को खेलने में इतनी मुश्किल हुई कि उन्होंने महज 46 रन देकर 6 विकेट चटका लिए।
ये लगातार दूसरा टेस्ट है, जब अश्विन ने एक पारी में पांच विकेट चटकाए हैं। इससे पहले फतुल्लाह टेस्ट में बांग्लादेश के खिलाफ अश्विन ने इकलौते टेस्ट की इकलौती पारी में 87 रन देकर 5 विकेट लिए थे।
ऐसे में साफ है कि भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर आर अश्विन की गेंदबाज़ी पटरी पर लौट आई है। अश्विन ने इसके लिए काफी मेहनत की है। गॉल टेस्ट के पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी गेंदबाज़ी में सुधार किया है और खुद का आलोचक बनकर अपनी गेंदबाज़ी को बेहतर बनाया है। हकीकत यही है कि अश्विन ने अपने बेसिक्स को सही किया है। उनका सारा ध्यान अपनी ऑफ़ स्पिन गेंदबाज़ी पर आ गया है।
पूर्व टेस्ट स्पिनर सरनदीप सिंह कहते हैं, "अश्विन को यह समझ में आ गया कि अगर ऑफ़ स्पिनर को ऑफ़ स्पिन पर विकेट नहीं मिलता है, तो बाकी वैराएटी से भी बहुत फ़ायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने मानसिक तौर पर ख़ुद को बेसिक्स पर लौटने के लिए तैयार किया है।"
यही वजह है कि चाहे वो फतुल्लाह का मैदान हो या फिर गॉल का, अश्विन की गेंदों में स्पिन नजर आ रहा है, वे कंट्रोल के साथ फ्लाइट भी करा रहे हैं। इन दो पहलुओं का असर उनकी गेंदबाज़ी पर साफ दिख रहा है।
हालांकि थोड़े समय पहले वे कैरम बॉल और ड्रिफ्टर जैसी दूसरी वैराएटी का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे थे। इतना ही नहीं वे कई बार अपनी गेंदबाज़ी एक्शन और बॉलिंग रन अप के साथ भी प्रयोग कर चुके थे। लेकिन इन तमाम प्रयोगों ने उन्हें एक औसत दर्जे का गेंदबाज़ बना दिया था। टीम में उनके स्थान पर सवाल उठने लगे थे, लेकिन सही वक्त पर उन्हें अपनी ग़लती का एहसास हुआ और नतीजा सबके सामने है। सरनदीप सिंह कहते हैं, "अगर अश्विन इसी कंट्रोल के साथ फ्लाइट और टर्न कराते रहे तो वे किसी भी पिच पर विकेट झटक सकते हैं।"
ये लगातार दूसरा टेस्ट है, जब अश्विन ने एक पारी में पांच विकेट चटकाए हैं। इससे पहले फतुल्लाह टेस्ट में बांग्लादेश के खिलाफ अश्विन ने इकलौते टेस्ट की इकलौती पारी में 87 रन देकर 5 विकेट लिए थे।
ऐसे में साफ है कि भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर आर अश्विन की गेंदबाज़ी पटरी पर लौट आई है। अश्विन ने इसके लिए काफी मेहनत की है। गॉल टेस्ट के पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी गेंदबाज़ी में सुधार किया है और खुद का आलोचक बनकर अपनी गेंदबाज़ी को बेहतर बनाया है। हकीकत यही है कि अश्विन ने अपने बेसिक्स को सही किया है। उनका सारा ध्यान अपनी ऑफ़ स्पिन गेंदबाज़ी पर आ गया है।
पूर्व टेस्ट स्पिनर सरनदीप सिंह कहते हैं, "अश्विन को यह समझ में आ गया कि अगर ऑफ़ स्पिनर को ऑफ़ स्पिन पर विकेट नहीं मिलता है, तो बाकी वैराएटी से भी बहुत फ़ायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने मानसिक तौर पर ख़ुद को बेसिक्स पर लौटने के लिए तैयार किया है।"
यही वजह है कि चाहे वो फतुल्लाह का मैदान हो या फिर गॉल का, अश्विन की गेंदों में स्पिन नजर आ रहा है, वे कंट्रोल के साथ फ्लाइट भी करा रहे हैं। इन दो पहलुओं का असर उनकी गेंदबाज़ी पर साफ दिख रहा है।
हालांकि थोड़े समय पहले वे कैरम बॉल और ड्रिफ्टर जैसी दूसरी वैराएटी का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे थे। इतना ही नहीं वे कई बार अपनी गेंदबाज़ी एक्शन और बॉलिंग रन अप के साथ भी प्रयोग कर चुके थे। लेकिन इन तमाम प्रयोगों ने उन्हें एक औसत दर्जे का गेंदबाज़ बना दिया था। टीम में उनके स्थान पर सवाल उठने लगे थे, लेकिन सही वक्त पर उन्हें अपनी ग़लती का एहसास हुआ और नतीजा सबके सामने है। सरनदीप सिंह कहते हैं, "अगर अश्विन इसी कंट्रोल के साथ फ्लाइट और टर्न कराते रहे तो वे किसी भी पिच पर विकेट झटक सकते हैं।"
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