"इस सीज़न और पिछले सीज़न मिलाकर आकिब नबी 100 से ज़्यादा विकेट लिए हैं. हर तरह की पिच पर विकेट लिए हैं. वो कनसिस्टेंट है और उसकी कमाल की एक्यूरेसी है. वो अभी फॉर्म में है और उसे अभी ही टीम इंडिया में मौक़ा मिलना चाहिए. बाद में कई बार देर हो जाती है." रणजी चैंपियन जम्मू कश्मीर के बॉलिंग कोच कृष्ण कुमार NDTV से बात करते हुए बेहद गर्व के साथ आकिब नबी की खूबियों पर रोशनी डालते हैं. जम्मू कश्मीर की कामयाबी में पूरी टीम, सपोर्ट स्टाफ और अधिकारियों के साथ उनकी गेंदबाज़ी यूनिट का शानदार रोल रहा. आक़िब नबी ने मौजूदा सीज़न में 2.65 की इक़नमी के साथ सबसे ज़्यादा 60 विकेट झटके और रणजी सीज़न के प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट के ख़िताब से नवाज़े गए.
शानदार ऑलराउंडर हैं नबी, हार्दिक की दिखती है झलक
बॉलिंग कोच कृष्ण कुमार खुद भी के तेज़ गेंदबाज़ रहे हैं जिन्होंने रणजी मैचों में बतौर मध्यम तेज़ गेंदबाज़ गेंदबाज़ खूब शोहरत कमाई थी. तीन साल पहले कृष्ण कुमार ने जम्मू कश्मीर की कमान संभाली और उसकी पेसर्स की यूनिट को एक स्तर से ऊपर ले जाने की ठान ली. पेसर्स यूनिट के साथ काम करते हुए उन्होंने कभी गीली गेंद से, कभी गेंद को स्क्रैच कर रिवर्स स्विंग के लिए तैयार करने जैसे कई स्किल्स पर ख़ास काम किया. इन सबका असर टीम की गेंदबाज़ी पर हर मैच में दिखा.

बॉलिंग कोच कोच कृष्ण कुमार की अगुआई में जम्मू कश्मीर के पेसर्स खूब चमके. आकिब नबी ने 10 मैचों में टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा 60 प्लस विकेट झटके. एक्सपर्ट्स के मुताबिक वो जल्दी ही टीम इंडिया की ब्लू जर्सी में दिखेंगे. इस 10 मैचों में उन्होंने मैच में 7 बार पांच विकेट और 2 बार 10 विकेट लेने का भी कारनामा किया.
कृष्ण कुमार कहते हैं,"आक़िब बारामुला से आते हैं और वो उनके घर के पास कोई क्रिकेट का मैदान नहीं है. उन्हें गेंदबाज़ी करने के लिए 60 से 100 किलोमीटर तक का सफ़र करना पड़ता था. लेकिन वो कमाल के मेहनती गेंदबाज़ हैं."
जम्मू कश्मीर टीम के 28 साल के बांये हाथ के पेसर सुनील कुमार टूर्नामेंट की फ़ाइनल पारी से पहले 9 मैचों में 31 विकेट अपने नाम किये. दांये हाथ के 28 साल के पेसर युद्धवीर सिंह ने 21 और 29 साल के बांये हाथ के स्पिनर आबिद मुश्ताक ने 20 विकेट झटके.
'विजज हज़ारे में सेंचुरी, उम्दा ऑलराउंडर हैं आक़िब'
पूरे टूर्नामेंट में जम्मू कश्मीर के बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ों ने एक सॉलिड यूनिट की तरह प्रदर्शन किया. फ़ाइनल तक जम्मू कश्मीर की टीम की ओर से बैटर्स ने 9 मैचों में 10 शतक और 22 अर्द्धशतकीय पारियां खेलीं. बड़ी बात ये है कि इनमें 11 खिलाड़ियों का योगदान रहा. कप्तान पारस डोगरा, शुभम पुंडीर, कामरान इक़बाल ने टूर्नामेंट में 2-2 शतक लगाए.

कृष्ण कुमार कहते हैं,"देखिए, आक़िब सिर्फ़ गेंदबाज़ नहीं, वो अच्छी बैटिंग भी कर लेते हैं. आठवें नंबर पर आकर भी उन्होंने 10 मैचों में 2 अर्द्धशतकीय पारियां खेली हैं. विजय हज़ारे के एक मैच में 7 विकेट पर 90 के स्कोर से टीम को जीत हासिल करवा चुके हैं. यही नहीं विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में आक़िब ने हैदराबाद जैसी टीम के ख़िलाफ़ 64 गेंदों सेंचुरी (82 गेंद, 114*, 10 चौका, 7 छक्का) बनाई थी. उस टीम में मो. सिराज भी गेंदबाज़ी कर रहे थे."
'जम्मू कश्मीर ने बनाया जीत का टेम्पेलट'
गेंदबाज़ी कोच कृष्ण कुमार कहते हैं,"जम्मू कश्मीर ने दूसरी टीमों के लिए भी एक टेम्प्लेट तैयार कर दिया है. कोई भी टीम 2-3 साल अच्छे से प्लान कर खेले तो टॉप तक पहुंच सकती है. हमारी टीम, अजय शर्मा, सभी कोच और सपोर्ट स्टाफ़, बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मिन्हास और उससे पहले जय शाह जी ने भी इसे ऊपर जाने की एक ठोस योजना बनाई. पूरी टीम ने बहुत मेहनत की है तब जाकर इस मुकाम तक पहुंच पाये हैं. इस टीम ने इतिहास बनाया है. हम सबका सपना एक साथ पूरा हुआ है."
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