Share Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू चिंताओं के बीच बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ.
पिछले हफ्ते की मंदी की मार देश की दिग्गज कंपनियों पर सबसे ज्यादा पड़ी है, जिनमें से टॉप-10 की सूची वाली 6 कंपनियों ने मिलकर करीब 64,734.46 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू गंवा दी. हालांकि इस गिरावट के दौर में भी TCS, Infosys, L&T और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां मुनाफे में रहीं और निवेशकों को कुछ हद तक राहत मिली.
भारती एयरटेल को सबसे बड़ा झटका
मार्केट कैप (Mcap) के लिहाज से सबसे ज्यादा नुकसान भारती एयरटेल को हुआ. कंपनी की वैल्यू 29,993.07 करोड़ रुपये घटकर 10.20 लाख करोड़ रुपये रह गई. कई दूसरी दिग्गज कंपनियों का हाल भी बेहाल रहा.
- भारती एयरटेल (Bharti Airtel): 29,993.07 करोड़ रुपये की गिरावट
- ICICI बैंक: 12,845.81 करोड़ रुपये की गिरावट
- बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance): 11,169.36 करोड़ रुपये का नुकसान
- HDFC बैंक: 7,822.79 करोड़ रुपये की वैल्यू कम हुई
- हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever): 2,349.59 करोड़ रुपये का घाटा
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI): 553.84 करोड़ रुपये की मामूली गिरावट
हालांकि, बाजार में नुकसान के बीच भी TCS (22,359.78 करोड़ रुपये की बढ़त), Infosys, L&T और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने निवेशकों को राहत दी और मुनाफे में रहे.
पिछले हफ्ते का मार्केट रिपोर्ट कार्ड
बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में रहे. स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी बिकवाली के दबाव से बच नहीं पाए. निफ्टी पीएसयू बैंक (5.21%), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हेल्थकेयर और ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई. केवल आईटी (IT) और मेटल सेक्टर ही हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे.
3 फैक्टर्स जो इस हफ्ते तय करेंगे बाजार की दिशा
निवेशकों के लिए आने वाला हफ्ता (6-12 अप्रैल) बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है. बाजार की चाल मुख्य रूप से इन तीन कारकों पर टिकी होगी:
- RBI की मौद्रिक नीति (MPC Meeting): 6 से 8 अप्रैल के बीच रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होने वाली है. बढ़ती महंगाई को देखते हुए ब्याज दरों पर आरबीआई का फैसला बाजार के लिए गेम-चेंजर साबित होगा.
- अमेरिका-ईरान युद्ध और सप्लाई चेन: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित कर रहा है. युद्ध से जुड़ी कोई भी नई अपडेट बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) पैदा कर सकती है.
- कच्चे तेल की 'आग': कच्चा तेल फिलहाल 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. बीते एक महीने में इसमें 34% से ज्यादा का उछाल आया है. अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ेगा.
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के अनुसार, 'विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी, रुपये की कमजोरी और महंगाई की चिंता ने बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ दिया है. जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में रिकवरी मुश्किल दिख रही है.'
(PTI और IANS के इनपुट के साथ)
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