- भारत का सबसे बड़ा IPO आया, Jio Platforms की वैल्यूएशन 10.3 लाख करोड़
- Jio IPO को लेकर बाजार में उत्साह, GMP ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी
- Jio IPO में निवेश से पहले ये बातें जरूर जान लें
देश के सबसे बड़े IPO जियो को निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. करीब 100 मिनट में ही आईपीओ सौ प्रतिशत सब्सक्राइव हो गया है. बड़े संस्थागत निवेशकों का हिस्सा 3.68 गुना सब्सक्राइव हो गया है. आईपीओ में निवेश 23 अक्तूबर तक खुला रहेगा. जियो ने 19 करोड़ 75 लाख 25 हजार 934 शेयर बिक्री के लिए रखे हैं. वहीं शुरुआती दो घंटे में ही 22 करोड़ 65 लाख, 62 हजार, 880 शेयरों के लिए बोली मिली है.
पहले जानिए जियो IPO से जुड़ी अहम जानकारी
- कंपनी: जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड
- IPO खुलने की तारीख: 21 अक्टूबर 2026
- IPO बंद होने की तारीख: 23 अक्टूबर 2026
- प्राइस बैंड: 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर
- इश्यू साइज: 30,213 करोड़ रुपये तक
- इश्यू का प्रकार: 27 करोड़ तक नए शेयरों का फ्रेश इश्यू
- न्यूनतम लॉट साइज: 12 शेयर
- न्यूनतम रिटेल निवेश: निचले प्राइस बैंड पर 12,780 रुपये, ऊपरी प्राइस बैंड पर 13,428 रुपये
- संभावित अलॉटमेंट तिथि: 26 अक्टूबर 2026
- संभावित लिस्टिंग तिथि: 28 अक्टूबर 2026
- लिस्टिंग एक्सचेंज: बीएसई और एनएसई
- ऊपरी प्राइस बैंड पर वैल्यूएशन: लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये

जियो IPO के प्रमुख आंकड़े
Photo Credit: NDTV
अभी क्यों चर्चा में है Jio IPO?
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO केवल अपने साइज के कारण ही अहम नहीं है. यह लगभग दो दशकों में रिलायंस समूह का पहला बड़ा पब्लिक शेयर इश्यू है. इसके जरिए निवेशकों को भारत के सबसे बड़े डिजिटल और टेलीकॉम नेटवर्क में से एक की हिस्सेदारी खरीदने का मौका मिलेगा.
इसके बाद कंपनी ने होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी, डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया है. जियो कंपनी को Meta और Google जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों का सपोर्ट भी प्राप्त है.
यदि अनुमानित वैल्यूएशन हासिल होती है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के 27,870 करोड़ रुपये के IPO को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन जाएगा.
Jio IPO का प्राइस बैंड और न्यूनतम निवेश कितना है?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. निवेशक इस दायरे में किसी भी कीमत पर आवेदन कर सकते हैं. न्यूनतम आवेदन 12 शेयरों का है. इसका मतलब ये हुआ कि निचले प्राइस बैंड पर निवेश 12,780 रुपये और ऊपरी प्राइस बैंड पर निवेश 13,428 रुपये है. ज्यादा शेयर के लिए निवेशकों को निर्धारित लॉट मल्टीपल में आवेदन करना होगा. अभी के इश्यू में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक का और जियो कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक का रिजर्वेशन तय किया गया है. कर्मचारियों को अंतिम इश्यू मूल्य पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट भी मिलेगी.
कितनी राशि जुटाएगी जियो कंपनी?
कंपनी 27 करोड़ नए शेयर जारी कर 30,213 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना बना रही है. यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, यानी मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं. कंपनी नए शेयर जारी करेगी और जुटाई गई राशि सीधे कंपनी को प्राप्त होगी. जुटाए गए धन का बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज के भुगतान या प्री-पेमेंट में किया जाएगा. बाकी का हिस्सा सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में इस्तेमाल किया जाएगा. कर्ज कम होने से वित्तीय लागत घट सकती है और कंपनी को नेटवर्क और डिजिटल कारोबार में निवेश के लिए अधिक वित्तीय लचीलापन मिल सकता है. हालांकि IPO के बाद भी रिलायंस इंडस्ट्रीज कंपनी पर बड़ा नियंत्रण बनाए रखेगी, हालांकि उसकी हिस्सेदारी कुछ कम होगी.
Jio IPO GMP क्या संकेत देता है?
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) इस IPO की सबसे चर्चित बातों में शामिल है. IPO खुलने से पहले मार्केट एक्सपर्ट्स ने लगभग 245 रुपये से 273 रुपये प्रति शेयर का प्रीमियम बताया. यदि ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये माना जाए तो 245 रुपये GMP के आधार पर संभावित मूल्य 1,364 रुपये वहीं 273 रुपये GMP के आधार पर संभावित मूल्य 1,392 रुपये होगा. यह क्रमशः करीब 21.9% और 24.4% अधिक है. हालांकि यह केवल अनौपचारिक बाजार संकेत हैं, लिस्टिंग मूल्य की कोई गारंटी नहीं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश का निर्णय केवल GMP के आधार पर नहीं लेना चाहिए.
ब्रोकरेज कंपनियां क्या कह रही हैं?
ब्रोकरेज कंपनियों का रुख सामान्यतः सकारात्मक है. विश्लेषकों का मानना है कि जियो का विशाल कस्टमर बेस, आय में वृद्धि और विस्तार की संभावनाएं इसकी प्रमुख ताकत हैं. मोतिलाल ओसवाल ने लिस्टिंग गेन और दीर्घकालिक निवेश दोनों के लिए IPO को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है. ब्रोकरेज ने जियो के 5G नेटवर्क, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और AI को प्रमुख फैक्टर बताया है. श्रीराम फाइनेंस ने भी मध्यम और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सकारात्मक राय दी है. हालांकि उसने नियामकीय जोखिम, प्रतिस्पर्धा, संबंधित पक्षों पर निर्भरता और वित्तीय दायित्वों को प्रमुख जोखिम बताया है.
जियो प्लेटफॉर्म्स का वित्तीय प्रदर्शन
FY26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है. वित्तीय वर्ष 25 और 26 की तुलना करें तो इस प्रकार के आंकड़े हैं.
ऑपरेशंस से राजस्व
- FY25: 1.28 लाख करोड़ रुपये
- FY26: 1.46 लाख करोड़ रुपये
शुद्ध लाभ
- FY25: 26,109 करोड़ रुपये
- FY26: 30,049 करोड़ रुपये
EBITDA
- FY25: 64,170 करोड़ रुपये
- FY26: 76,255 करोड़ रुपये
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट में वृद्धि हुई है. निवेशक केवल कंपनी के वर्तमान आकार में निवेश नहीं कर रहे, बल्कि उसकी भविष्य की कमाई क्षमता का भी मूल्यांकन कर रहे हैं. हालांकि मार्च 2026 तक समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी के लगभग 90 प्रतिशत राजस्व और लाभ का स्रोत अभी भी टेलीकॉम व्यवसाय ही था.
निवेशकों को किन जोखिमों का ध्यान रखना चाहिए?
मजबूत बाजार स्थिति के बावजूद IPO पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है.
1. नियामकीय जोखिम (Regulatory risks) : टेलीकॉम एक विनियमित क्षेत्र है. लाइसेंसिंग नियम, स्पेक्ट्रम लागत और डेटा नियमों में बदलाव कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं.
2. प्रतिस्पर्धा (Competition) : जियो को स्थापित टेलीकॉम ऑपरेटरों और सैटेलाइट ब्रॉडबैंड जैसी नई तकनीकी सेवाओं से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है.
3. ग्राहक आधार से कमाई (Monetisation) : बड़ी ग्राहक संख्या हमेशा ज्यादा कमाई की गारंटी नहीं देती. कंपनी को प्रति ग्राहक आय बढ़ानी होगी.
4. तकनीकी निवेश (Technology spending) : AI, नेटवर्क अपग्रेड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी, जिनका रिटर्न आने में समय लग सकता है.
5. प्रमोटर नियंत्रण (Promoter control) : IPO के बाद भी रिलायंस इंडस्ट्रीज बहुलांश हिस्सेदारी रखेगी. कम निवेश करने वाले शेयरधारकों को कॉरपोरेट गवर्नेंस और संबंधित पक्ष जोखिमों का मूल्यांकन करना होगा.
6. बाजार में उतार-चढ़ाव (Market volatility) : मजबूत IPO भी कमजोर बाजार माहौल में उम्मीद से कम प्रदर्शन कर सकता है.
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
वरिष्ठ ट्रेड विश्लेषक वेंकट एस ने NDTV से बात करते हुए कहा कि 'जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO एक बड़े और स्थापित टेलीकॉम व्यवसाय को ब्रॉडबैंड, क्लाउड कंप्यूटिंग, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और AI की महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़ता है. इसका कस्टमर बेस, वित्तीय प्रदर्शन और रिलायंस इंडस्ट्रीज का सपोर्ट इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि केवल IPO का आकार और लिस्टिंग को लेकर उत्साह निवेश का आधार नहीं होना चाहिए.
जो निवेशक दीर्घकालिक निवेश पर विचार कर रहे हैं, उन्हें कंपनी की वित्तीय स्थिति, विकास की संभावनाओं और जोखिमों का अपनी निवेश अवधि तथा जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार मूल्यांकन करना चाहिए.
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