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'हमारे दुश्मनों को छोड़कर सभी के लिए खुला है रास्ता', हॉर्मुज में युद्ध के बीच ईरान का बड़ा बयान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल दुश्मन देशों के लिए बंद है, बाकी दुनिया के लिए खुला है. इस बीच भारत के 28 जहाजों के साथ 750 कार्गो शिप वहां फंसे हुए हैं और कच्चे तेल की कीमतें $127 के पार पहुंच गई हैं.

'हमारे दुश्मनों को छोड़कर सभी के लिए खुला है रास्ता', हॉर्मुज में युद्ध के बीच ईरान का बड़ा बयान

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कही जाने वाली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने एक बड़ा बयान दिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि ये रणनीतिक समुद्री मार्ग अमेरिका और इजरायल को छोड़कर दुनिया के बाकी सभी देशों के लिए खुला हुआ है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का बड़ा बयान

मीडिया प्लेटफॉर्म MS Now को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के विदेश मंत्री ने शुक्रवार को कहा, "स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहाज की आवाजाही के लिए खुला है. वो सिर्फ हमारे दुश्मन देश और उनके सहयोगियों  के टैंकरो और जहाज के लिए बंद है जो हम पर लगातार हमले कर रहे हैं. बाकी सभी देशों के लिए यह खुला हुआ है ". 

ईरान के विदेश मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास करीब 750 जहाज पिछले 15 दिनों से फंसे हुए हैं. शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में भारत के 24 कार्गो जहाज फंसे हैं, जबकि पूर्वी इलाके में चार कार्गो जहाज फंसे हुए हैं .

ईरान के विदेश मंत्री के मुताबिक, सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण इस इलाके में सुरक्षा स्थिति की वजह से जहाज की आवाजाही बाधित हो रही है, ईरान ने किसी जहाज को यहां रोका नहीं है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पिछले 15 दिनों से मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से वॉर जोन बना हुआ है. इसकी वजह से मध्यपूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई होने वाला करीब 20% कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 के ऊपर बनी हुई है. 

विदेश मंत्री के बयान से जगी उम्मीदें

अब ईरान के विदेश मंत्री के बयान से उम्मीद की नई किरण जगी है कि यहां फंसे 750 कार्गों शिप्स की आवाजाही फिर शुरू हो सकती है. इस संकट का सबसे ज्यादा असर भारत जैसे देश पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का करीब 85 फ़ीसदी कच्चा तेल 40 देश से आयात करता है.

पेट्रोलियम मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व में युद्ध की वजह से 12 मार्च, 2026 को कच्चे तेल की औसत कीमत 127.22/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. इस वजह से 01 मार्च से 12 मार्च, 2026 के बीच कच्चे तेल की औसत कीमत $ 101.25/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. PPAC के मुताबिक, फरवरी 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानि जारी युद्ध की वजह से अब तक कच्चे तेल की औसत कीमत फरवरी के मुकाबले 12 मार्च, 2026 तक करीब 32 अमेरिकी डॉलर/बैरल तक बढ़ चुकी है.

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