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ग्लोबल संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, Fitch ने बढ़ाया GDP ग्रोथ अनुमान, FY26 में 7.5% की रफ्तार से दौड़ेगी इकोनॉमी

India’s GDP Growth Forecast FY26: दुनिया भर में जारी तनाव और बढ़ती महंगाई के बीच भारत का प्रदर्शन शानदार रहा है.फिच रेटिंग्स का अनुमान है कि ग्लोबल संकट के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार धीमी नहीं होगी.

ग्लोबल संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, Fitch ने बढ़ाया GDP ग्रोथ अनुमान, FY26 में 7.5% की रफ्तार से दौड़ेगी इकोनॉमी
GDP Growth Forecast: वैश्विक तनाव के बीच भी भारत की रफ्तार बरकरार, Fitch को FY26 में 7.5% ग्रोथ की उम्मीद
नई दिल्ली:

 जहां एक तरफ पूरी दुनिया ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सहमी हुई है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर आई है. वैश्विक अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. इसी भरोसे के साथ फिच रेटिंग्स ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा दिया है. Fitch  ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर  (GDP Growth Rate) 7.5% रहने का अनुमान लगाया है, जो पहले 7.4% था.

फिच के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा सहारा घरेलू मांग से मिल रहा है. रिपोर्ट में अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में उपभोक्ता खर्च 8.6% और निवेश 6.9% तक बढ़ सकता है.

ग्लोबल इकोनॉमी 2026 में 2.6% बढ़ने का अनुमान

फिच ने अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक मार्च 2026 रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2026 में दुनिया की GDP ग्रोथ करीब 2.6% रहने की उम्मीद है.हालांकि यह अनुमान इस पर आधारित है कि ईरान युद्ध तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेज उछाल नहीं लाएगा. अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह ग्लोबल सप्लाई के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.

2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत $70 रहने का अनुमान

फिच का मानना है कि वर्ष 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है.रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजराइल द्वारा फरवरी के अंत में ईरान पर हमले के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 20 डॉलर बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं.

फिच का बेसलाइन अनुमान है कि मार्च तक कीमतें 90–100 डॉलर के बीच रह सकती हैं, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब एक महीने तक प्रभावी रूप से बंद रह सकता है. इसके बाद 2026 की दूसरी छमाही में तेल की कीमतें 60 डॉलर के मध्य स्तर तक आ सकती हैं.

FY27 से ग्रोथ में थोड़ी नरमी आने की संभावना

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की GDP ग्रोथ FY26-27 में घटकर 6.7% और FY27-28 में 6.5% तक आ सकती है.फिच के मुताबिक अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में बढ़ती महंगाई लोगों की रियल इनकम पर दबाव डालेगी, जिससे कन्ज्यूमर स्पेंडिंग की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है.

अर्थव्यवस्था मजबूत लेकिन थोड़ी सुस्ती के संकेत

फिच ने कहा कि जनवरी और फरवरी के कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा में आर्थिक गतिविधियों की गति थोड़ी धीमी दिख रही है.हालांकि GST कलेक्शन, मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट, एयर ट्रैवल और डिजिटल पेमेंट जैसे इंडिकेटर बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है. इसके साथ ही क्रेडिट ग्रोथ अभी भी डबल डिजिट में है.

GDP बेस ईयर बदलने से ग्रोथ का आंकड़ा हुआ स्मूथ

GDP के बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने के बाद ग्रोथ का ट्रेंड थोड़ा संतुलित दिख रहा है.अब 2023-24 में GDP ग्रोथ 7.2% और 2024-25 में 7.1% आंकी गई है, जबकि पहले ये 9.2% और 6.5% बताई गई थीं.

निवेश और सरकारी पूंजी खर्च पर रहेगा फोकस

फिच का अनुमान है कि शॉर्ट पीरिएड में निवेश की गति थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से ढीली वित्तीय परिस्थितियों और कम ब्याज दरों के कारण इसमें फिर से तेजी आ सकती है.

सरकार के बजट में भी पब्लिक कैपेक्स को नाममात्र GDP की रफ्तार के साथ बढ़ाने का अनुमान जताया गया है.

कमजोर मांग से आयात घटेगा, ट्रेड को सहारा

रिपोर्ट के मुताबिक अगर घरेलू मांग थोड़ी कमजोर होती है तो आयात में कमी आ सकती है. इससे नेट ट्रेड का योगदान GDP ग्रोथ में पॉजिटिव रह सकता है.साथ ही अमेरिका में प्रभावी टैक्स रेट में कमी और टैरिफ जैसे फैसलों से बाहरी मांग को भी कुछ सहारा मिल सकता है.

महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने का अनुमान

फिच के अनुसार भारत में महंगाई दर अभी कम स्तर से धीरे-धीरे ऊपर आ रही है. जनवरी में हेडलाइन इंफ्लेशन 2.7% रहा, जो दिसंबर में 1.2% था.एजेंसी का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक महंगाई 4.5% तक पहुंच सकती है. अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो महंगाई और तेजी से बढ़ सकती है.

ब्याज दरों पर RBI का रुख फिलहाल स्थिर

फिच का कहना है किRBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने फरवरी में ब्याज दर 5.25% पर बरकरार रखी थी और तटस्थ रुख बनाए रखा है.रिपोर्ट के मुताबिक इस साल और अगले साल भी ब्याज दरों में बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है.

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