- भारत-EU व्यापार समझौते पर तेजी, 2026 में अंतिम रूप मिलने की उम्मीद
- पीयूष गोयल ने बताई FTA की टाइमलाइन, मार्च-अप्रैल में लागू होने की संभावना
- विकसित भारत 2047 में यूरोप बनेगा अहम साझेदार: पीयूष गोयल
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है. हेग में NDTV से खास बातचीत के दौरान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी और नीदरलैंड्स की अपनी पांच दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा के महत्वपूर्ण नतीजों पर कहा कि भारत-EU FTA को 2026 कैलेंडर वर्ष समाप्त होने से पहले अंतिम रूप देकर हस्ताक्षरित किए जाने की उम्मीद है. उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि समझौते से व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग, शिक्षा और प्रतिभा विकास के नए अवसर खुलेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में यूरोप एक महत्वपूर्ण भागीदार बनेगा.
2026 के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को वार्ताओं के निष्कर्ष की घोषणा की थी. अब उम्मीद है कि 2026 कैलेंडर वर्ष समाप्त होने से पहले इस समझौते पर अंतिम कानूनी हस्ताक्षर हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि संभवतः मार्च या अप्रैल तक यह समझौता सभी 27 यूरोपीय संघ सदस्य देशों के समर्थन के साथ लागू भी हो सकता है. गोयल के अनुसार यह यूरोप द्वारा किए गए सबसे तेज मंजूर होने वाले मुक्त व्यापार समझौतों में से एक होगा.
भारत-EU व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर से पहले; NDTV से बोले पीयूष गोयल- 'दोनों पक्षों के लिए फायदे का सौदा' #PiyushGoyal | @himanshusm https://t.co/jw9WLmXSm8
— NDTV India (@ndtvindia) October 27, 2026
'पूरी तरह विन-विन समझौता'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह ऐसा समझौता है जिसमें सभी पक्षों को लाभ होगा. उनके अनुसार भारतीय उद्योग और व्यापार जगत इस समझौते से वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात, विदेशी निवेश, तकनीकी साझेदारी, प्रतिभा विकास और शैक्षणिक सहयोग के नए अवसरों की उम्मीद कर रहा है. उन्होंने बताया कि FTA के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश समझौता (Investment Agreement) और भौगोलिक संकेतक (GI) समझौता भी होने की संभावना है.
विकसित भारत 2047 में यूरोप की अहम भूमिका
गोयल ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यूरोप भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनने जा रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते सहयोग से व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे तथा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा होंगी.
यूरोप के नियमों पर भी जताई चिंता
बातचीत के दौरान गोयल ने कुछ यूरोपीय देशों में बढ़ते नियामकीय बोझ (Regulatory Burden) पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार स्वीकृति संबंधी बोझ कम करने, प्रक्रियाओं को आसान बनाने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रहे हैं. वहीं इसके उलट दुर्भाग्य से, खासकर यूरोप के कुछ देश अपने उद्योगों पर बहुत अधिक नियामकीय बोझ डाल रहे हैं. गोयल ने कहा कि मेरा मानना है कि इससे यूरोपीय कारोबारों को नुकसान होगा. हालांकि यह उनका आंतरिक मामला है. हर देश को अपनी नीतियां तय करने का अधिकार है. लेकिन इसका फायदा भारतीय उद्योगों को मिलेगा और भारत जैसे देशों की ओर अधिक निवेश आकर्षित होगा, जहां उद्योगों की प्रगति के लिए अपेक्षाकृत अधिक सहायक माहौल है.
भारत बना रहा निवेश के अनुकूल माहौल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत गुणवत्ता मानकों को मजबूत कर रहा है, लेकिन साथ ही व्यापार के लिए बाधक कानूनों और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी गलतियों के लिए अब कारोबारियों को जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा. सरकार प्रक्रियाओं को सरल बना रही है ताकि व्यवसायी औपचारिकताओं के बजाय अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान दे सकें.
दुनिया के निवेशकों के लिए बड़ा अवसर
पीयूष गोयल ने विश्वास जताया कि 1.4 अरब आकांक्षी लोगों की आबदी वाला भारत दुनिया के निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक बाजार बनकर उभरेगा. उन्होंने कहा कि भारत में निवेश करना और भारत के साथ व्यापार करना वैश्विक कंपनियों के लिए एक स्वाभाविक व्यावसायिक विकल्प बनता जा रहा है. इससे न केवल विदेशी निवेश बढ़ेगा बल्कि भारत में नए रोजगार सृजित करने में भी मदद मिलेगी.
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