एशियन पेंट्स आज भारत में एक जाना-पहचाना नाम है. इसकी स्थापना आजादी से पहले, 1942 में मुंबई में हुई थी. उस समय मुंबई देश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था. इस कंपनी ने 1970 के दशक में एक ऐसा काम किया, जिसकी चर्चा आज भी होती है. दरअसल, कंपनी ने उस दौर में एक मेनफ्रेम कंप्यूटर खरीदा था. इस कंप्यूटर की कीमत उस समय करीब आठ करोड़ रुपये थी. जआइए, आपको बताते हैं कि एशियन पेंट्स ने इतना भारी-भरकम निवेश क्यों किया था और इससे उसे क्या फायदा हुआ.
एशियन पेंट्स ने इस कंप्यूटर से क्या किया
एशियन पेंट्स ने कंप्यूटर खरीदने पर इतना बड़ा निवेश उस समय किया था, जब भारत औपनिवेशिक शासन से उबरने के बाद आधुनिक तकनीकों को समझने और अपनाने की प्रक्रिया में था. देश में आईआईटी, एम्स और इसरो जैसे संस्थानों की स्थापना हो चुकी थी. इसी दौर में, 1970 में, एशियन पेंट्स ने सीडीसी 6600 नाम का मेनफ्रेम कंप्यूटर खरीदा था. आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने इसे करीब आठ करोड़ रुपये में खरीदा था.एशियन पेंट्स के इतना महंगा कंप्यूटर खरीदने के फैसले ने कंपनी के भविष्य को नई दिशा दी. इससे उसे अपना कारोबार बढ़ाने और काम करने के तरीकों को बेहतर बनाने में मदद मिली.
एशियन पेंट्स ने जो सीडीसी 6600 खरीदा था, वह उस समय की उन्नत तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण था. कंपनी इसका इस्तेमाल बिक्री के आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए करती थी. इसके जरिए वह पता लगाती थी कि देश के किस हिस्से में किस रंग या शेड की मांग सबसे ज्यादा है. इससे उसे अपनी मार्केटिंग रणनीति बनाने में मदद मिली. कंपनी यह समझने लगी कि अलग-अलग क्षेत्रों में ग्राहकों की पसंद किस तरह बदलती है. इसे एक तरह से मांग का अनुमान लगाने की तकनीक कहा जा सकता है. सीडीसी 6600 बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके कंपनी को यह समझने में मदद करता था कि ग्राहक कौन-से रंग पसंद कर सकते हैं. हालांकि, कुछ लोग इसे सुपरकंप्यूटर बताते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से इसे मेनफ्रेम कंप्यूटर कहना ज्यादा सही है.
एशियन पेंट्स का बाजार शेयर
सीडीसी 6600 की विश्लेषण क्षमता का इस्तेमाल करके एशियन पेंट्स अपने ग्राहकों की पसंद के अनुरूप स्टॉक तैयार करने लगी. डेटा विश्लेषण को अपनाकर कंपनी ने न केवल उत्पादन से जुड़े बेहतर फैसले लिए, बल्कि अपने वितरण नेटवर्क में भी बड़े बदलाव किए. कारखानों से लेकर खुदरा दुकानदारों तक उत्पादों की आवाजाही पर नजर रखकर कंपनी ने अपनी आपूर्ति व्यवस्था की कमियों को पहचाना और उन्हें दूर करने की कोशिश की. इससे उत्पादों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिली.
आज एशियन पेंट्स भारत की सबसे बड़ी पेंट बनाने वाली कंपनियों में शामिल है. आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च को समाप्त हुए 12 महीनों में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 59 फीसदी से घटकर 52 फीसदी रह गई. भारत के पेंट उद्योग का आकार करीब 9.5 अरब डॉलर है. इस बाजार में एशियन पेंट्स के अलावा बिड़ला ओपस, बर्जर पेंट्स, कंसाई नेरोलैक, इंडिगो पेंट्स और एक्जो नोबेल इंडिया जैसी कंपनियां भी कारोबार करती हैं.
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