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कपड़ा उद्योग को सरकार ने दी बड़ी राहत! कॉटन के आयात पर सीमा शुल्क पूरी तरह माफ, एग्री सेस भी नहीं लगेगा

टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री के लिए अच्‍छी खबर है. केंद्र सरकार ने कॉटन के आयात पर कस्‍टम्‍स ड्यूटी पूरी तरह माफ कर दी है. इससे कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्‍मीद है. डिटेल में जानिए यहां.

कपड़ा उद्योग को सरकार ने दी बड़ी राहत! कॉटन के आयात पर सीमा शुल्क पूरी तरह माफ, एग्री सेस भी नहीं लगेगा
Big Relief to Textiles Industry: सरकार ने कॉटन से आयात शुल्‍क हटाया
Canva (तस्‍वीर सांकेतिक है)

भारतीय कपड़ा (टेक्सटाइल) उद्योग के लिए राहत भरी खबर है. कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कॉटन यानी कपास के आयात पर कस्‍टम्‍स ड्यूटी पूरी तरह से हटा दी है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, देश में कपास (Cotton) के आयात पर लगने वाले सभी प्रकार के सीमा शुल्क (Customs Duty) को अस्थाई रूप से पूरी तरह से माफ कर दिया गया है. इसे भारतीय टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है. 

जून से अक्टूबर तक मिलेगी छूट

केंद्र की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, सीमा शुल्‍क में छूट 1 जून 2026 से लागू होगी और 31 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेगी. इस 5 महीने की अवधि के दौरान, सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की पहली अनुसूची के तहत आने वाले कपास के आयात पर कोई भी सीमा शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके अतिरिक्त, फाइनेंस एक्ट, 2021 की धारा 124 के तहत लगने वाले 'कृषि सेस' (Agriculture Infrastructure and Development Cess- AIDC) से भी पूरी तरह से छूट दे दी गई है.

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कपड़ा सेक्‍टर को कैसे मिलेगी मजबूती?

ये कदम टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री के लिए राहत की तरह है. बताया गया है कि सरकार ने ये निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया है. 

वर्तमान में भारतीय कपड़ा उद्योग कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है. इस उद्योग की लगातार ये मांग थी कि घरेलू बाजार में कपास की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए आयात नियमों में ढील दी जाए.

जानकारों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से कपड़ा मिलों और मैन्युफैक्चरर्स को उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय कपड़ा उत्पादों की कंपटीशन बढ़ेगा. इसका फायदा भारतीय ग्राहकों को भी मिलेगा.  

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